ट्रंप को उल्टा पड़ा टैरिफ प्लान! भारतीय एक्सपोर्टर के लिए बड़ी राहत

नई दिल्ली। पिछले साल बढ़ी हुई शुल्क दर पर अमेरिका को निर्यात करने वाले भारतीय कारोबारियों को राहत मिल सकती है।

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अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने पारस्परिक शुल्क के नाम पर अमेरिकी सरकार की तरफ से की गई वसूली को वापस करने के लिए कहा है। यह रकम विभिन्न देशों से माल खरीदने वाले अमेरिकी खरीदारों को वापस की जाएगी।

हालांकि, विदेश व्यापार के विशेषज्ञों का कहना है कि जिन भारतीय निर्यातकों के संबंध अपने खरीदार से अच्छे हैं या पहले से उनके बीच कोई करार है तो उन्हें इसका लाभ मिलेगा।

ऑनलाइन फाइल कर सकते हैं रिफंड क्लेम

रिफंड पाने के लिए, अमेरिकी आयात को शिपमेंट डेटा, टैरिफ लाइन और भुगतान से जुड़े दस्तावेज, डिटेल्ड क्लेम ऑनलाइन फाइल करने होंगे।

अमेरिका में लेदर उत्पाद के निर्यातक आरके जालान ने बताया कि उन्हें कुछ राहत की उम्मीद है। इस सिलसिले में ही वे अमेरिका में अपने खरीदार के पास आए हैं। उन्होंने बताया कि मंगलवार से शुल्क के रिफंड को लेकर क्लेम करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। उनके खरीदारों ने उनसे शुल्क को लेकर सभी जानकारी देने को कहा है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के मुताबिक भारत से गारमेंट, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर आइटम, जेम्स और ज्वैलरी खरीदने वाले अमेरिकी खरीदार को करीब 12 अरब डॉलर शुल्क के रूप में वापस मिल सकते हैं।

अब यह उन पर निर्भर करेगा कि वे इनमें से कितनी रकम भारतीय निर्यातकों को देते हैं। जालान ने बताया कि उन्हें जो भी रकम वापस मिलेगी, वह उनके लिए राहत ही होगी।

अमेरिका ने दुनिया के 50 से अधिक देशों पर लगाया था पारस्परिक शुल्क

पिछले साल अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क और उसके बाद रूस से तेल खरीदने के चलते 25 प्रतिशत का जुर्माना लगा दिया था।

भारतीय निर्यातक अमेरिका में इन 50 प्रतिशत के अलावा अप्रैल से पहले वाले शुल्क का भुगतान कर रहे थे। अमेरिका ने दुनिया के 50 से अधिक देशों पर पारस्परिक शुल्क लगाया, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश से निरस्त कर दिया गया। सभी देशों को पारस्परिक शुल्क के बदले अमेरिका को 166 अरब डालर वापस करना है।

भारत और अमेरिका बीच व्यापार समझौते के वैधानिक दस्तावेज को अंतिम रूप देने का काम जोरों पर है। इन दिनों भारतीय वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी दस्तावेज को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका में हैं।

भारत अमेरिका के बाजार में शुल्क के मामले में अपने प्रतिद्वंद्वी देश पर बढ़त चाहता है ताकि अमेरिका में भारत का निर्यात प्रभावित नहीं हो। अमेरिका भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है।

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