भारत के नजदीक अमेरिकी नौसेना का ईरानी तेल टैंकर पर कब्जा

वाशिंगटन: रक्षा विभाग ने मंगलवार को बताया कि अमेरिकी सेना के जवान धावा बोल कर एक तेल टैंकर पर सवार हो गए और उसे अपने कब्जे में ले लिया। इस टैंकर पर एशिया में ईरानी कच्चे तेल की तस्करी के आरोप में प्रतिबंध लगाया गया था। पेंटागन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिकी सेना ने ‘यात्रा के अधिकार के तहत समुद्री अवरोध’ उत्पन्न किया और ‘एम/टी टिफानी’ नामक टैंकर पर उसके जवान ‘बिना किसी प्रतिरोध’ के सवार हो गए। पेंटागन अमेरिका के रक्षा विभाग का मुख्यालय है।

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भारत के करीब पकड़ा गया ईरानी टैंकर

एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि टिफानी नामक जहाज को बंगाल की खाड़ी में भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच पकड़ा गया था और वह ईरानी तेल ले जा रहा था। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी सेना अगले चार दिनों में यह तय करेगी कि जहाज के साथ क्या करना है, जैसे कि उसे वापस अमेरिका ले जाना है या किसी अन्य देश को सौंप देना है।

अमेरिका-ईरान तनाव गहराने के आसार

ईरान के खिलाफ अमेरिका की जंग में यह नवीनतम कदम है, जिसके तहत तेहरान से जुड़े किसी भी जहाज या उन जहाजों को रोका जा रहा है जिन पर तेहरान सरकार की मदद करने वाली सामग्री, जैसे हथियार, तेल, धातु और इलेक्ट्रॉनिक्स ले जाने का संदेह है। यह घोषणा अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी नाजुक युद्धविराम की समाप्ति से कुछ घंटे पहले आई है। फिलहाल वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश पाकिस्तान कर रहा है।

ईरानी टैंकर कहां जा रहा था?

पेंटागन ने टिफानी को ‘देशविहीन’ बताया, हालांकि इस पर बोत्सवाना का ध्वज लगा है। घोषणा में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मंगलवार को जहाज पर कहां और किस समय धावा बोला गया। घोषणा के अनुसार यह घटना रात में घटित हुई। सेना ने उन वस्तुओं की एक विस्तृत सूची भी जारी की जिन्हें वह अवैध मानती है और घोषणा की कि वह व्यापारिक जहाजों पर ‘स्थान की परवाह किए बिना’ उनकी तलाशी लेगी और उन्हें जब्त कर लेगी।

ट्रंप प्रशासन ने क्या बताया?

पेंटागन की घोषणा में ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के पिछले बयानों को दोहराते हुए कहा गया, ”जैसा कि हमने स्पष्ट किया है, हम अवैध नेटवर्क को बाधित करने और ईरान को सामग्री पहुंचाने में सहायता प्रदान करने वाले प्रतिबंधित जहाजों को रोकने के लिए वैश्विक समुद्री प्रवर्तन प्रयास जारी रखेंगे – चाहे वे कहीं भी संचालित हों। अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र प्रतिबंधित जहाजों के लिए शरणस्थल नहीं है।”

अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी

ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने पिछले सप्ताह कहा था कि अमेरिकी नाकाबंदी ईरानी जलक्षेत्र और अमेरिकी केंद्रीय कमान के नियंत्रण वाले युद्ध क्षेत्र से आगे तक विस्तारित होगी। पेंटागन में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अन्य जिम्मेदारी वाले क्षेत्रों में अमेरिकी सेनाएं “ईरान के ध्वज वाले किसी भी जहाज या ईरान को सामग्री पहुंचाने में सहायता प्रदान करने का प्रयास करने वाले किसी भी जहाज का पीछा करेंगी।”

जब्त हुआ ईरान से जुड़ा दूसरा जहाज

ईरान से जुड़ा यह दूसरा जहाज है जिसे अमेरिकी सेना ने जब्त किया है। अमेरिकी नौसेना ने रविवार को ईरानी ध्वज वाले एक मालवाहक जहाज पर हमला कर उसे जब्त कर लिया। नौसेना का कहना है कि जहाज ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी से बचने की कोशिश की थी। विशेषज्ञ का कहना है कि युद्धकाल में नाकाबंदी वैध हो सकती है। ईरान से जुड़े जहाजों के खिलाफ अमेरिकी सेना की कार्रवाई, विशेष रूप से सप्ताहांत में मालवाहक जहाज ‘टौस्का’ पर हुए हमले ने दो सप्ताह के युद्धविराम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम पर एक्सपर्ट ने क्या बताया

लंदन सिटी यूनिवर्सिटी और मलेशिया के समुद्री संस्थान में कानून के प्रोफेसर जेसन चुआह ने कहा कि अमेरिका और ईरान एक ऐसी असहज स्थिति में हैं जहां कानून इस बात का स्पष्ट जवाब नहीं देता कि युद्धविराम का उल्लंघन हुआ है या नहीं। चुआह ने कहा, ”अमेरिका का मानना है कि संघर्ष पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है – यानी अभी भी सशस्त्र संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ऐसा कहकर वह नाकाबंदी लागू करने और यहां तक कि समुद्र में सीमित बल का प्रयोग करने जैसी कार्रवाई जारी रख सकता है।” लेकिन चुआह ने कहा कि ईरान युद्धविराम को सभी शत्रुतापूर्ण कृत्यों पर विराम के रूप में देख रहा है।

युद्धकाल में नाकाबंदी और हमले वैध?

इससे पहले अमेरिका ने वेनेजुएला से जुड़े प्रतिबंधित तेल टैंकरों के खिलाफ नाकाबंदी की थी, लेकिन उन जहाजों पर कभी गोलीबारी नहीं की थी। चुआह ने कहा कि युद्धकाल में जहाजों के खिलाफ नाकाबंदी और यहां तक कि सीमित हमले भी वैध हो सकते हैं। व्यापारिक जहाज वैध लक्ष्य बन जाते हैं यदि वे सैन्य कार्रवाई में योगदान देते हैं, तस्करी का सामान ले जाते हैं या दुश्मन की रसद प्रणाली में शामिल होते हैं।

(भाषा की खबर)

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