नई दिल्ली। कचरे को भी ऊर्जा का स्त्रोत बताते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने तकनीक पर विस्तार से चर्चा की कि कैसे वेस्ट टू एनर्जी का फार्मूला कारगर है।
देशभर में 80 लाख टन कचरे का हाईवे निर्माण में उपयोग कर दावा करते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2027 तक देशभर से कूड़े के पहाड़ (लीगेसी वेस्ट) को खत्म करने का कार्यक्रम तय किया है।
वहीं, पश्चिम एशिया संकट से उपजी परिस्थितियों की चर्चा करते हुए गडकरी ने ऊर्जा के सभी विकल्पों पर काम करने की जरूरत पर जोर देते हुए सलाह दी कि आने वाले समय में 100 प्रतिशत एथेनाल ब्लेडिंग पर जाना चाहिए।
2027 तक देशभर से कूड़े के पहाड़ होंगे खत्म
इंडियन फेडरेशन आफ ग्रीन एनर्जी के ग्रीन ट्रांसपोर्ट कान्क्लेव में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यहां उपस्थित आटोमोबाइल निर्माताओं सहित हितधारकों से कहा कि देशहित में सभी को समग्रता में सोचना होगा।
यदि हम वैकल्पिक ऊर्जा और बायो ऊर्जा की ओर जाएंगे तो देश से आयात का बोझ कम होगा, प्रदूषण में कमी आएगी, देश आत्मनिर्भर बनेगा और किसानों को लाभ मिलने के साथ ही रोजगार के भी नए अवसर तैयार होंगे। परिवहन मंत्री ने बताया कि अभी देश ऊर्जा का 87 प्रतिशत आयात करता है, जिस पर प्रति वर्ष लगभग 22 लाख करोड़ रुपया खर्च होता है।
100% एथेनॉल ब्लेंडिंग से आयात बोझ घटेगा
जिस तरह वैश्विक चुनौतियां हैं, उन्हें देखते हुए आत्मनिर्भर बनना ही सबसे बड़ा उद्देश्य है। उनका इशारा पश्चिम एशिया संकट के कारण उपजे ऊर्जा संकट की ओर था। उन्होंने कहा कि कचरे को सेग्रीगेट (पृथकीकरण) कर मीथेन बना सकते हैं। मीथेन से बायो सीएनजी और हाइड्रोजन तैयार कर सकते हैं।
कचरे से ही बायो बिटुमिन बन सकता है। दिल्ली-मुंबई हाईवे में कचरे के उपयोग से गाजीपुर लैंडफिल साइट पर कूड़े के पहाड़ की सात मीटर ऊंचाई घटने का दावा करते हुए उन्होंने 2027 तक देशभर से लीगेसी वेस्ट खत्म करने की प्रतिबद्धता जताई।
इस चर्चा के दौरान नितिन गडकरी ने अपनी पीड़ा भी व्यक्त की। कहा कि जब उन्होंने एथेनाल के उपयोग पर जोर दिया तो उनके खिलाफ ला¨बग की गई। पैसा खर्च उनके विरुद्ध अभियान चलवाया गया, लेकिन आज समय (ऊर्जा संकट) ने समझा दिया है और सभी एक लाइन में सोच रहे हैं।












