नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को केंद्र सरकार से पेट्रोल और डीजल की कीमतें घटाने की मांग की। दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि देश में शुद्ध पेट्रोल 82 रुपये प्रति लीटर और E20 पेट्रोल करीब 70 रुपये प्रति लीटर मिलना चाहिए। फिलहाल E20 पेट्रोल करीब 102 रुपये प्रति लीटर में बेचा जा रहा है।
केजरीवाल ने कहा कि जिस तरह पेट्रोल की कीमत कम की जा सकती है, उसी तरह डीजल के दाम भी घटाए जा सकते हैं। उनका कहना था कि अगर पेट्रोल और डीजल दोनों सस्ते हो जाएं तो महंगाई पर बड़ा असर पड़ेगा और आम लोगों को काफी राहत मिलेगी। उन्होंने सरकार से जल्द इस दिशा में कदम उठाने की मांग की।
AAP प्रमुख ने कहा, ‘देश में शुद्ध पेट्रोल 82 रुपये प्रति लीटर मिलना चाहिए। अगर E20 ईंधन दिया जाता है तो इसकी कीमत इससे भी कम, करीब 70 रुपये प्रति लीटर होनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों के हित में ईंधन की कीमतों की समीक्षा करनी चाहिए ताकि आम जनता पर बढ़ती महंगाई का बोझ कम हो सके।
पेट्रोलियम मंत्री ने क्या कहा था?
- केजरीवाल का यह बयान केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के हालिया बयान के कुछ दिन बाद आया है। 3 जुलाई को पुरी ने कहा था कि यदि आने वाले कुछ सप्ताह तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कटौती का सवाल स्वाभाविक होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि तत्काल कीमत घटाने को लेकर अभी कोई अटकल लगाना जल्दबाजी होगी।
- हरदीप सिंह पुरी ने बताया था कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए 74,781 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ उठाया। उन्होंने कहा कि कंपनियों ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लागत से कम कीमत पर बेचकर यह नुकसान सहा ताकि आम लोगों पर अतिरिक्त भार न पड़े।
E20 ईंधन पर भी सरकार ने किया बचाव
उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री ने E20 ईंधन को लेकर उठ रही चिंताओं को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि यदि माइलेज में थोड़ी बहुत कमी आती भी है, तो बेहतर इंजन प्रदर्शन और एक्सेलेरेशन उसके मुकाबले अधिक फायदेमंद हैं। पुरी ने बताया कि E20 ईंधन को लागू करने से पहले सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) सहित संबंधित संस्थाओं से व्यापक विचार-विमर्श किया गया था।










