मॉनसून की एंट्री, दो दिन की बारिश और बस… 15 जुलाई से बदल जाएगा मौसम

नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने गुरुवार को पूरे भारत को कवर कर लिया। सामान्य तौर पर मॉनसून 8 जुलाई तक पूरे देश में पहुंच जाता है, लेकिन इस बार यह 9 जुलाई को पूरे भारत में सक्रिय हुआ। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साफ किया है कि मॉनसून का सक्रिय दौर अब खत्म हो रहा है और 15 जुलाई से देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।

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इस साल मॉनसून ने 4 जून को केरल में दस्तक दी थी, जो सामान्य से तीन दिन देरी से थी। इसके बाद करीब दो सप्ताह तक मॉनसून की रफ्तार धीमी रही। जून के आखिरी सप्ताह और जुलाई की शुरुआत में हुई तेज बारिश ने स्थिति बदल दी और मॉनसून तेजी से आगे बढ़ते हुए पूरे देश में फैल गया। यह 2021 के बाद सबसे देरी से पूरे भारत को कवर करने वाला मॉनसून है।

40% से घटकर 14% रह गई बारिश की कमी

देश में 30 जून तक मॉनसून की कमी 40 फीसदी तक पहुंच गई थी, लेकिन लगातार हुई बारिश से यह आंकड़ा 9 जुलाई तक घटकर 14 फीसदी रह गया। अब तक देश में 233.1 मिमी के दीर्घकालिक औसत (LPA) के मुकाबले 205 मिमी बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अब भी हालात चिंताजनक हैं, जहां बारिश की कमी 38 फीसदी बनी हुई है।

15 जुलाई से सामान्य से कम बारिश का अनुमान

IMD के महानिदेशक एम. महापात्रा ने कहा कि 9 जुलाई तक मॉनसून सक्रिय रहा, लेकिन अब इसका सक्रिय चरण समाप्त हो चुका है। 10 जुलाई से अगले दो सप्ताह तक बारिश में धीरे-धीरे कमी आएगी। वहीं, जलवायु निगरानी एवं पूर्वानुमान समूह के प्रमुख वैज्ञानिक ओपी श्रीजीत ने कहा कि 15 जुलाई से देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है क्योंकि मॉनसूनी ट्रफ उत्तर की ओर खिसक रही है।

इन राज्यों में अभी भी भारी बारिश का खतरा

IMD ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आसपास बना कम दबाव का क्षेत्र 10 जुलाई तक बारिश को बढ़ावा देगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के स्पीति, किन्नौर, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों में भूस्खलन और मलबा गिरने की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

दिल्ली समेत कई राज्यों में हुई झमाझम बारिश

पिछले 24 घंटों में उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र और मेघालय में 21 सेंटीमीटर या उससे अधिक बारिश दर्ज की गई। वहीं पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कोंकण, त्रिपुरा और उप-हिमालयी क्षेत्रों में भी बहुत भारी बारिश हुई। राजधानी दिल्ली में भी तेज बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति देखने को मिली।

एल नीनो का असर रहेगा बरकरार

IMD ने जुलाई महीने के लिए दीर्घकालिक औसत (LPA) का 94 फीसदी यानी सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। वहीं पूरे मॉनसून सीजन के दौरान 90 फीसदी LPA बारिश का अनुमान लगाया गया है, जिसकी प्रमुख वजह एल नीनो को माना जा रहा है। इसका असर आने वाले हफ्तों में मॉनसून की तीव्रता पर भी पड़ सकता है।

11 जुलाई के बाद बढ़ सकती है गर्मी

स्काईमेट के मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत के अनुसार, मॉनसूनी ट्रफ तेजी से हिमालय की तलहटी की ओर बढ़ रही है। 10 जुलाई तक उत्तर-पश्चिम भारत में अच्छी बारिश हो सकती है, लेकिन इसके बाद कम दबाव का क्षेत्र कमजोर पड़ जाएगा। 11 जुलाई से उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में शुष्क हवाएं लौट सकती हैं, जिससे तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने और उमस बढ़ने की संभावना है।

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