नई दिल्ली: केरल की कांग्रेस सरकार ने केरल हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें राज्य वक्फ बोर्ड को कोई भी बड़ा फैसला लेने, कैपिटल खर्च करने या नीतिगत फैसले लेने से रोक दिया गया था। इस अपील को तत्काल सुनवाई के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच के सामने रखा गया। CJI ने मामले को सोमवार को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। अब इस मामले में सोमवार या मंगलवार को सुनवाई हो सकती है। केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) की सरकार है, जिसके मुख्यमंत्री वीडी सतीशन हैं।
केरल सरकार के वकील ने CJI से तत्काल सुनने को कहा
केरल के राज्य वक्फ बोर्ड के सीनियर एडवोकेट वी चितंबरेश ने इस मामले को शुक्रवार को सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने रखा। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच ने राज्य वक्फ बोर्ड के वकील की बात पर ध्यान दिया, जिन्होंने मामले की जल्द सुनवाई की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट सोमवार या मंगलवार को मामले की सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया।
केरल सरकार की ओर से क्या कहा गया था
सीजेआई सूर्यकांत ने मामले को सोमवार/मंगलवार को लिस्ट करने पर सहमति जताई, जब इसे अर्जेंट लिस्टिंग के लिए पेश किया गया। सीनियर एडवोकेट वी चितंबरेशन ने यह मामला उठाया और कहा कि दूसरी पार्टी को बिना कोई नोटिस दिए एक अंतरिम आदेश के ज़रिए बोर्ड को लगभग बेकार कर दिया गया है। सीनियर वकील ने बताया कि तमिलनाडु वक्फ बोर्ड से जुड़े एक ऐसे ही मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत दी थी।
हाईकोर्ट के आदेश में ऐसा क्या था, जो सुप्रीम कोर्ट पहुंचा बोर्ड
15 जुलाई को एक अंतरिम आदेश में केरल हाई कोर्ट ने राज्य वक्फ बोर्ड को अपनी मंज़ूरी के बिना कोई भी बड़ा फ़ैसला लेने से रोक दिया था। मामले से जुड़े एक सीनियर वकील ने बताया कि कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि बोर्ड कोर्ट की साफ मंजूरी के बिना कोई भी कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत खर्च) न करे और न ही कोई पॉलिसी से जुड़ा फ़ैसला ले।
केरल सरकार को हाईकोर्ट ने ये दिया था निर्देश
- हाई कोर्ट की बेंच ने सरकार को यह भी निर्देश दिया था कि वह ‘यूनाइटेड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट एक्ट’ के प्रावधानों के अनुसार बोर्ड में अपने प्रतिनिधि की नियुक्ति सुनिश्चित करे। हाई कोर्ट ने कहा था कि फिलहाल बोर्ड, वक्फ मामलों को देखने वाले राज्य सरकार के जॉइंट सेक्रेटरी के प्रशासन के तहत काम करेगा।
- हाई कोर्ट के ये निर्देश कई जनहित याचिकाओं (PIL) की सुनवाई के दौरान आए, जिनमें बीजेपी नेता शोन जॉर्ज की याचिका भी शामिल थी। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि बोर्ड का कामकाज ग़ैर-कानूनी है क्योंकि इसमें एक्ट के तहत जरूरी दो गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं थे। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 जुलाई की तारीख़ तय की थी।
बीते साल अप्रैल में लागू हुआ वक्फ संशोधन अधिनियम
- 2025 का वक्फ संशोधन अधिनियम पिछले साल अप्रैल में लागू हुआ था। अन्य प्रावधानों के अलावा, इसने धारा 14(1) के तहत वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों (पदेन सदस्यों को छोड़कर) को शामिल करने की अनिवार्य आवश्यकता लागू की।
- संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस आवश्यकता के कार्यान्वयन पर रोक नहीं लगाई।












