तो इस वजह से फिर भिड़े ईरान-अमेरिका; क्या शांति समझौता सिर्फ दिखावा?

6 जुलाई को ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे 3 जहाजों पर हमला कर दिया। अगले ही दिन अमेरिका ने ईरान में 80 से ज्यादा ठिकानों पर बमबारी कर दी। ट्रम्प बोले- मेरे हिसाब से अब शांति समझौता खत्म हो गया है। ईरान ने भी पलटवार किया है।

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समझौते के बावजूद ईरान ने जहाजों पर हमला क्यों किया और क्या ये दांव महंगा पड़ेगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: ईरान और अमेरिका के शांति समझौते में क्या तय हुआ था? जवाबः करीब 4 महीने की जंग के बाद 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति पजेशकियान ने 14 पॉइंट्स का MoU साइन किया। इस पर अगले 60 दिनों में फाइनल डील होनी थी। समझौते में 3 पॉइंट्स सबसे अहम थे-

1. होर्मुज स्ट्रेट से निर्बाध आवाजाहीः ईरान बिना कोई शुल्क लिए 60 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का इंतजाम करेगा। ईरान और ओमान साथ मिलकर इस मुद्दे पर काम करेंगे। साथ ही 30 दिनों के अंदर स्ट्रेट के मुख्य रास्ते में बिछी माइन्स और दूसरी तकनीकी रुकावटों को हटाया जाएगा।

2. ईरान को 300 बिलियन डॉलर का आर्थिक पैकेज: अमेरिका खाड़ी देशों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निमाण के लिए 300 बिलियन डॉलर, यानी करीब 28 लाख करोड़ का फंड देगा। अगले 60 दिनों की बातचीत में इसका फ्रेमवर्क तय किया जाएगा।

3. परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत: ईरान नए परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। संवर्धित यूरेनियम का क्या करना है, इस पर दोनों देश अगले 60 दिनों में बातचीत करके सहमति पर पहुंचेंगे।

डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ हुए MoU पर G7 समिट के दौरान फ्रांस में साइन किए थे।
डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ हुए MoU पर G7 समिट के दौरान फ्रांस में साइन किए थे।

सवाल-2: समझौते के बावजूद ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे तेल टैंकरों पर हमला क्यों किया? जवाबः ईरान की बेसब्री के पीछे सबसे बड़ी वजह है होर्मुज से कंट्रोल छिन जाने का डर…

  • ईरान ने होर्मुज से आवाजाही के लिए एक रास्ते का मैप जारी किया और कहा कि होर्मुज से गुजरने के लिए सभी जहाजों को इसी रास्ते का इस्तेमाल करना है। यह रूट ईरान तट के करीब से होकर गुजरता है। ईरान चाहता था कि सभी जहाज उसकी बनाई नई होर्मुज ट्रांजिट अथॉरिटी में रजिस्ट्रेशन कराएं, जिससे आगे चलकर फीस वसूली जा सके।
  • समस्या 24 जून को शुरू हुई, जब ओमान ने अपने तट के करीब एक और वैकल्पिक रास्ते की घोषणा कर दी। ईरान का कहना है कि यह रूट शुरु करने से पहले उससे बातचीत नहीं की गई। IRGC ने जहाजों को चेतावनी दी कि सिर्फ उनके बताए रूट से आवाजाही हो।
  • समुद्री ट्रैफिक पर नजर रखने वाली कंपनी Kpler के मुताबिक, पहले जहां रोज 100 से ज्यादा जहाज गुजरते थे, अब उनका ट्रैफिक 30-40 के आस-पास रह गया। जो जहाज गुजर रहे थे, उनमें आधे ईरानी और आधे ओमानी हिस्से से निकल रहे थे।
    • इस खींचतान के बीच ईरान ने 6-7 जुलाई के बीच ओमान तट के पास से गुजरने वाले 3 व्यापारिक जहाजों पर हमला कर दिया। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ के सलाहकार और एक ईरानी अर्थशास्त्री माजिद शेकरी ने सरकारी टेलीविजन पर कहा, ‘या तो हम होर्मुज पर अपना कब्जा बनाए रखेंगे, या हममें से हर एक इसके लिए शहीद हो जाएगा।’

    इसके अलावा एक्सपर्ट 2 और वजहें भी बताते हैं…

    1. अमेरिका की अगुवाई में लेबनान और इजराइल के बीच भी समझौता हुआ। अमेरिका के जॉन्स हॉपकिंस स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज में प्रोफेसर वली नस्र के मुताबिक, ‘ईरान को लग रहा था कि अमेरिका लेबनान में ईरान की स्थिति को कमजोर करने और अपनी ताकत फिर से हासिल करने की कोशिश कर रहा है।’
    2. अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के मुताबिक, फाइनल समझौते की बातचीत में ईरान को मिलने वाला 300 बिलियन डॉलर का फंड लगातार कम हो रहा था।

    प्रो. वली नस्र के मुताबिक, ईरान-अमेरिका का समझौता धीरे-धीरे एक छलावे जैसा लगने लगा था। ईरान को लग रहा था कि होर्मुज पर दूसरा रूट बनाकर और लेबनान-इजराइल में शांति समझौता करवाकर, अमेरिका उस पर दबाव डालना चाह रहा है या युद्ध फिर से शुरू भी कर सकता है। इसलिए उसने जहाजों पर हमले का दांव चला।

    सवाल-3: क्या ईरान ने इस बार जरूरत से ज्यादा जोखिम वाला दांव खेल दिया है? जवाबः 6 जुलाई को होर्मुज से गुजर रहे जहाजों पर ईरान का हमला आक्रामक दांव माना जा रहा है…

    • अमेरिकी थिंकटैंक अटलांटिक काउंसिल के सीनियर फेलो नेट स्वानसन के मुताबिक, ‘जैसे ट्रम्प आक्रामक कार्रवाइयों और धमकियों के जरिए बातचीत करते हैं, ईरान भी वैसा ही करना चाहता है। यह हमले दिखावे के लिए किए गए थे।’
    • अमेरिकी सेना के रिटायर्ड कर्नल जोएल रेबर्न के मुताबिक, ‘ईरान पहले टैंकरों पर हमले कर अमेरिका को उकसा रहा है, फिर खुद को पीड़ित दिखाना चाहता है। यह उसकी पुरानी आदत है। लेकिन इस बार वह अपनी हद पार कर रहे हैं और बड़ा जोखिम उठा रहे हैं।’
    • ब्रिटिश थिंकटैंक चैथम हाउस में मिडिल ईस्ट प्रोग्राम की डायरेक्टर सनम वकील के मुताबिक, ‘ईरान के हमलों का मकसद डर पैदा करना है। इस रणनीति से ईरान का ही नुकसान होगा। वो जिस डाल पर बैठे हैं, उसे ही काट रहे हैं।’

    ट्रम्प ने ईरान को धमकी दी है कि उनके एक हमले के बदले अमेरिका 20 गुना ज्यादा ताकत से हमला करेगा। उन्होंने ईरान की लीडरशिप को नीच और पागल बताया। यह भी कहा कि उनकी नजर में सीजफायर खत्म हो चुका है। अमेरिका ने लगातार 2 दिन तक ईरान पर करीब 170 हमले किए। 3 लोगों की मौत हुई।

    अमेरिका ने पहली बार ईरान के चाबहार पोर्ट पर हमला किया। 2024 में भारत ने यहां के शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल को चलाने के लिए 10 साल का समझौता किया है।
    अमेरिका ने पहली बार ईरान के चाबहार पोर्ट पर हमला किया। 2024 में भारत ने यहां के शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल को चलाने के लिए 10 साल का समझौता किया है।

    सवाल-4: जहाजों पर ईरान के हमले से अमेरिका इतना आक्रामक क्यों हो गया? जवाबः होर्मुज स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, यानी किसी एक देश का इस पर कंट्रोल नहीं है। लेकिन ईरान इस रास्ते पर अपना नियंत्रण बनाना चाहता है। अमेरिका इसके खिलाफ है।

    अमेरिका ने समुद्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की जिम्मेदारी ली है। इसके लिए 1979 में फ्रीडम ऑफ नेविगेशन प्रोग्राम की भी शुरुआत की, जिसके तहत क्रिटिकल चोकपॉइंट्स पर अमेरिका अपने नौसैनिक जहाज भेजकर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करता है।

    होर्मुज स्ट्रेट के अलावा दुनिया में तेल व्यापार के रास्तों पर 7 और चोकपॉइंट्स हैं। यहां से दुनिया के करीब 52% कच्चे तेल का व्यापार होता है। इनमें पनामा कैनाल, स्वेज कैनाल, मलक्का स्ट्रेट जैसे पॉइंट शामिल हैं।

    अगर ईरान होर्मुज में फीस वसूलने लगे, तो बाकी चोकपॉइंट्स पर भी क्षेत्रीय ताकतें ऐसा ही करने लगेंगी। इससे पूरी दुनिया के कारोबार पर असर पड़ेगा। अप्रैल 2026 में इंडोनेशिया के वित्त मंत्री पुरबाया युधि सदेवा मलक्का स्ट्रेट से गुजरने वाले जहजों से टोल लेने का सुझाव भी दे चुके हैं।

सवाल-5: अब शांति समझौते का क्या होगा, क्या ये सिर्फ दिखावा था? जवाबः अमेरिका-ईरान के बीच हुआ शांति समझौता कभी पूरी तरह से शांति के लिए था ही नहीं। सीनियर जर्नलिस्ट और विदेश मामलों के जानकार मार्क चैंपियन के मुताबिक, इस समझौते की भाषा जानबूझकर अस्पष्ट रखी गई, ताकि दोनों ही पक्षों को अपने मकसद पूरे करने के लिए दूसरे तरीकों की गुंजाइश बनी रहे।

शांति समझौते में साफ-साफ शर्तें होती हैं। जैसे- कौन कब क्या करेगा, कोई उल्लंघन कैसे तय होगा, निगरानी कौन करेगा।

अमेरिका-ईरान समझौते में में साफ नहीं था कि हॉर्मुज में ‘मुक्त आवाजाही’ का मतलब क्या है? क्या ईरान वहां टोल वसूल सकता है? गश्त कर सकता है? किन शर्तों पर जंग पूरी तरह खत्म होगी? तेल प्रतिबंधों में छूट कितनी पक्की है?

अमेरिका ने ईरानी तेल पर 60 दिन के लिए प्रतिबंध हटाए थे, लेकिन महज 20 दिन बाद ही अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ये अस्थायी छूट वापस ले ली और अगस्त तक तेल बिक्री की इजाजत देने वाला लाइसेंस रद्द कर दिया।

CSIS के जियोस्ट्रैटजी एक्सपर्ट जॉन बी. अल्टरमैन मानते हैं कि दोनों पक्षों ने जंग की मूल जड़- परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता, प्रतिबंध, होर्मुज पर नियंत्रण वगैहर को सुलझाए बिना सिर्फ हथियार डालने का समय तय किया, इसीलिए यह इतनी जल्दी टूट गया।

सवाल-6: क्या वाकई जंग दोबारा शुरू हो चुकी है, आगे क्या होगा? जवाबः ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे 3 जहाजों पर हमला किया। अगली रात अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान में 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया। IRGC ने भी पलटवार करते हुए बहरीन और कुवैत में 85 अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल दागीं।

कुल मिलाकर आंख के बदले आंख का खेल चल रहा है। हालांकि अभी ये लिमिटेड स्ट्राइक हैं, पूरी तरह जंग में नहीं बदलीं। अब आगे 2 सिनैरियो बन सकते हैं…

1. लिमिटेड स्ट्राइक बढ़ते-बढ़ते पूर्ण यूद्ध में बदल जाएं

  • तुर्किए में हुए NATO शिखर सम्मेलन में 8 जुलाई को ट्रम्प ने खुले तौर पर कहा कि सीजफायर अब खत्म है। कहा- ‘हम ईरान पर कड़ा हमला करेंगे। होर्मुज पर ईरान के लिए नाकाबंदी भी कर सकते हैं।’
  • अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो हम राष्ट्रपति ट्रम्प के आदेश पर ईरान पर ज्यादा मजबूती और गहराई से हमला करेंगे।
  • CSIS में मिडिल-ईस्ट प्रोग्राम की डायरेक्टर मोना याकूबियन मानते हैं कि मौजूदा उठापटक से लगता है कि दोनों ही पक्ष खुले तौर पर तनाव बढ़ाना चाहते हैं। इस बार शुरुआत ईरान ने की, फिर अमेरिका ने जवाब दिया। ट्रम्प के बयानों और IRGC के एक्शन को देखें तो पूर्ण युद्ध को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

2. हमले रुकें और समझौते पर दोबारा बात शुरू हो

  • 9 जुलाई की सुबह को ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान ने बातचीत के लिए संपर्क किया है। उन्होंने कहा, ‘ईरान ने अभी थोड़ी देर पहले फोन किया, वे बहुत बुरी तरह डील करना चाहते हैं। मुझे नहीं पता कि वे डील के लायक हैं भी या नहीं।’
  • खबरें थीं कि 11 जुलाई को अमेरिकी और ईरानी वार्ताकार पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में जुटने वाले हैं और समझौते के अगले चरण पर चर्चा कर सकते हैं।
  • अमेरिकी नेवी के रिटायर्ड अफसर हार्लन उलमैन मानते हैं कि ईरान ने ऐसे हमले अमेरिका को चिढ़ाने के लिए किए हैं। ईरान बातचीत के लिए और ज्यादा समय लेने की कोशिश कर सकता है। चाहे जंग हो या शांति, दोनों ही पक्ष तनाव कम करना चाहेंगे।

हालांकि ईरानी जर्नलिस्ट सैयद मुस्तफा खोशचेश्म मानते हैं कि बातचीत चलने के बावजूद ईरान की तरफ से दुश्मनी और अविश्वास कभी खत्म नहीं हुआ है, यानी बातचीत की मेज पर बैठना अपने आप में भरोसे की गारंटी नहीं।

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