आखिर उम्रकैद के आरोपी पीयूष पर क्यों इतना मेहरबान है जेल प्रशासन

कानपुर। शहर के चर्चित ज्योति हत्याकांड को लेकर आरोपित पति पीयूष श्यामदासानी पर आखिर जेल प्रशासन इतना मेहरबान क्यों हैं। ज्योति के पिता शंकर नागदेव ने आरोप लगाते हुए कहा कि उम्रकैद की सजा होने के बावजूद जेल प्रशासन ने उसे सेंट्रल जेल नहीं भेजा है। जबकि अन्य तीन अभियुक्तों पीयूष, रेनू उर्फ अखिलेश और सोनू को पूर्व में ही सेंट्रल जेल भेजा जा चुका है। उनका कहना है कि इस संबंध में कई बार आलाधिकारियों से शिकायत कर पत्राचार भी किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

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पांडुनगर निवासी बिस्किट कारोबारी पीयूष श्यामदासानी 27 जुलाई 2014 को पत्नी ज्योति उर्फ पूजा के साथ पार्वती बागला रोड स्थित वरांडा रेस्टाेरेंट ले गया था। जहां रात 11:30 बजे उसने पुलिस को सूचना दी कि कुछ लोगों ने उसे मारपीट कर गाड़ी से फेंकने के बाद ज्योति का अपहरण कर लिया है।

देर रात पुलिस ने कल्याणपुर पनकी रोड से कार में ज्योति का शव बरामद किया था जिसकी चाकुओं से गोदकर हत्या की गई थी। पुलिस ने इस मामले में पीयूष श्यामदासानी, पान मसाला कारोबारी की बेटी मनीषा मखीजा, चालक अवधेश, रेनू उर्फ अखिलेश, सोनू और आशीष कश्यप को गिरफ्तार किया था।

कानपुर के सत्र न्यायालय ने इस मामले में 20 अक्तूबर 2022 पीयूष समेत अन्य अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामले में चालक अवधेश, रेनू उर्फ अखिलेश, सोनू और आशीष कश्यप को सेंट्रल जेल भेजा जा चुका है।

ज्योति के पिता शंकर नागदेव का आरोप है कि पीयूष श्यामदासानी पर जेल प्रशासन मेहरबान है सात साल से ज्यादा की सजा होने के बावजूद अब तक उसे सेंट्रल जेल नहीं भेजा गया है।

जेल अधीक्षक राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि सात साल से ज्यादा की सजा में कैदी को सेट्रल जोन भेजा जाता है लेकिन जब कोई केस लंबित होता है तो ऐसी स्थिति में कैदी को नहीं भेजा जाता है।

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