संभल। संभल हिंसा की रिपोर्ट विधानसभा में पेश करने करने का फैसला कैबिनेट में मंजूर किया गया है। इस हिंसा की जांच तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग ने की। संभल में यह आयोग एक दिसंबर 2024, 21 जनवरी 2025, 30 जनवरी 2025 और 28 फरवरी 2025 को पहुंचा।
स्थलीय निरीक्षण और बयान दर्ज करने के बाद 450 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की और फिर 28 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई। जिसे अब विधानसभा में पेश करने की तैयारी चल रही है।
मंगलवार को शहर में इस प्रकरण की चर्चा भी सुनने को मिली। क्योंकि एक दिन पहले जामा मस्जिद व हरिहर मंदिर का दावा करने वाले पक्ष के बीच वार्ता हुई थी। जिसमें दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े रहने की वजह से वार्ता नतीजा रही। मीडिया ने भी इस वार्ता को प्रमुखता से उठा प्रकाशित किया।
24 नवंबर 2024 को हुई थी संभल हिंसा
24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद सर्वे के विरोध में हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। वहीं, 30 पुलिस अधिकारी व कर्मचारी घायल हुए थे। इस प्रकरण में 12 मुकदमे दर्ज हुए थे, जिसमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क व विधायक पुत्र सुहैल इकबाल सहित 37 लाेगों को नामजद करते हुए 3750 के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। हालांकि सुहैल इकबाल को जांच में क्लीनचीट दे दी गई थी।
अब तक 124 उपद्रवी भेजे जा चुके हैं जेल
अब तक 124 उपद्रवियों को जेल भेजा जा चुका है। जबकि हिंसा का मास्टरमाइंड शारिक साठा अभी तक पुलिस की पकड़ से दूर है। उसके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी हो चुका है। उसकी चल-असल संपत्तियां भी कुर्क हो चुकी हैं। उसके ही इशारे पर ही मुल्ला आफरोज व गुलाम ने साथियों की मदद से हिंसा की। गिरफ्तार आरोपित अपना गुनाह कबूल कर चुके हैं। उसके खिलाफ दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में लगभग 69 मामले दर्ज हैं। हिंसा के बाद 28 नवंबर 2024 को तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था।
हिंसा के बाद चार बार गठित न्यायिक आयोग के सदस्यों ने लिया संभल शहर का जायजा
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोरा, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एवं पूर्व पुलिस महानिदेशक अरविंद कुमार जैन, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद शामिल हैं। इनके द्वारा चार बार शहर का जायजा लेते हुए हिंसा की पूरी दास्तां को अपनी रिपोर्ट में शामिल किया।
वास्तविक स्थिति को रिपोर्ट में शामिल किया गया है
रिपोर्ट में पुराने दंगों का जिक्र भी शामिल होने की बात सामने आई हैं। क्योंकि न्यायिक आयोग के सामने पुराने दंगों के पीड़ितों ने भी अपने बयान दर्ज कराए थे। बाकी हिंसा की शुरूआत कहां से हुई? उपद्रवी कहां-कहां पर थे और कहां से गोलियां चलीं और पथराव हुआ। महिलाएं कौन से घर पर थीं, जो पत्थर बरसा रही थीं। जामा मस्जिद का भी निरीक्षण करते हुए वास्तविक स्थिति को रिपोर्ट में शामिल किया गया है।
कब-कब आया न्यायिक आयोग
1 दिसंबर 2024 : जांच आयोग पहली बार संभल पहुंचा। इस दौरान आयोग ने हिंसा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया और जामा मस्जिद का भी भ्रमण किया। मौके पर मौजूद लोगों और अधिकारियों से प्रारंभिक बातचीत कर आयोग ने बुनियादी जानकारी जुटाई थी।
21 जनवरी 2025 : आयोग दूसरी बार संभल आया। इस दौरे में आयोग ने लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में स्थानीय लोगों व पुलिस अधिकारियों समेत 36 लोगों के बयान दर्ज किए थे। साथ ही मस्जिद परिसर व आसपास का पुनः अवलोकन भी किया था।
30 जनवरी 2025 : तीसरे चरण में आयोग संभल पहुंचा। इस बार आयोग ने गेस्ट हाउस में हिंसा में मारे गए लोगों के स्वजन और हिंसा के दौरान मौजूद गवाहों समेत 15 लोगों के बयान दर्ज किए, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने भी बयान दर्ज कराए थे। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। आयोग ने लिखित दस्तावेज व साक्ष्य एकत्र किए और उन्हें जांच अभिलेख में शामिल किया था।
28 फरवरी 2025 : आयोग चौथी बार संभल आया। गेस्ट हाउस में पक्षकारों, गवाहों और अधिकारियों से लंबी पूछताछ की। 29 लोगों के साथ ही जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण बिश्नोई के भी बयान दर्ज हुए थे। साथ ही हिंसा प्रभावित क्षेत्र की मौजूदा स्थिति जानी और अब तक मिले साक्ष्यों का मिलान कर रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में काम तेज किया।
न्यायिक आयोग द्वारा तैयार हुई हिंसा की रिपोर्ट विधानसभा में पेश होने का सीधा आशय है कि इस प्रकरण पर सभी विधानसभा सदस्यों के बीच चर्चा हो सके। हिंसा में सरकारी मशीनरी का क्या रोल रहा। किसी की लापरवाही तो नहीं रहेगी थी। इन्हीं सब बिंदुओं पर चर्चा होगी। अगर, अधिकारियों की चूक रही होगी तो वहां पर ही कार्रवाई तय की जाएगी। बाकी इस रिपोर्ट का न्यायालय में विचाराधीन कानूनी मामले का कोई तालुक नहीं है।
विष्णु शर्मा, शासकीय अधिवक्ता, चंदौसी
हिंसा के मास्टर माइंड को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार प्रयासरत है। शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी लोगों से अपील की जाती रहती है। अब संभल शहर का माहौल पूरी तरह से सही है। लोग अपने-अपने कार्यों में लगे रहते हैं। हालांकि मस्जिद पर पुलिस व आरआरएफ तैनात है।
केके बिश्नोई, एसपी, संभल।











