संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने सोमवार को चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगें स्वीकार करने में विफल रहती है तो 26 नवंबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह चेतावनी केंद्र सरकार की किसान-विरोधी और मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ केंद्रीय मजदूर संघों (ट्रेड यूनियन) के साथ मिलकर देशभर में आयोजित जेल भरो आंदोलन के दौरान दी गई। एसकेएम ने दावा किया कि इस आंदोलन में किसानों, कृषि और औद्योगिक मजदूरों, आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं, छात्रों, युवाओं और महिलाओं की व्यापक भागीदारी देखी गई।
कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने बेरिकेड तोड़े, सुरक्षाकर्मियों का सामना किया और गिरफ्तार होने से पहले सरकारी कार्यालयों के बाहर धरना दिया। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम ए बेबी ने इस आंदोलन को ऐतिहासिक सफलता बताते हुए कहा कि इस संयुक्त कार्रवाई ने मोदी सरकार की मजदूर-विरोधी और किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया है। यह विरोध प्रदर्शन भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया था।










