बॉलीवुड में कुछ अभिनेत्रियां ऐसी रही हैं, जिन्होंने बहुत कम समय में अपनी खूबसूरती और अदाकारी से दर्शकों के दिल में खास जगह बना ली। लीना चंदावरकर भी उन्हीं नामों में शामिल हैं। 60 के दशक के आखिर और 70 के दशक में उनकी खूबसूरती और सादगी का जादू ऐसा चला कि वह उस दौर की चर्चित अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगीं।
उन्होंने राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, जीतेंद्र, संजीव कुमार, विनोद खन्ना, दिलीप कुमार और सुनील दत्त जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया लेकिन उनकी जिंदगी की कहानी सिर्फ फिल्मों की चमक-दमक तक सीमित नहीं रही। निजी जिंदगी में उन्हें ऐसे उतार-चढ़ाव देखने पड़े, जिन्हें किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं कहा जा सकता।
पहली फिल्म ‘मन का मीत’ थी
लीना चंदावरकर का जन्म 29 अगस्त 1950 को कर्नाटक के धारवाड़ में हुआ था। उनका परिवार कोंकणी पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखता था और उनके पिता सेना में अधिकारी थे। उन्हें फिल्मों और ग्लैमर की दुनिया में आने की चाह नहीं थी लेकिन किस्मत उन्हें धीरे-धीरे कैमरे के सामने ले आई। फिल्मी दुनिया में कदम रखने से पहले लीना ने विज्ञापनों में काम किया। इसके बाद उन्होंने देशभर में आयोजित फिल्मफेयर फ्रेश फेस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और उपविजेताओं में शामिल हुईं।
यहीं से उनके लिए बॉलीवुड के दरवाजे खुलने लगे। उनकी पहली फिल्म ‘मन का मीत’ थी, जो 1968 में रिलीज हुई। इस फिल्म का निर्देशन सुनील दत्त ने किया था और इसमें लीना के साथ सोम दत्त नजर आए थे। फिल्म को अच्छी सफलता मिली और लीना को रातोंरात पहचान मिल गई। इसके बाद उनके पास फिल्मों की लाइन लगने लगी।
70 के दशक में हर बड़े सितारे के साथ नजर आईं
70 का दशक उनके करियर का सबसे खास दौर रहा। वह एक के बाद एक बड़े सितारों के साथ पर्दे पर नजर आईं। ‘महबूब की मेहंदी’ में उन्होंने राजेश खन्ना के साथ काम किया और इस फिल्म में उनकी अदाकारी को काफी पसंद किया गया। उस समय राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में थे और उनके साथ काम करना किसी भी अभिनेत्री के करियर के लिए बड़ी बात थी।
लीना ने धर्मेंद्र के साथ ‘रखवाला’ और ‘एक महल हो सपनों का’, जीतेंद्र के साथ ‘हमजोली’, ‘बिदाई’ और ‘नालायक’, विनोद खन्ना के साथ ‘कायद’ और जालिमट, संजीव कुमार के साथ ‘मनचली’ और ‘अनहोनी’ जैसी फिल्मों में काम किया। वहीं, दिलीप कुमार के साथ ‘बैराग’ जैसी फिल्म में नजर आईं। उस दौर का शायद ही कोई बड़ा हीरो रहा हो, जिसके साथ लीना ने काम न किया हो।
निजी जिंदगी ने अचानक करवट ली
वहीं, पर्दे पर सफलता के बीच उनकी निजी जिंदगी ने अचानक करवट ली। लीना की पहली शादी गोवा के एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले सिद्धार्थ बांदोडकर से हुई थी। सिद्धार्थ गोवा के पहले मुख्यमंत्री दयानंद बांदोडकर के बेटे थे। शादी के कुछ ही दिनों बाद एक दुर्घटना में गोली लगने से सिद्धार्थ की मौत हो गई। उस समय लीना की उम्र महज 25 साल थी। इतनी कम उम्र में पति को खोना उनके लिए बेहद बड़ा सदमा था।
कुछ साल बाद उनकी जिंदगी में मशहूर गायक और अभिनेता किशोर कुमार आए और दोनों ने शादी कर ली। यह रिश्ता भी उस समय काफी चर्चा में रहा। किशोर कुमार पहले तीन शादियां कर चुके थे और वह लीना से उम्र में काफी बड़े थे। यही वजह थी कि शुरुआत में लीना के पिता इस शादी के पक्ष में नहीं थे लेकिन बाद में दोनों ने शादी कर ली। दोनों का एक बेटा सुमित कुमार हुआ।
किशोर कुमार की मौत से लगा दूसरा सदमा
हालांकि किस्मत ने लीना को एक बार फिर गहरा सदमा दिया। 1987 में किशोर कुमार का निधन हो गया। उस समय लीना की उम्र महज 37 साल थी। किशोर कुमार से शादी के बाद लीना ने फिल्मों से दूरी बना ली थी। हालांकि वह पूरी तरह पर्दे से दूर नहीं रहीं और बाद में कुछ फिल्मों में नजर आईं। ‘सरफरोश’ में 1985 में उन्होंने काम किया और 1989 में आई ‘ममता की छांव में’ को उनकी आखिरी फिल्म माना जाता है, जिसमें वह राजेश खन्ना के साथ नजर आईं।
फिल्मों से दूर होने के बावजूद लीना चंदावरकर का जुड़ाव मनोरंजन की दुनिया से पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। उन्होंने बाद के वर्षों में टीवी के रियलिटी शो में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। 2007 में वह ‘के फॉर किशोर’ नामक म्यूजिक रियलिटी शो के शुरुआती एपिसोड में गेस्ट जज के तौर पर नजर आईं। कुछ साल पहले वह टीवी पर कपिल शर्मा के कॉमेडी शो में भी नजर आई थीं।












