सहारनपुर के एक थाने में ढाई महीने की गर्भवती महिला के साथ गैंगरेप करने के मामले में कोर्ट ने रिटायर्ड डिप्टी एसपी (CO) और इंस्पेक्टर को 20-20 साल की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों को जेल भेज दिया। इस दौरान वे गमछे और तौलिए से अपना चेहरा छिपाते नजर आए।
मामला वर्ष 2015 का है। महिला के पति को पुलिस ने एक मामले में जेल भेज दिया था। महिला का आरोप था कि उसके पति को झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। वह पति के बारे में जानकारी लेने और मदद मांगने थाने पहुंची थी। इसी दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष ब्रजमोहन यादव और इंस्पेक्टर वेगपाल सिंह ने उसके साथ गैंगरेप किया।
बाद में ब्रजमोहन यादव प्रमोशन पाकर डिप्टी एसपी बने और इसी पद से रिटायर हुए। करीब 11 साल 3 महीने तक चली कानूनी लड़ाई के बाद महिला को अब इंसाफ मिला है।
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वकील बोले- जांच एजेंसियों ने क्लीन चिट दे दी थी
एडवोकेट राजीव तोमर ने बताया कि 6 अगस्त 2015 को देवबंद निवासी महिला के साथ थाने के सरकारी क्वार्टर में तत्कालीन एसएचओ ब्रजमोहन यादव, एसआई वेगपाल सिंह, दरोगा पंकज धामा और एक सिपाही ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। घटना के बाद पीड़िता की कहीं सुनवाई नहीं हुई और उसकी FIR तक दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ और जांच CBCID को सौंपी गई। हालांकि, जांच एजेंसी ने आरोपियों को क्लीन चिट देते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी।
राजीव तोमर के मुताबिक, इसके खिलाफ प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की गई। इसके बाद अदालत ने आरोपियों को दोबारा तलब किया। मुकदमे की सुनवाई पहले CJM कोर्ट और फिर फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई।
अदालत ने 5 नवंबर को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। शुक्रवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद धारा 376D में दोनों को 20-20 साल की कैद और एक-एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। वहीं, IPC की धारा 506 में 5 साल की कैद और 20 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया।
एडवोकेट ने बताया कि पीड़िता के बयान और उसकी ननद की गवाही को अदालत ने अहम माना। ननद घटना की चश्मदीद गवाह थी।
पीड़िता बोली- पति की जानकारी लेने थाने गई थी, वहां पुलिसकर्मियों ने गैंगरेप किया
पीड़िता ने बताया कि वह देवबंद की रहने वाली है। 6 अगस्त 2015 को पुलिसकर्मियों ने उसके पति को झूठे मुकदमे में उठा लिया था। उनके बारे में जानकारी लेने और मदद मांगने के लिए वह अपनी ननद के साथ थाने पहुंची थी। वहां एक सिपाही ने कहा कि चौकी इंचार्ज बुला रहे हैं। इसके बाद पंकज धामा उसे और उसकी ननद को थाने ले गए।
पीड़िता के मुताबिक, थाने के पीछे कोतवाल के कमरे में ब्रजमोहन यादव, पंकज धामा, एक लेखपाल और एक सिपाही ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि न्याय की लड़ाई के दौरान उस पर हमले किए गए और उसके पति के खिलाफ भी फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए। उसने इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की, ताकि उसे पूरा न्याय मिल सके।
चौकी प्रभारी खुद को मानसिक बीमार बताया
मामले में चौकी प्रभारी पंकज धामा ने कोर्ट में खुद को मानसिक रूप से बीमार बताया था। इस संबंध में कई दावे पेश किए थे। इसलिए उसके खिलाफ मामला नहीं चल सका। वहीं, सिपाही की पहचान और तलाश नहीं हो पाने के कारण उसके खिलाफ भी सुनवाई नहीं हुई।

पहले भी जेल जा चुके थे दोनों दोषी
दोनों रिटायर्ड पुलिसकर्मी इस मामले में पहले भी जेल जा चुके हैं। बाद में उन्हें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी। अब अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को दोबारा जेल भेज दिया गया है।
पीड़िता के अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि न्याय के लिए संघर्ष के दौरान महिला और उसके पति पर लगातार दबाव बनाया गया। उनके साथ मारपीट करने और दुर्घटना कराने की कोशिश के भी आरोप लगाए गए। पीड़िता और उसके पति के खिलाफ देवबंद थाने में कुछ मुकदमे भी दर्ज हैं, जो अभी विचाराधीन हैं।













