नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट आज से नॉटिंघम में शुरू हो रहा है। इसी के साथ दूसरी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) की भी शुरुआत हो रही है। इस बार की वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में कई तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे।
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप क्या है? इस बार कितनी टीमें इसमें हिस्सा ले रही हैं? भारत को किन-किन टीमों के खिलाफ खेलना है? पॉइंट सिस्टम में क्या बदलाव हुए हैं? एक टीम को कितनी सीरीज खेलनी होगी? आइए जानते हैं…
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप क्या है?
ये चैंपियनशिप टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले 9 देशों के बीच खेली जाती है। दो साल चलने वाले टूर्नामेंट के बाद दो टीमें फाइनल में पहुंचेंगी। फाइनल जीतने वाली टीम टेस्ट चैंपियनशिप की नई चैंपियन होगी। 2019 से 2021 के बीच हुई वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया था। इसमें न्यूजीलैंड विजेता बना था।
चैंपियनशिप के नए एडीशन का फॉर्मेट WTC के पहले एडीशन की तरह ही है। हालांकि, इस बार पॉइंट सिस्टम में बदलाव किया गया है। पिछली बार की तरह ही इस बार भी हर टीम तीन सीरीज घर में खेलेगी जबकि तीन सीरीज विदेश में। इनमें मिलने वाले पॉइंट के आधार पर दो टीमें फाइनल में पहुंचेंगी। फाइनल कब और कहां खेला जाएगा, ये अभी तय नहीं है।
इस बार कितनी टीमें इसमें हिस्सा ले रही हैं?
पहली बार की तरह इस बार भी टेस्ट खेलने वाले 12 देशों में से 9 देश ही इस सीरीज का हिस्सा होंगे। मौजूदा चैंपियन न्यूजीलैंड, उप-विजेता भारत, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज, बांग्लादेश और श्रीलंका इसका हिस्सा होंगी। जिम्बाब्वे, अफगानिस्तान और आयरलैंड को भी ICC ने टेस्ट नेशन का दर्जा दिया है, लेकिन ये टीमें इस टूर्नामेंट का हिस्सा इस बार भी नहीं होंगी।
पॉइंट सिस्टम में क्या बदलाव हुआ है?
दूसरी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में पॉइंट सिस्टम पहली वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप से बिलकुल अलग होगा। नया पॉइंट सिस्टम समझने से पहले पुराना सिस्टम समझिए, उसके बाद इसमें हुए बदलावों को बताते हैं। पुराने सिस्टम में हर सीरीज के लिए 120 पॉइंट मिलते थे।
यानी, अगर दो टेस्ट मैचों की सीरीज है तो हर टेस्ट जीतने पर 60 पॉइंट, तीन टेस्ट की सीरीज है तो हर टेस्ट जीतने पर 40 पॉइंट, चार टेस्ट मैचों की सीरीज है तो हर टेस्ट जीतने पर 30 पॉइंट और पांच टेस्ट मैचों की सीरीज है तो हर टेस्ट जीतने पर 24 पॉइंट दिए जाते थे। चूंकि हर टीम को बराबर सीरीज खेलनी थी तो इससे सबसे ज्यादा पॉइंट वाली दो टीमें फाइनल खेलतीं।
पर ऐसे हुआ नहीं। कोरोना की वजह से कई सीरीज कैंसिल हो गईं। इसके बाद ICC को पॉइंट सिस्टम में बड़ा बदलाव करना पड़ा। और पर्सेंटेज पॉइंट सिस्टम के आधार पर दो टीमें तय हुईं। अपनी सभी छह सीरीज खेलने वाला भारत और पांच सीरीज खेलने वाली न्यूजीलैंड की टीम फाइनल में पहुंची।
अब बात नए पॉइंट सिस्टम की: 2021-23 की चैंपियनशिप में भी पर्सेंटेज पॉइंट्स से टीमों की रैंकिंग तय की जाएगी। हालांकि हर टेस्ट के लिए एक जैसे पॉइंट मिलेंगे। भले ही सीरीज कितने भी टेस्ट की हो। हर टेस्ट जीतने वाली टीम को 12 पॉइंट दिए जाएंगे। मैच ड्रॉ होता है तो दोनों टीमों को 4-4 पॉइंट मिलेंगे। मैच टाई होने पर दोनों टीमों को 6-6 पॉइंट मिलेंगे।
यानी, अगर सीरीज 5 टेस्ट की है तो टोटल 60 पॉइंट अवेलबल होंगे वहीं, दो टेस्ट की सीरीज में अधिकतम 24 पॉइंट मिल सकेंगे। इस लिहाज से भारत-इंग्लैंड की मौजूदा सीरीज में कुल 60 पॉइंट अवेलबल हैं।
ऐसे में तो ज्यादा टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने वाले को ज्यादा फायदा होगा?
नहीं, ऐसा नहीं है, क्योंकि टीमों की रैंकिंग उनके टोटल पॉइंट्स के आधार पर नहीं होगी। रैंकिंग के लिए पर्सेंटेज पॉइंट का इस्तेमाल होगा। इसे भारत-इंग्लैंड सीरीज के आधार पर समझिए।
ये सीरीज 5 टेस्ट की है। यानी, अधिकतम 60 पॉइंट अवेलबल हैं। अगर भारत 5-0 से सीरीज जीतता है तो उसके पास पर्सेंटेज पॉइंट 100% होंगे। अगर भारत सीरीज 4-1 से जीतता है तो उसके पास पर्सेंटेज पॉइंट 80% होंगे। वहीं, इंग्लैंड के पास 20% होंगे।
अब अगर सीरीज में दो मैच ड्रॉ हो जाते हैं और नतीजा 2-1 से भारत के पक्ष में रहता है, तो भारत के पर्सेंटेज पॉइंट 53% होंगे। वहीं इंग्लैंड के पर्सेंटेज पॉइंट 33% होंगे।
यानी, टीम जितने भी मैच खेले, उसका पर्सेंटेज पॉइंट कभी 100% से ज्यादा नहीं होगा। सभी टीमों के 6-6 सीरीज खेलने के बाद जिन दो टीमों का पर्सेंटेज पॉइंट सबसे ज्यादा होगा वही, दोनों फाइनल खेलेंगी। अगर कोई सीरीज या मैच कैंसिल होता है तो इस सिस्टम की वजह से किसी टीम की रैंकिंग को नुकसान नहीं होगा।
भारत किन टीमों के खिलाफ और कहां खेलेगा?
पिछली बार की ही तरह हर टीम को पूरे WTC के दौरान 6-6 सीरीज खेलनी है। इनमें से तीन सीरीज अपने देश में और तीन सीरीज विरोधी टीम के देश में खेलनी होगी। टूर्नामेंट में कुल 9 टीमें हैं, इस लिहाज से पूरे WTC के दौरान 27 सीरीज होंगी। हालांकि इनमें से कौन सी सीरीज कितने मैच की होगी, ये अभी तय नहीं है।
भारत की बात करें तो वो अपनी पहली सीरीज इंग्लैंड के खिलाफ इंग्लैंड में खेल रहा है। इसके बाद उसे बांग्लादेश और साउथ अफ्रीका खिलाफ भी उनके घर में जाकर खेलना होगा। इन तीन सीरीज के अलावा टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और न्यूजीलैंड से घर में खेलना है।










