लखनऊ। मऊ से विधायक माफिया मुख्तार अंसारी का बहुजन समाज पार्टी से टिकट कटने के बाद अब गाजीपुर से बहुजन समाज पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी और मुख्तार अंसारी के करीबी जेल में बंद घोसी से सांसद अतुल राय को भी अब बसपा में खतरा है। माना जा रहा है कि पार्टी से बाहर होने से पहले अंसारी परिवार के साथ ही अतुल राय भी समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकता है।
अंसारी परिवार में सबसे बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी के समाजवादी पार्टी का दामन थामने के बाद अब बसपा से टिकट न मिलने के बाद बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी और गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी भी अपने भाई के साथ हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्तार अंसारी और उनका परिवार भी समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकता है।
यह कोई पहली बार नहीं होगा, जब मुख्तार अंसारी को बहुजन समाज पार्टी से टिकट नहीं दिया गया है। जरायम के बाद खादी का दामन थामने वाले मुख्तार अंसारी ने 1996 में हाथी की सवारी की थी और वह पहली बार विधानसभा पहुंचा था। मुख्तार को इसके कुछ दिन बाद ही बसपा मुखिया मायावती ने पार्टी से बाहर रास्ता दिखा दिया था।
मऊ के अंसारी बंधुओं में सबसे बड़े सिबगतुल्लाह अंसारी के चंद राजे पहले ही अखिलेश यादव की मौजूदगी में बेटे के साथ समाजवादी पार्टी (एसपी) में शामिल होने के बाद उनके विधायक भाई मुख्तार अंसारी का भी नया ठिकाना समाजवादी पार्टी हो सकता है।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने पिछले दिनों सिबगतुल्लाह अंसारी के बसपा छोड़ समाजवादी पार्टी में जाने के बाद से ही बांदा जेल में बंद आपराधिक छवि के मुख्तार अंसार से किनारा करने का संकेत दे दिया था। मुख्तार अंसारी के साथ ही अब बसपा से सांसद उनके भाई अफजाल अंसारी की भी छुट्टी तय मानी जा रही है।
बसपा विधायक मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी के साथ उनके बेटे मन्नू अंसारी ने सपा का दामन थाम लिया है। गाजीपुर जिले की मुहम्मदाबाद विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे चुके मुख्तार के बड़े भाई सिबगतुल्लाह को लखनऊ में सपा मुख्यालय पर अखिलेश यादव ने सदस्यता दिलाई थी।
अंसारी परिवार पहले भी सपा का हिस्सा रह चुका है। सिबगतुल्लाह अंसारी को 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की अलका राय से हार का सामना करना पड़ा था। अब एक बार फिर उनके सपा में आने पर गाजीपुर की सियासत दिलचस्प होने जा रही है।
रद हो सकती है मुख्तार अंसारी की विधानसभा सदस्यता
बसपा से टिकट कटने के बाद मुख्तार अंसारी की विधानसभा सदस्यता रद करने की मांग भी तेज हुई है। माफिया विरोधी मंच ने पिछले दिनों विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित से मुख्तार की सदस्यता रद करने की मांग की थी। मंच के अध्यक्ष सुधीर सिंह की ओर से विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए पत्र में बताया गया था कि मुख्तार अंसारी वर्ष 2005 से विभिन्न संगीन आरोपों में जेल में निरुद्ध है।
ऐसे में मुख्तार का विधानसभा से वेतन व भत्ता लिया जाना असंवैधानिक है। मुख्तार ने 16 वर्षों में विधानसभा सदस्य के रूप में वेतन व अन्य भत्तों का 6.24 करोड़ रुपये का भुगतान लिया है, जिसकी ब्याज समेत वसूली की जानी चाहिए।
विधायक मुख्तार अंसारी को जबरन वसूली के मामले में जनवरी 2019 से पंजाब की रूपनगर जेल में रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उसे प्रदेश के बांदा जेल वापस लाया गया था। मुख्तार के खिलाफ उत्तर प्रदेश में दर्ज कई आपराधिक मामलों की सुनवाई चल रही है।
वह अक्टूबर 2005 से जेल में है, लेकिन अदालत की अनुमति से वह विधायी कार्यवाही में भाग लेता रहा। इतना ही नहीं अंसारी ने जेल में रहते हुए 2007, 2012 और 2017 में चुनाव भी जीते हैं। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने सत्ता में आने के बाद जेल में बंद विधायकों के विधायी कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति देने के कदम का कड़ा विरोध किया था।













