हाईकोर्ट की 4 बड़ी खबरें: हाईकोर्ट ने पूछा- बार काउंसिल बताएं, फर्जी वकीलों का पता लगाने की क्या है प्रक्रिया

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में वकालत कर रहे फर्जी वकीलों के सत्यापन को लेकर उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से पूछा है कि वह बताएं कि इसका पता लगाने की कौन सी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। यह आदेश जस्टिस मनोज मिश्र व जस्टिस जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने शक्ति प्रताप सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में कहा गया है कि विपक्षी संख्या तीन की वकालत की डिग्री फर्जी है।

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बार काउंसिल में शिकायत भी की गई है। परन्तु कोई कार्रवाई नहीं हुई । याचिका दाखिल कर इस सम्बन्ध में पारित सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया गया है कि जिसमें प्रदेश बार काउंसिल को ऐसे मामलों का पता लगाकर कार्रवाई करने का निर्देश है।

हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 25 अक्टूबर की तिथि तय की है और उस तिथि पर यूपी बार काउंसिल को ऐसे फर्जी वकीलों की शिकायतों का पता लगाने को लेकर बार काउंसिल द्वारा अपनाई जा रही है प्रकिया से कोर्ट को अवगत कराने का निर्देश दिया है।

पढ़ें 3 बड़ी खबरें

1- वरिष्ठ टीचर का निलंबन वापस ले पदभार सौंपने के निरीक्षक के आदेश पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक प्रयागराज के उन आदेशों पर रोक लगा दी है जिनके तहत निरीक्षक ने सच्चा आध्यात्म संस्कृत महाविद्यालय नैनी की प्रबंध समिति को विपक्षी कृपा शंकर मिश्र का निलंबन समाप्त कर कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से याचिका पर 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। याचिका की अगली सुनवाई 29 नवंबर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने कार्यवाहक प्रधानाचार्य श्रीकांत त्रिपाठी की याचिका पर दिया है।

याची कहना है कि डी आई ओ एस को प्रबंध समिति द्वारा अध्यापक के निलंबन आदेश को समाप्त करने का अधिकार नहीं है। प्रबंध समिति ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के स्टैच्यूट 17.4 व17.5 के अंतर्गत विपक्षी कृपाशंकर मिश्र को अनियमितता बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया और याची को कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त कर दिया। जिसके खिलाफ विपक्षी की शिकायत पर डी आईओएस ने प्रबंध समिति से निलंबन के पत्राजात मगाये और निलंबन वापस ले लिया तथा विपक्षी को वरिष्ठ अध्यापक होने के नाते कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त करने का निर्देश दिया था।

याची का कहना है कि यह आदेश मनमाना पूर्ण व अवैध है। उसे सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। इससे पहले याची को कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त किया गया था और उसके हस्ताक्षर को डी आई ओ एस ने अनुमोदित भी कर दिया था।

2-हाईकोर्ट चन्द्रशेखर आजाद पार्क से अतिक्रमण हटाने के प्रशासन की रिपोर्ट से नाखुश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज स्थित चंद्र शेखर आजाद पार्क में 1975 के बाद के अवैध निर्माण हटाने की सरकार की रिपोर्ट को संतोषजनक नहीं माना।याची ने भी कहा अभी भी बहुत से अवैध निर्माण पार्क के अंदर मौजूद हैं।

इसपर कोर्ट ने राज्य सरकार से इलाहाबाद लेडीज क्लब बनाम जितेंद्र नाथ सिंह केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पालन पर हलफनामा मांगा है और पूछा है कि क्या 1975 के बाद के पार्क के भीतर के सभी अवैध निर्माण हटाये जा चुके हैं। कोर्ट ने अनुपालन रिपोर्ट की प्रति याची को आपत्ति देने के लिए सौंपने का भी निर्देश दिया है।याचिका की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी।

यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एम एन भंडारी तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने जितेन्द्र सिंह बिसेन की जनहित याचिका पर दिया है।याची का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के अरुण कुमार केस में पार्क से अतिक्रमण हटाने के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। जिस पर कोर्ट ने पार्क अधीक्षक,जिला प्रशासन,पी डी ए वी नगर निगम प्रयागराज से जानकारी मांगी थी कि पार्क कानून बनने की तिथि से पहले पार्क में कितने निर्माण थे।और उसके बाद कितने निर्माण कार्य किये गए हैं।

रिकार्ड के अभाव में कोई विभाग इसकी जानकारी नहीं दे सका।तो कोर्ट ने कमिश्नर सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को तलब किया।जिसके बाद कुछ निर्माण हटाये गये और कहा गया कि सारे अवैध निर्माण हटा दिये गये है। याची ने इस पर आपत्ति की और कहा कि सभी अवैध निर्माण नहीं हटाये गये है। अब कोर्ट ने हलफनामा मांगा है कि क्या वास्तव में सभी अवैध निर्माण हटा दिये गये हैं।

3-प्रदेश में तैनात कई जिला जजों व ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारियों का स्थानांतरण

हाईकोर्ट प्रशासन ने प्रदेश के कई जिला जजों और लैंड एक्वीजेशन, मोटर एक्सीडेंट क्लेम, कॉमर्शियल टैक्स ट्रिब्युनल व कामर्शियल कोर्ट के पीठासीन अधिकारियों का स्थानांतरण किया है। रजिस्ट्रार जनरल आशीष गर्ग की अधिसूचना के अनुसार स्थानांतरित जिला जजों में मथुरा के जिला जज विवेक संगल को मेरठ, सोनभद्र के जनपद न्यायाधीश रजत सिंह जैन को मथुरा, फर्रुखाबाद के जिला जज चवन प्रकाश को मुजफ्फरनगर, गोरखपुर के जिला जज तेजप्रताप तिवारी को शाहजहांपुर, गोंडा के जनपद न्यायाधीश मयंक कुमार जैन को कानपुर नगर और लखीमपुर खीरी के जिला जज मुकेश मिश्र को गोरखपुर भेजा गया है।

इसी प्रकार लैंड एक्वीजेशन रिहैबिलिटेशन ट्रिब्युनल बस्ती के पीठासीन अधिकारी गिरीश कुमार वैश को सोनभद्र का जिला जज, गौतमबुद्ध नगर की इसी ट्रिब्युनल के पीठासीन अधिकारी शिवशंकर प्रसाद को फर्रुखाबाद का जिला जज, इलाहाबाद को कामर्शियल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी जयप्रकाश यादव को बलिया का जिला जज, बरेली की कामर्शियल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी सुशील कुमार रस्तोगी को गोंडा का जनपद न्यायाधीश, कानपुर नगर के मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्युनल की पीठासीन अधिकारी संगीता श्रीवास्तव को मऊ का जिला जज और बरेली के लैंड एक्वीजेशन रिहैबिलिटेशन ट्रिब्युनल के पीठासीन अधिकारी डॉ दीपक स्वरूप सक्सेना को लखीमपुर खीरी का जिला बनाया गया है।

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