हथियारों के लिए चीन से गुहार लगा रहा पाकिस्तान, ब्रह्मोस से बेचैनी

बीजिंग/इस्लामाबाद: ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने सिर्फ आधे घंटे में पाकिस्तान को जितना नुकसान पहुंचाया, उसने पाकिस्तान की चैन को छीन लिया है। पाकिस्तान के चीनी हथियार भारत के सामने बुरी तरह से नाकाम रहे हैं। इसीलिए पाकिस्तान अब चीन से एडवांस हथियार की डिमांड कर रहा है। दरअसल, आधुनिक युद्ध अब मल्टी-डोमेन आधारित हो चुका है, जिनमें जमीनी लड़ाई के साथ साथ समुद्र, आकाश, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस में भी लड़ी जाती है। इसे मल्टीडोमेन ऑपरेशन्स कहा जाता है। पाकिस्तान इसमें काफी पिछड़ा है।

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चीन ने पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान को इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, प्रिसीजन टार्गेटिंग और इंटरऑपरेबिलिटी जैसी क्षमताएं से लैस कर उसे मॉडर्न बनाया था। चीन को उम्मीद थी कि नई क्षमताओं के साथ पाकिस्तान, भारत पर भारी पड़ेगा। चीन ने पाकिस्तान को भारत से युद्ध के दौरान लाइव डेटा भी दिए थे, फिर भी पाकिस्तान सेना को भारी नुकसान हुआ। भारत ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस तबाह कर दिए।

इसके अलावा चीन के लिए सबसे बड़ा झटका ये था कि 6-7 मई की रात के बाद पाकिस्तान के एक भी लड़ाकू विमान आसमान में नहीं उड़ पाए। एक अवाक्स जो भारतीय सीमा से 300 किलोमीटर के अंदर उड़ रहा था, उसे एस-400 ने 314 किलोमीटर से मार गिराया।

पाकिस्तान को आधुनिक हथियारों से लैस करेगा चीन?
पाकिस्तान भले ही अपने देश में जीत के दावे कर रहा है और लंबी लंबी छोड़ रहा है, लेकिन हकीकत ये है की चीन और पाकिस्तान दोनों जान रहे हैं लड़ाई में उनकी बुरी हार हुई है। चीन और पाकिस्तान जानते हैं कि भविष्य की लड़ाई और भी जटिल होने वाली है, जिनमें साइबर हमले, इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर और स्पेस-बेस्ड ऑपरेशन्स पारंपरिक लड़ाई के साथ घुलमिल जाएंगे।

इसीलिए पाकिस्तान, चीन से अपने एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने, अंतरिक्ष आधारित क्षमताओं को विकसित करने और लेजर गाइडेड हथियारों की क्षमता को विकसित करने में मदद चाहता है। ऑपरेशन सिंदूर में देखने को मिला है कि भारत ने ऐसी पारंपरिक स्ट्राइक को प्राथमिकता दी है, जो सामरिक असर तो डालें, लेकिन परमाणु सीमा न पार करें।

इसी को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान, चीन से कुछ एडवांस हथियार हासिल करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के पास पहले से ही HQ-9 एयर डिफेंस था, जिसे भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में तबाह कर दिया था। जिसके बाद चीन ने पिछले महीने फिर से पाकिस्तान को नया HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम भेजा है। लेकिन पाकिस्तान की कोशिश चीन के सबसे एडवांस HQ-19 एयर डिफेंस सिस्टम को हासिल करने की है, जिसका रेंज 500 किलोमीटर तक है।

चीन ने इसे बैलिस्टिक मिसाइलों, सुपरसोनिक हथियारों और लो-अर्बिट सैटेलाइट को इंटरसेप्ट करने केलिए बनाया है। इसके लिए भविष्य में चीन, पाकिस्तान को प्रिसीजन-गाइडेड म्यूनिशन्स दे सकता है, जिससे पाकिस्तान के पास भारत की तरह सटीक हमला करने की क्षमता आए। पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का कहना है कि पाकिस्तान को हर हाल में ब्रह्मोस मिसाइल से बचने के लिए एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम चाहिए।

लेजर गाइडेड हथियार, प्रिसीजन वारफेयर
पाकिस्तान एयरफोर्स ने चीन की मदद से अंतरिक्ष आधारित ISR (Intelligence, Surveillance, Reconnaissance) क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया है। इसके अलावा भारत ने पिछले कुछ समय में तेजी से DEW यानि डायरेक्टेड एनर्डी वीजन क्षमता बढ़ाने के लिए भारी भरकम निवेश किया है। लेजर बीम पर आधारित ये हथियार ड्रोन स्वॉर्म, मिसाइल और लूटरिंग म्यूनिशन जैसी चुनौतियों से निपटने में बेहद उपयोगी हैं। भारत ने हाल ही में 30 kW Mark-2A DEW सिस्टम का परीक्षण किया है, जिसकी रेंज 5 किमी बताई जा रही है।

इसके अलावा भारत के पास 300 kW ‘सूर्य’ सिस्टम भी है, जिसकी रेंज 20 किमी तक है। चीन ने भी AM-500 और Sheng-1 जैसे सिस्टम बनाए हैं, जिनकी रेंज 1 किमी से 25 किमी तक है। पाकिस्तान चाहता है कि चीन उसे ये सिस्टम भी दे। पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का कहना है कि पाकिस्तान को तेजी से चीनी हथियारों को हासिल करने के लिए काम करना चाहिए, अन्यथा भविष्य में उसे भारत के खिलाफ और ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

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