ब्रिटेन सहिष्णुता और विविधता के लिए….’, प्रदर्शन पर बोले पीएम कीएर स्टार्मर

 नई दिल्ली। इमिग्रेशन के खिलाफ दक्षिणपंथियों की ओर से किए गए प्रदर्शनों के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि लोगों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन पुलिस पर हमले निंदनीय हैं।

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उन्होंने कहा, ”ब्रिटेन एक ऐसा राष्ट्र है जो सहिष्णुता और विविधता के लिए जाना जाता है। हमारा ध्वज हमारी विविधता का प्रतिनिधित्व करता है और हम इसे उन लोगों के हाथों में कभी नहीं सौंपेंगे जो इसे हिंसा, भय और विभाजन के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करते हैं।” हम अशांति फैलाने वालों के सामने समर्पण नहीं करेंगे। शनिवार को हुए प्रदर्शन में 1,50,000 लोग शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों की पुलिस से हिंसक झड़प हुई थी। 26 अधिकारी घायल हुए थे। मामले में 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

एलन मस्क ने रैली को किया संबोधित

वहीं, एएनआइ के अनुसार टेक दिग्गज एलन मस्क ने शनिवार को लंदन में एक अति-दक्षिणपंथी आव्रजन-विरोधी प्रदर्शन को वर्चुअल रूप से संबोधित किया। उन्होंने उनसे ब्रिटेन में ”क्रांतिकारी सरकारी बदलाव” का आह्वान किया। उनकी टिप्पणी ट्रंप की ब्रिटेन की आगामी राजकीय यात्रा से कुछ दिन पहले हुई है।

रैली के आयोजक टामी राबिन्सन के साथ एक प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान मस्क ने कहा कि ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर सरकारी सुधार की आवश्यकता है और जनता को सत्ता की बागडोर संभालनी चाहिए, न कि किसी नौकरशाही को, जिसे इसकी परवाह नहीं है। उन्होंने कहा, ”हमें क्रांतिकारी सरकारी परिवर्तन करना होगा। वास्तव में सभी को लोगों को संगठित करने, सरकार की कमान संभालने, सुधार करने और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि वास्तव में आपके पास एक ऐसी सरकार हो जो लोगों के लिए और लोगों द्वारा हो।”

कनाडा में भी निकाली गई रैली

इमिग्रेशन के विरोध में कनाडा के क्रिस्टी पिट्स पार्क में भी रैली निकाली गई। इस दौरान 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया। कनाडा फ‌र्स्ट पैट्रियट रैली नामक कार्यक्रम का आयोजन उस विरोध के लिए किया गया था जिसे समूह ने ”सामूहिक आव्रजन” बताया था।

इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में आयोजकों ने दावा किया कि वे कनाडाई मूल्यों की रक्षा और नए लोगों की अपेक्षा नागरिकों को प्राथमिकता देने के लिए रैली कर रहे थे। रैली के आयोजक जो अनिदजार ने बताया कि यह प्रदर्शन कनाडाई लोगों को पहले रखने, अपने देश को पहले रखने” के बारे में था। उनका तर्क था कि बड़ी संख्या में इमिग्रेशन से राष्ट्रीय संसाधनों पर दबाव पड़ता है।

(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

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