10 हजार साल क्यों फटा ज्वालामुखी, भारत समेत किन-किन देशों तक होगा असर?

नई दिल्ली। इथियोपिया के दनाकिल इलाके में आज सुबह एक बेहद दुर्लभ ज्वालामुखी विस्फोट हुआ। हैली गुब्बी नाम का यह ज्वालामुखी, जो अब तक शांत माना जाता थाअचानक फट पड़ा। यह जगह मशहूर एरटा एले ज्वालामुखी से करीब 15 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है।

Advertisement

सुबह लगभग 8:30 बजे (स्थानीय समय) हुए विस्फोट में बेहद ऊंचा राख का बादल बना, जो 10 से 15 किलोमीटर तक ऊपर उठ गया और हवा के साथ बहकर दक्षिण-पश्चिमी अरब प्रायद्वीप की ओर चला गया।

कितने सालों बाद फिर सक्रिय हुआ ज्वालामुखी?

हैली गुब्बी एक शील्ड-टाइप ज्वालामुखी है और इथियोपिया के दूर-दराज अफार क्षेत्र में आता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस ज्वालामुखी के होलोसीन काल (कई हजार साल) में विस्फोट का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। माना जाता है कि यह 10,00012,000 साल बाद फिर से सक्रिय हुआ है।

इलाका बेहद दूर और कठिन है, इसलिए ज्वालामुखी की निगरानी आम तौर पर सैटेलाइट के जरिए ही होती है। इसी कारण विस्फोट से जुड़ी शुरुआती जानकारी भी उपग्रहों से ही मिली है।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा SO₂

सैटेलाइट तस्वीरों में राख के साथ सल्फर डाइऑक्साइड (SOकी बड़ी मात्रा भी दिखाई दी है। हालांकि यह क्षेत्र आबादी से दूर है और अब तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन इतनी ऊंचाई तक पहुंची राख हवाई जहाजों के लिए खतरा बन सकती है। स्थानीय चरवाहों और पर्यावरण पर भी इसका कुछ असर पड़ सकता है, क्योंकि राख जमीन पर गिर सकती है।

यह पूरा इलाका अफार रिफ्ट कहलाता है, जहां अफ्रीकी प्लेट धीरे-धीरे अलग हो रही है। यहां कई ज्वालामुखी हैं, जिनमें एरटा एले लगातार सक्रिय रहता है। हैली गुब्बी का अचानक फटना वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इतने लंबे समय शांत रहने वाले ज्वालामुखी का फिर से सक्रिय होना रिफ्ट जोन की गहराई में होने वाली गतिविधियों पर नई जानकारी दे सकता है

आगे फिर विस्फोट की संभावना है या नहीं?

ताजा रिपोर्ट के अनुसार, विस्फोट का सबसे तेज चरण अब काफी हद तक थम गया है। लेकिन वैज्ञानिक अभी भी लावा की हलचल, धरती की कंपकंपी और गैसों के स्तर पर नजर रख रहे हैं, ताकि यह पता चल सके कि आगे किसी और विस्फोट की संभावना है या नहीं।

जानकारी के अनुसार, इथियोपिया में ज्वालामुखी की गतिविधि से राख के गुबार के कारण होने वाली संभावित रुकावटों से निपटने के लिए कई फ़्लाइट्स कैंसिल कर दी गईं। वहीं, भारतीय एयरलाइंस और एयरपोर्ट्स को एक एडवाइजरी भी जारी की गई है। बताया जा रहा है कि राख का गुबार पूर्व की ओर बढ़ रहा है और सोमवार देर रात तक इसके भारत के कुछ मुख्य इलाकों तक पहुंचने का अनुमान है।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, आकासा एयर, इंडिगो और KLM उन एयरलाइंस में से हैं जिन्होंने ज्वालामुखी की राख की समस्या के कारण कुछ फ़्लाइट्स कैंसिल कर दीं। हजारों साल में पहली बार फटने के कारण इस ज्वालामुखी के राख का गुबार लाल सागर से होते हुए यमन और ओमान की ओर चला गया। यह बादल अब उत्तरी अरब सागर पर फैल गया है।

डीजीसीएम ने एयरालाइंस के लिए जारी की एडवाईजरी

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (DGCA) ने एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि वे राख से प्रभावित इलाकों से पूरी तरह बचें, आधिकारिक आदेश के अनुसार, फ्लाइट प्लानिंग रूट और फ्यूल से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा जाए।

वहीं, एयरलाइंस से यह भी कहा गया है कि राख मिलने की किसी भी शक वाली बात की तुरंत रिपोर्ट करें, जिसमें इंजन की परफॉर्मेंस में गड़बड़ी या केबिन का धुआं या बदबू शामिल है।

डीजीसीए ने कहा कि है कि अगर ज्वालामुखी की राख एयरपोर्ट के ऑपरेशन पर असर डालती है, तो संबंधित ऑपरेटर को तुरंत रनवे, टैक्सीवे की जांच करनी चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here