नई दिल्ली। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने स्पैम (अनचाहे) एवं विज्ञापन वाले कॉल से छुटकारा दिलाने के लिए डू नोट डिस्टर्ब (डीएनडी) एप का नया वर्जन लांच किया है।
एप की मदद से कोई भी उपभोक्ता सिर्फ एक क्लिक करके स्पैम कॉल के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकता है। एप की मदद से उपभोक्ता अपनी शिकायत पर होने वाली कार्रवाई के बारे में जान सकता है।
टेलीकॉम कंपनियों की तरफ से स्पैम कालर के खिलाफ होने वाली कार्रवाई से अगर उपभोक्ता संतुष्ट नहीं है तो वह उसी एप पर टेलीकॉम कंपनी के खिलाफ अपील भी दायर कर सकेगा।
एप में क्या है खास?
ट्राई ने स्मार्टफोन के इंटरनेट की स्पीड को जानने के लिए माई स्पीड नामक एप का भी नया वर्जन जारी किया है। इस एप के जरिए रियल टाइम में नेटवर्क के प्रदर्शन पता कर सकेंगे।
इस एप से यह भी पता चलेगा कि किस टेलीकॉम कंपनी का नेटवर्क प्रदर्शन कितना अच्छा है। कॉल सेवा के अनुभव को जानने व उसे बताने की सुविधा के लिए ट्राई अगले महीने माई काल एप लांच करने जा रहा है।
ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लोहाटी ने बताया कि अभी स्पैम काल आता है तो अधिकतर लोग उसे ब्लाक कर देते हैं, लेकिन इससे स्पैम काल से छुटकारा नहीं मिलेगा।
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स्पैम काल की शिकायत
स्पैम कॉल की शिकायत डीएनडी पर करने पर ही उस कालर के खिलाफ कार्रवाई हो पाएगी। किसी नंबर के खिलाफ पांच अलग-अलग नंबर से शिकायत की जाती है तो उसके आउटगोइंग सर्विस को 15 दिनों के लिए ब्लॉक कर दिया जाता है।
दोबारा इस प्रकार की गलती करने पर उस नंबर को हमेशा के लिए डिस्कनेक्ट कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि डीएनडी एप विभिन्न भाषा में उपलब्ध है और इस पर आने वाली शिकायत को टेलीकाम कंपनियों के पास भेज दिया जाता है।
हर शिकायत पर टेलीकाम कंपनियों को कार्रवाई के बारे में बताना होता है। ऐसा नहीं करने वाली टेलीकाम कंपनियों के वित्तीय इंसेंटिव में कटौती की प्रविधान है।

एआई की मदद से चलेगा एप
पिछले कुछ दिनों से देश की प्रमुख टेलीकाम कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से स्पैम काल की जानकारी उपभोक्ता को दे रही है। ट्राई चेयरमैन ने बताया कि सिर्फ उन स्पैम काल को देखकर उसे ब्लाक करने या उसे कट करने से काम नहीं चलेगा।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में उपभोक्ताओं को उनकी मर्जी के बगैर कमर्शियल काल करने वाले 7.31 लाख गैर पंजीकृत टेलीकालर्स को नोटिस जारी किया गया।
इनमें से 4.73 लाख कालर्स को एक माह के लिए संचार सेवा से प्रतिबंधित कर दिया गया। बार-बार गलती करने वाले 89,936 कालर्स को छह माह के लिए संचार सेवा से बेदखल कर दिया गया तो 1.84 लाख को डिस्कनेक्ट कर दिया गया।











