कांग्रेस के निशाने पर हरदीप सिंह पुरी, इस्तीफे के लिए संसद से सड़क तक की घेराबंदी

नई दिल्ली। कांग्रेस ने अमेरिका से ट्रेड डील को लेकर सरकार पर जारी हमलों के बीच अब केंद्रीय पेट्रोलिय मंत्री हरदीप पुरी को भी विवादित एपस्टीन फाइल्स के मामले में संसद से सड़क तक घेरने की कोशिशें तेज कर दी है।

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पार्टी ने इस मामले में केंद्रीय मंत्री की सफाई को ‘सरासर झूठ’ बताते हुए हरदीप पुरी के तत्काल इस्तीफे की मांग की और आरोप लगाया वे जेफ्री एपस्टीन से निरंतर संपर्क में रहे थे। बजट सत्र के आखिरी दिन संसद परिसर में भी कांग्रेस के सांसदों ने पुरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए उनके इस्तीफे की मांग उठाई।

कांग्रेस सांसदों ने लहराए पोस्टर

संसद परिसर में हरीदप पुरी के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसदों ने एपस्टीन विवाद को लेकर बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर भी लहराए। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के सदन में एपस्टीन मामले से पुरी के लिंक होने के आरोपों के बाद कांग्रेस अब इसे बड़ा सियासी मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है।

इसलिए संसद परिसर में जहां पार्टी सांसदों ने विरोध का मोर्चा संभाला वहीं सड़क पर युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब की अगुवाई में राजधानी में सड़क पर उतर कर पुरी को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाए जाने की मांग की।

कांग्रेस का प्रेस कॉन्फ्रेंस

कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने इसके बाद पार्टी दफ्तर में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को तत्काल अपने इस मंत्री से इस्तीफा लेना चाहिए। खेड़ा ने कहा कि पुरी ने अपने स्पष्टीकरण में एपस्टीन से ज्यादा बात नहीं होने की बात कही है जो पूरी तरह झूठ है क्योंकि खुलासे में सामने आए कई ईमेल से स्पष्ट है कि हरदीप पुरी खुद इस आदमी से मिलने का आग्रह करते थे।

केंद्रीय मंत्री की सफाई को विरोधाभासी बताते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि 13 नवंबर 2014 को ¨लक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन को एपस्टीन ने एक मेल भेजा जिसमें ‘डिजिटल इंडिया’ की जानकारी दी गई थी, जबकि भारत में ‘डिजिटल इंडिया’ की शुरूआत जुलाई 2015 में हुई थी।

क्या है कांग्रेस का आरोप?

उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि पुरी ने भारतीय नागरिकों से पहले डिजिटल इंडिया की जानकारी एपस्टीन को दी थी। खेड़ा ने कहा कि यह सवाल भी अहम है कि जब हरदीप पुरी उस समय सरकार का हिस्सा नहीं थे तो इसकी जानकारी उन्हें कहां से मिली और सरकार को जवाब देना चाहिए कि पुरी किसकी तरफ से उसके संपर्क में थे।

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