केरला स्टोरी-2 के सर्टिफिकेशन पर हाईकोर्ट का नोटिस, रिलीज पर रोक की मांग

कोच्चि। केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार को हिंदी फीचर फिल्म ‘केरला स्टोरी-2’ के निर्माताओं को नोटिस जारी किया। यह नोटिस उस रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया, जिसमें फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा दिए गए प्रमाणन को चुनौती दी गई है। याचिका में फिल्म के टीजर और ट्रेलर पर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रचार सामग्री में विभिन्न राज्यों की महिलाओं को प्रेम संबंधों के जरिए फंसाकर जबरन धार्मिक परिवर्तन के लिए मजबूर किए जाने का चित्रण किया गया है। हालांकि कथित कहानी कई राज्यों में फैली बताई गई है, लेकिन फिल्म के शीर्षक में आतंकवाद, जबरन धर्मांतरण और जनसांख्यिकीय साजिश जैसी घटनाओं को केवल केरल से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। याचिका में टीजर के अंत में दिए गए हिंदी नारे “अब सहेंगे नहीं, लड़ेंगे” पर भी आपत्ति दर्ज की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह नारा प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का आह्वान करता प्रतीत होता है और इससे सांप्रदायिक तनाव भड़कने की आशंका है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीबीएफसी ने सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 5बी के तहत निर्धारित वैधानिक प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया। इस धारा के अनुसार ऐसी फिल्मों को प्रमाणन नहीं दिया जा सकता जो सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता या नैतिकता के विरुद्ध हों अथवा अपराध के लिए उकसाने की संभावना रखती हों।
याचिकाकर्ता ने वर्ष 2023 में रिलीज हुई फिल्म द केरला स्टोरी से जुड़े मामले का भी हवाला दिया है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। उस दौरान निर्माताओं ने यह स्पष्ट करने वाला डिस्क्लेमर जोड़ने पर सहमति जताई थी कि फिल्म में प्रस्तुत कुछ आंकड़ों के लिए प्रामाणिक डेटा उपलब्ध नहीं है और कहानी आंशिक रूप से काल्पनिक है।
याचिका में कहा गया है कि पूर्व में न्यायिक जांच के बावजूद सीक्वल को पर्याप्त परीक्षण के बिना प्रमाणित कर दिया गया, जबकि इसकी सामग्री का सांप्रदायिक सौहार्द और क्षेत्रीय गरिमा पर संभावित प्रभाव गंभीर हो सकता है। हालांकि याचिका में यह स्वीकार किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संरक्षित है, लेकिन यह भी रेखांकित किया गया है कि यह स्वतंत्रता सार्वजनिक व्यवस्था के हित में युक्तिसंगत प्रतिबंधों के अधीन है।
इसके अतिरिक्त, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 196 और 197 का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि फिल्म की सामग्री धार्मिक या क्षेत्रीय समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा दे सकती है। याचिकाकर्ता ने फिल्म को दिए गए प्रमाणन को रद्द करने, शीर्षक और डिस्क्लेमर पर पुनर्विचार करने तथा आगे की समीक्षा तक फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को निर्धारित की गई है। -आईएएनएस

Advertisement

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here