नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए उम्मीदवारों का चयन करने वाली स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष के रूप में राज्य का दो दिवसीय दौरा पूरा किया है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोराह ने पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने की घोषणा की है, जिससे कांग्रेस में असंतोष और दल-बदल की आशंका बढ़ गई है।
भूपेन बोराह, जो 30 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े थे और जुलाई 2021 से मई 2025 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख रहे, ने शुक्रवार को पार्टी छोड़ दी। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद एनडीटीवी को बताया कि 8 मार्च तक कई अन्य कांग्रेस नेता भी दल बदल लेंगे।
बोराह रविवार को भाजपा में शामिल होने वाले हैं। सूत्रों के अनुसार, गौरव गोगोई के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद बोराह असहज थे और उन्हें लगता था कि नए नेतृत्व में धुबरी सांसद रकीबुल हुसैन को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
प्रियंका गांधी के लिए अब प्रमुख चुनौतियां हैं
- पार्टी से पलायन रोकना — भूपेन बोराह के इस्तीफे के बाद अन्य नेताओं के भाजपा में जाने की संभावना को रोकना और पार्टी को एकजुट रखना।
- सहयोगियों को अंतिम रूप देना — चुनाव से पहले संभावित गठबंधनों को मजबूत करना और उम्मीदवारों की सूची अंतिम रूप देना।
- उम्मीदवार चयन प्रक्रिया — स्क्रीनिंग कमेटी के माध्यम से मजबूत और लोकप्रिय चेहरों को टिकट देना।
प्रियंका ने अपनी यात्रा के दौरान असम के 21 विधायकों, तीन सांसदों, जिला अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों से विस्तृत मुलाकात की। कमेटी के अन्य सदस्यों में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सांसद इमरान मसूद शामिल हैं।
प्रियंका ने असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए कहा कि वे भ्रष्टाचार के जरिए लोगों के विश्वास को धोखा दे रहे हैं और पुरानी बातों पर अटके हुए हैं। उन्होंने 20 सूत्री चार्जशीट जारी कर भाजपा सरकार पर हमला बोला।
असम विधानसभा चुनाव अप्रैल-मई 2026 में होने की संभावना है, और कांग्रेस अब पार्टी में एकता बनाए रखने और मजबूत रणनीति बनाने पर फोकस कर रही है। भूपेन बोराह का पलायन कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है, लेकिन प्रियंका की सक्रियता से पार्टी स्थिति संभालने की कोशिश में जुटी है।













