नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत ने कूटनीतिक संतुलन बनाने का प्रयास करते हुए ईरान की बात भी सुनी और उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया।
अपने दो ‘रणनीतिक साझेदार’ देशों अमेरिका और इजरायल की तरफ से ‘पारंपरिक मित्र’ देश ईरान पर हो रहे हमले में अपनी कूटनीतिक हितों को साधने की कोशिश के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के उप विदेश मंत्री डॉ. सईद खतीबजादेह से मुलाकात की।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी से भी उनकी विस्तृत बातचीत हुई। साथ ही नई दिल्ली में आयोजित कूटनीतिक मुद्दों के बहस के सबसे बड़े मंच रायसीना डायलॉग में शुक्रवार को डॉ. खतीबजादेह को बोलने के लिए आमंत्रित किया जहां उन्होंने खुलकर अमेरिका और इजरायल पर हमला बोला।
मौजूदा युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहला मौका है जब ईरान सरकार के एक वरिष्ठ सदस्य ने किसी दूसरे देश के बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच से अपना पक्ष रखा। रायसीना डायलॉग का आयोजन भारतीय विदेश मंत्रालय करता है।
ईरान के उप विदेश मंत्री डॉ. खतीबजादेह ने कहा कि, “पश्चिमी एशिया में इस समय अंतरराष्ट्रीय कानून का सबसे बड़ा उल्लंघन हो रहा है।” उन्होंने कहा कि ईरान अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई कर रहा है। “ईरान दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है और हमें पता है कि अपनी सुरक्षा कैसे करनी है। यह हमारे अस्तित्व की लड़ाई है।”
डॉ. खतीबजादेह ने अमेरिका और इजरायल पर क्षेत्रीय व्यवस्था को बदलने की कोशिश का भी आरोप लगाया। “अमेरिका और इजरायल एक नया मध्य पूर्व बनाना चाहते हैं। इसलिए वे कार्पेट बॉम्बिंग कर रहे हैं। हमारे पास जवाब देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।”इस मंच से ईरानी उप विदेश मंत्री ने कई खुलासे भी किये और यह भी दावा किया कि हमले से पहले क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए बातचीत चल रही थी। “
ओमान के विदेश मंत्री की मध्यस्थता में बहुत अच्छी वार्ता चल रही थी और हम एक बेहद संतुलित समझौते के करीब थे। अमेरिकी पक्षकारों ने वार्ता को बहुत की सकारात्मक बताया और ईरान से कहा कि वह सोमवार को लिखित प्रस्ताव भेजेंगे। लेकिन मंगलवार को हमला शुरू कर दिया गया।”
उन्होंने इस आरोप को गलत बताया कि ईरान खाड़ी के अन्य देशों पर हमला कर रहा है। “हम वहीं हमला कर रहे हैं जहां अमेरिकी सैनिक अड्डे हैं या जहां से हम पर हमला हो रहा है।” उन्होंने कहा कि यह केवल ईरान की नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून की भी लड़ाई है।“
‘ट्रंप अपनी मर्जी से न्यूयार्क शहर में मेयर चुन नहीं सकते’
क्या दो देशों के बीच युद्ध होने पर एक-दूसरे के शीर्ष नेताओं को मारना नया सामान्य बन जाएगा? अगर ऐसा है तो यह दुनिया के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।”
ईरान में सत्ता बदलाव की योजना पर उन्होंने कहा कि, डॉ. सईद ने यह भी खुलासा किया कि, “अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप अपनी मर्जी से न्यूयार्क शहर में मेयर चुन नहीं सकते जबकि ईरान में नई सरकार बनाना चाहते हैं।” सौ देशों के प्रतिनिधियों से भरे हाल में इस बात पर खूब तालियां बजी।
रायसीना डायलॉग के मंच से उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। “हमने अभी तक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया है। अगर हम इसे बंद करने जा रहे हैं तो इसकी घोषणा करेंगे। फिलहाल हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट कि हम भारतीय जहाजों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा रहे।
ईरानी उप विदेश मंत्री ने उस ईरानी नौसैनिक जहाज का भी जिक्र किया जो हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के लिए भारत आया था और जिस पर हिंद महासगार में श्रीलंका के करीक अमेरिकी हमले में कई ईरानी नाविक मारे गए। “वह जहाज हमारे भारतीय दोस्तों के निमंत्रण पर एक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में शामिल होने आया था। वह बिना हथियार के था और उसे डुबो दिया गया। यह बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है।”
सनद रहे कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत ने कई दिनों तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी थी, लेकिन शुक्रवार को विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास जाकर शोक पुस्तिका में संदेश दर्ज किया।













