नई दिल्ली: ट्रंप ने सोशल मीडिया पर संकेत दिए हैं, कि अमेरिका पश्चिम एशिया में सैन्य कार्यवाही को समेटने पर विचार कर कर रहा है। इस पोस्ट में उन्होंने कई उदाहरणों का जिक्र कर कहा कि अमेरिका ने इस युद्ध में अपने उद्देश्य हासिल कर लिए हैं। हालांकि जानकार इस पर भी ये कहकर सवाल उठा रहे हैं कि ना तो ईरान में वास्तविक तौर पर सत्ता बदली और ना ही परमाणु कार्यक्रम को कोई ख़ास फर्क पड़ा है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति जो कह रहे हैं, उसके पीछे कई वजहें हैं।
जानकारों के मुताबिक ये रणनीति का हिस्सा
अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार राजीव डोगरा कहते हैं कि ट्रंप हर रोज अपने बयान बदलते हैं। वो अब तक दस बार कह चुके हैं कि हम युद्ध जीत चुके हैं, लेकिन फिर कहते हैं कि हम वॉर पूरी तरह नहीं जीते हैं। ट्रंप की कथनी और करनी में बहुत फर्क है। एक तरफ वो यूएस मरीन की तैनाती कर रहे हैं,साथ ही ये भी कह रहे हैं कि होर्मुज स्ट्रेट भी खोल देंगे। ध्यान देने वाली बात ये है कि वो युद्ध के मद्देनजर रक्षा विभाग को 200 बिलियन डॉलर भी देना चाहते हैं।
इसका अर्थ यही है कि अमेरिका युद्ध के लिए लंबे वक्त की योजना बना रहा है। हालांकि उसके परिणाम पर शक है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर तो वो अब तक 8 जेट गिरने की गिनती कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके 15 हवाई जहाज अब तक गिर चुके हैं। फिलहाल ईरान ने उन्हें काफी मजबूती से टक्कर दी है। ऐसे में ये युद्ध जल्दी खत्म होता नहीं दिखता। ट्रंप के लिए एक्जिट रूट फिलहाल उनकी घरेलू चुनौतियों के लिहाज से भी मुश्किल है।
बिना मकसद हासिल किए ही क्या रुक जाएगा US?
डोगरा कहते हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार अमेरिका को ऐसे युद्ध में मात खानी पड़ी है, जहां उसकी सैन्य तकनीक और युद्ध नीति को लेकर सवाल उठे हैं। हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान की रणनीति के जरिए अमेरिका की वर्ल्ड ऑर्डर पर बादशाहत खत्म हो गई है। अमेरिका अब तक बिना तर्क के देशों पर प्रतिबंध लगाता रहा है, अब होर्मुज स्ट्रेट पर ईरानी रणनीति इन प्रतिबंधों का ही एक रूप है।
यूएस को इस बात पर बहुत गर्व था कि उसके पास छठे जनरेशन के स्टेल्थ फाइटर जेट हैं, जिन्हें ना डिटेक्ट किया जा सकता है, ना नष्ट किया जा सकता है। लेकिन ईरान ने ऐसे दो जेट मार गिराए हैं। ऐसे में ट्रंप जो कह रहे हैं वो क्यों कह रहे हैं, समझा जा सकता है।
ईरान का संदेश पश्चिम तक पहुंचा?
अमर ओनैस कहते हैं कि ईरान में लीडरशिप की नई पंक्ति तैयार है। 4 हजार किमी. की दूरी वाली मिसाइल से हमले के जरिये उसने संदेश दे दिया है कि अगर यूरोपीय देशों ने किसी तरह की आक्रामक पहल की तो 4500 किमी दूर लंदन और जर्मनी तक पहुंचना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। इस बीच ट्रंप के बयानों से लगता नहीं कि नेतन्याहू के पास जंग खींचने का बहुत वक्त है। ऐसे में जंग पर जल्द ही विराम लगता दिख सकता है ।










