ड्रोनों के झुंड से हमला हुआ तो कैसे होगा इंटरसेप्ट? DRDO के हथियार

नई दिल्लीः पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग में ईरान के सस्ते ड्रोन अमेरिका-इजरायल पर भाड़ी पड़ रहे हैं। ईरान के किफायती ड्रोन अमेरिका और इजरायल को थका रहे हैं। इस जंग में ड्रोन के इस्तेमाल का यह नया पैटर्न सामने आया है। वहीं जियोपॉलिटिकल हालात को देखते हुए भारत भी झुंड के ड्रोन हमलों से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने में जुटा हुआ है। जैसे-जैसे दुनिया में सस्ते हवाई हमलों और ड्रोन के झुंडों का खतरा बढ़ रहा है, भारत अपनी हवाई रक्षा क्षमताओं को बुनियादी तौर पर अपग्रेड कर रहा है।

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डिफेंस डॉट इन की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ( DRDO ) इस दिशा में काम कर रहा है। संगठन ‘डायरेक्टेड एनर्जी वेपन’ (DEW) कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। खासकर दुर्गा II और एमके-II(ए) सिस्टम को।

हाई पावर लेजर बदल रहे युद्ध का समीकरण

असल में, लेजर हथियारों की वजह से जंग के मैदान का समीकरण पूरी तरह से बदल जाता है। पारंपरिक स्थितियों में, सेनाओं को बेहद सस्ते मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) को मार गिराने के लिए बहुत महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलें दागनी पड़ती हैं। ईरान जंग में भी यही हो रहा है। ईरान के सस्ते ड्रोन्स के झुंड को मार गिराने के लिए अमेरिका-इजरायल को काफी फंड खर्च करना पड़ रहा है।

ड्रोन से निपटने के लिए बहुत पैसा होता है खर्च

ड्रोनों के झुंड को मार गिराने में सेना को काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। पारंपरिक इंटरसेप्टर मिसाइलों की एक लॉन्च पर लागत हजारों डॉलर तक हो सकती है, जबकि ड्रोन की कीमत इसके मुकाबले बहुत कम होती है। लेकिन लेजर सिस्टम महंगे गोला-बारूद के बजाय कंसनट्रेटेड पावर एनर्जी के जरिये ड्रोन के झुंड से निपटने में कारगर साबित होते हैं।

लेजर से किसी ड्रोन अटैक को रोकने का खर्च बहुत कम होता है; कुछ लीटर डीजल या पेट्रोल से ही ऐसे ड्रोन के झुडों को निपटाया जा सकता है।
सिक्योरिटी एक्सपर्ट

लेजर सिस्टम रणनीतिक गेम-चेंजर साबित होगा

सबकुछ ठीक रहा तो हाई पावर लेजर सिस्टम एक रणनीतिक गेम-चेंजर साबित होगा। झुंड के ड्रोन हमले में हर ड्रोन को मारने में काफी खर्च होते हैं, यदि लेजर सिस्टम सफल रहा तो भारतीय सेना के लिए यह एक बड़ी कामयाबी होगी। एक्सपर्टस का कहना है कि पारंपरिक मिसाइल लॉन्चरों के उलट, जिनका गोला-बारूद आखिरकार खत्म हो ही जाता है, लेज़र हथियार में गोला-बारूद का भंडार लगभग असीमित होता है; इसकी एकमात्र सीमा केवल एक निरंतर जनरेटर या बैटरी से बिजली की आपूर्ति की उपलब्धता होती है।

DURGA-II: भारी-भरकम रणनीतिक लेजर

  • भारत की रणनीतिक DEW यानी डायरेक्टेड एनर्जी वेपन पहलों में सबसे आगे DURGA-II (Directionally Unrestricted Ray-Gun Array) प्रोजेक्ट है।
  • 100 किलोवाट से ज़्यादा की ज़बरदस्त आउटपुट देने के लिए डिज़ाइन किया गया।
  • यह भारी-भरकम लेजर भविष्य में जमीन, समुद्र और हवा में इस्तेमाल होने वाले प्लेटफ़ॉर्म पर तैनात करने के लिए बनाया गया है।
  • इसकी जबरदस्त ताकत इसे बड़े खतरों से निपटने में सक्षम बनाती है।

Mk-II(A) सहस्त्र शक्ति : सामरिक झुंड-नाशक

  • DRDO ने Mk-II(A) लेजर सिस्टम विकसित किया है। इसे सहस्त्र शक्ति कार्यक्रम का हिस्सा माना जाता है।
  • यह छोटे UAVs, ड्रोन के झुंड और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों से निपटने के लिए बनाया गया है।
  • अप्रैल 2025 में इस सिस्टम का आंध्र प्रदेश के कुरनूल में नेशनल ओपन एयर रेंज में सफलतापूर्वक फ़ील्ड-टेस्ट किया गया।
  • Mk-II(A) ने कई फिक्स्ड-विंग ड्रोन को ट्रैक करके और उन्हें बेअसर करके, साथ ही उनके निगरानी सेंसर को निष्क्रिय करके अपनी क्षमता साबित की।
  • इस परीक्षण के बाद भारत अमेरिका, चीन, रूस और इजरायल जैसे देशों की लिस्ट में शामिल हो चुका जिनके पास ड्रोन से निपटने वाला लेजर सिस्टम है।

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