नारी वंदन अधिनियम में यू-टर्न, जनगणना-परिसीमन बिना लागू करने पर सवाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने नारी वंदन अधिनियम, 2023 को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि सरकार ने 30 महीने बाद अचानक रुख बदलते हुए बिना परिसीमन और जनगणना के ही महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है, जबकि पहले यही प्रक्रिया अनिवार्य बताई गई थी।

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कानून का प्रावधान और पहले की स्थिति

जयराम रमेश ने बताया कि सितंबर 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान नारी वंदन अधिनियम पारित किया गया था। इसके तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आरक्षित सीटों में भी एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया। उन्होंने कहा कि उस समय स्पष्ट किया गया था कि यह व्यवस्था परिसीमन और जनगणना पूरी होने के बाद ही लागू होगी।

‘यू-टर्न’ और राजनीतिक मंशा का आरोप

कांग्रेस नेता के अनुसार, जब इस विधेयक पर चर्चा हो रही थी, तब पार्टी ने मांग की थी कि इसे 2024 लोकसभा चुनाव से लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने इसे असंभव बताया था। अब, उनके मुताबिक, सरकार ने अपना रुख बदल लिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि वे “जनध्यान भटकाने वाले हथियार” (WMDs) का इस्तेमाल करते हैं और यह कदम भी विदेश नीति की विफलताओं तथा LPG और ऊर्जा संकट से ध्यान हटाने की कोशिश है।

विशेष सत्र और विपक्ष की मांग

जयराम रमेश ने दावा किया कि सरकार अगले पखवाड़े में नारी वंदन अधिनियम में संशोधन के लिए संसद का दो-दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का संकेत दे रही है। इस पर विपक्षी दलों ने पत्र लिखकर मांग की है कि पहले 29 अप्रैल को चल रहे विधानसभा चुनावों के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, ताकि प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या 50% तक बढ़ाने की योजना बना रही है, जिस पर गंभीर विचार जरूरी है।

आचार संहिता और जनगणना पर सवाल

अपने बयान में जयराम रमेश ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की आचार संहिता अब “Modi Code of Campaigning” बन गई है। उनके अनुसार, अप्रैल में विशेष सत्र बुलाना आचार संहिता का उल्लंघन होगा। साथ ही उन्होंने अप्रैल 2025 में घोषित जाति जनगणना को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाए और कहा कि पहले इस मुद्दे को उठाने पर कांग्रेस नेताओं को ‘अर्बन नक्सल’ कहा गया था।

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