न्यूयॉर्क/टोक्यो | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ओवल ऑफिस संबोधन ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में नई अस्थिरता पैदा कर दी है। ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को “भविष्य के लिए निवेश” बताए जाने के बावजूद, निवेशकों ने इसे जोखिम के रूप में देखा, जिससे एशियाई बाजारों में गिरावट और ऊर्जा की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई। कमोडिटी मार्केट: कच्चे तेल की कीमतों में ‘आग’ ट्रंप के भाषण के दौरान और उसके तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया:
ब्रेंट क्रूड: भाषण से पहले 100 डॉलर पर चल रहा ब्रेंट क्रूड 4% की उछाल के साथ 105.38 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
हॉर्मुज संकट: दुनिया की 20% ऊर्जा आपूर्ति का रास्ता (Strait of Hormuz) 28 फरवरी से लगभग बंद है। ट्रंप द्वारा इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अन्य देशों पर डालने के बयान ने सप्लाई चेन बाधित होने का डर बढ़ा दिया है।
इक्विटी मार्केट : एशियाई और अमेरिकी बाजारों में बिकवाली
बाजार को उम्मीद थी कि ट्रंप युद्ध समाप्ति का कोई स्पष्ट ‘एग्जिट प्लान’ देंगे, लेकिन ऐसा न होने पर निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी:
एशियाई गिरावट: जापान का निक्केई 1.5%, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.6% और हांगकांग का हैंग सेंग 1% टूट गया।
यूएस फ्यूचर्स: अमेरिकी बाजार खुलने से पहले ही डाउ जोंस और S&P 500 फ्यूचर्स 0.7% और नैड्सैक फ्यूचर्स 1% तक गिर गए।
निवेशकों की चिंता के मुख्य कारण
बाजार के जानकारों और विशेषज्ञों (जैसे मेलिसा टूफेनियन और ईवो डाल्डर) के अनुसार, बाजार इन 3 कारणों से डरा हुआ है:
स्पष्टता का अभाव: ट्रंप ने “2 से 3 सप्ताह” की समय-सीमा तो दी, लेकिन युद्ध के अंत को लेकर कोई ठोस योजना (Roadmap) पेश नहीं की।
विरोधाभासी दावे: यदि ईरान की नेवी और एयरफोर्स तबाह हो चुकी है, तो सैन्य कार्रवाई जारी रखने का तर्क निवेशकों को समझ नहीं आ रहा।
क्षेत्रीय निर्भरता: भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े तेल आयातक देश मध्य-पूर्व के तनाव के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
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