नई दिल्ली। नए कृषि बिलों के विरोध में पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन के कारण चालू वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर तिमाही) में 70 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान होगा। PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने यह अनुमान जताया है। इंडस्ट्री के प्रेसीडेंट संजय अग्रवाल का कहना है कि किसानों के प्रदर्शन के कारण पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के बॉर्डर क्षेत्रों में सप्लाई चेन बाधित हो गई है।
शेष मुद्दों का भी जल्द से जल्द समाधान हो
पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के आसपास के इलाकों में किसानों का प्रदर्शन 36 दिनों से चल रहा है। संजय अग्रवाल का कहना है कि किसानों और सरकार के बीच दो मुद्दों-पराली जलाने पर जुर्माना और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल-2020 को लेकर सहमति बन गई है। यह काफी प्रशंसनीय है। चैंबर ने शेष बचे दोनों मुद्दों का जल्द से जल्द समाधान निकालने की बात कही है। किसानों और सरकार के बीच दो अहम मुद्दों- तीनों कृषि बिलों की वापसी और MSP की लीगल गारंटी को लेकर सहमति होनी बाकी है।
प्रदर्शन का MSME पर बुरा असर
PHD चैंबर का कहना है कि किसानों के प्रदर्शन का पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के बॉर्डर क्षेत्र के माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) पर बुरा असर पड़ा है। संजय अग्रवाल के मुताबिक, MSME को मांग के अनुरूप कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कोविड-19 के कारण MSME पहले से ही मजदूरों की कमी, कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी, ट्रांसपोर्टेशन और वर्किंग कैपिटल की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रही है।
पंजाब-हरियाणा में 25 लाख से ज्यादा MSME
PHD चैंबर का कहना है कि पंजाब और हरियाणा में 25 लाख से ज्यादा MSME हैं। इनमें 45 लाख से ज्यादा वर्कर कार्यरत हैं। इन MSME का पंजाब और हरियाणा की 14 लाख करोड़ रुपए की GSDP में 4 लाख करोड़ रुपए का योगदान है। संजय अग्रवाल के मुताबिक, मौजूदा प्राइस के अनुसार पंजाब और हरियाणा की अनुमानित GSDP क्रमश: 5.75 लाख करोड़ और 8.31 लाख करोड़ रुपए है।
ये सेक्टर हुए प्रभावित
संजय अग्रवाल का कहना है कि किसानों के प्रदर्शन के कारण फूड प्रोसेसिंग, कॉटन टैक्सटाइल, गारमेंट्स, ऑटोमोबाइल, फार्म मशीनरी, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, ट्रेडिंग, टूरिज्म, हॉस्पिटेलिटी एंड ट्रांसपोर्ट सेक्टर बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इन सेक्टर्स को कई तरह के कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।












