ब्लैक फंगस का कहर: मरीजों का आंकड़ा 400 के पार हुआ, अब तक 40 से ज्यादा मौतें

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ब्लैक फंगस का आंकड़ा 400 के पार हो गया है। इनमें अकेले 192 मरीजों का इलाज राजधानी लखनऊ में चल रहा है। सबसे चिंता की बात ये है कि ब्लैक फंगस के इलाज में यूज होने वाली दवाइयों और इंजेक्शन का संकट बरकरार है। अस्पतालों में भी ये दवाइयां और इंजेक्शन नहीं हैं और ओपन मार्केट में भी नहीं मिल रहीं। प्रदेश में अब तक 40 से ज्यादा फंगस मरीजों की मौत हो चुकी है।

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लखनऊ में दो की मौत, 31 नए मरीज मिले
लखनऊ में शनिवार को फंगस के 31 नए मरीज मिले हैं। इसी के साथ मरीजों की संख्या 192 हो गई। इस दौरान दो लोगों की मौत भी हो गई। अब तक राजधानी में 15 लोग फंगस के चलते जान गंवा चुके हैं। शहर में सबसे ज्यादा संक्रमित मरीज KGMU में है। यहां 124 मरीजों का इलाज चल रहा है। जबकि 11 लोग इस बीमारी में अपनी जान गंवा चुके हैं। मरने वाले दोनों रोगी प्रदेश के दूसरे जिलों से है।

12 मरीजों का सफल ऑपरेशन किया
KGMU प्रशासन का कहना है कि पिछले 24 घंटे में 12 मरीजों का ऑपरेशन किया गया। जबकि 22 लोगों को भर्ती किया गया है। शहर में किसी भी अस्पताल में एक दिन में किए गए ऑपरेशन में यह संख्या सार्वधिक है। इसके अलावा लोहिया संस्थान में भर्ती मरीजों की संख्या 17 है। पीजीआई में मरीजों की संख्या 18 है। निजी संस्थानों में एरा मेडिकल कॉलेज में दो मरीज भर्ती हैं।

प्राइवेट अस्पताल मरीज भर्ती करने से बच रहे
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि एरा कॉलेज को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर प्राइवेट संस्थान ब्लैक फंगस के मरीज भर्ती करने से बच रहे हैं। इसकी पीछे बड़ी वजह दवाओं की कमी बताई जा रही है। हालांकि सरकारी अस्पताल में भी यह दिक्कतें है लेकिन ऊपरी दबाव की वजह से मरीज भर्ती करने से मना नहीं कर पा रहे हैं।

लखनऊ में ब्लैक फंगस पर मचा बवाल
ब्लैक फंगस के नए मरीजों के साथ इंजेक्शन का संकट भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। राजधानी लखनऊ में मंडलायुक्त कार्यालय से शनिवार को 50 इंजेक्शन जारी किए, वहीं दूसरी करीब इतने ही लोगों को पत्र जारी कर दिया है। अब ऐसे में इजेक्शन बांटने को लेकर काफी मथापच्ची करनी पड़ गई। इससे परेशान इंजेक्शन बांटने की जिम्मेदारी संभालने वाली संस्था रेड क्रांस सोसायटी ने मंडलायुक्त कार्यालय को इंजेक्शन वापस कर दिया। यहां तक की पत्र लिखकर यह भी पूछ लिया गया है कि इसका वितरण कैसे करना है यह अभी बता दें।

एक मरीज को तीन दिन में 18 डोज लगते हैं
एक मरीज को तीन दिन के डोज के हिसाब से 18 इंजेक्शन लगने हैं। ऐसे में अगर सभी को प्रॉपर डोज दिया जाए तो करीब 900 इंजेक्शन की जरूरत होगी। लेकिन अभी केवल 50 इंजेक्शन दिया गया। रेड क्रांस सोसायटी की तरफ से इंजेक्शन बांटने की जिम्मेदारी संभालने वाले जितेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि अगर एक दिन के हिसाब से भी बांटा जाए तो हम लोगों को कम से कम 300 इंजेक्शन चाहिए। इसमें हमको नियमानुसार पैसा भी लेना है। लेकिन मुश्किल यह है कि हमको एक दिन के बराबर भी इंजेक्शन नहीं दिया गया है।

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