लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्राइवेट स्कूल संचालकों ने बड़ा फैसला लिया है। संचालकों ने सरकार से कहा कि छात्रों के परिजनों को बकाया फीस का भुगतान अनिवार्य रूप से करना होगा। यही नहीं, नए सत्र की फीस भी देनी होगी। इसमें किसी तरह की कोई छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, संचालकों ने सरकार के उस फैसले को भी मान रखा। जिसमें सरकार ने स्कूलों से इस साल फीस वृद्धि नहीं करने को कहा था।
उत्तर प्रदेश में निजी स्कूल संचालकों के सबसे बड़े संगठन कंफेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेट स्कूल (CIS) व मेरठ सहोदय की ऑनलाइन बैठक हुई। बैठक में प्रदेश के 6 मंडलों के निजी स्कूल संचालक शामिल हुए। स्कूलों ने तय किया कि जरूरमंदों के अलावा जिन छात्रों की फीस नहीं आई उन्हें स्कूल से आउट किया जाएगा। यानी ऐसे छात्रों का नाम काट दिया जाएगा। CIS में मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, कानपुर, आगरा, अलीगढ़ मंडल के कई जिलों के 1300 CBSE व ICSE स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों के लगभग 13 लाख छात्र इस आदेश से प्रभावित होंगे।
सरकारी नौकरी, डॉक्टर, जर्नल स्टोर, उद्यमियों को कोई रियायत नहीं
स्कूल संचालकों ने तय किया है कि सरकारी कर्मचारी, चिकित्सा व स्वास्थ्य, किराना, फैक्ट्री संचालक, सब्जी, फल विक्रेता, दूध विक्रेता, सर्जिकल आयटम संबंधी कारोबारियों के बच्चों से पूरी फीस लेंगे। क्योंकि ये ऐसे कारोबार हैं जो कोरोना, लॉकडाउन में निरंतर चालू रहे। इस प्रोफेशन के लोगों को रियायत नहीं मिलेगी। स्कूलों ने अभिभावकों की सूची में इन पेशों से जुड़े अभिभावकों को मार्क करना शुरू कर दिया है ताकि इनसे पूरा बकाया वसूल सकें।
पुरानी फीस नहीं दी तो सीधे टीसी देंगे
CIS के महामंत्री राहुल केसरवानी ने कहा कि सभी निजी स्कूल संचालक सरकार, जनता के साथ हैं। पिछले साल भी फीस नहीं बढ़ी थी। लेकिन सरकार, जनता स्कूल संचालकों, शिक्षकों की परेशानी नहीं समझ रही। कई स्कूल वित्तीय समस्या के कारण बंद हो गए हैं। शिक्षकों की नौकरी चली गई। शिक्षकों को सालभर से पूरा वेतन नहीं दे पा रहे, क्योंकि स्कूलों में फीस नहीं आ रही। जिन छात्रों की परेशानी जायज है उनको मोहलत देंगे, फीस में छूट भी दे देंगे, लेकिन जो काम, नौकरियां लॉकडाउन में जारी रहें उनसे फीस पूरी लेंगे, पुराना बकाया भी लेंगे।













