रियल एस्टेट कंपनियों के लिए ग्रेनो प्राधिकरण ने किया था बड़ा खेल

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा में स्पोर्ट्स सिटी एवं रिक्रिएशनल मनोरंजन पार्क के लिए प्राधिकरण अधिकारियों ने खेल किया। प्रदेश सरकार और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की मंजूरी तक नहीं ली गई।

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स्पोर्ट्स सिटी की आढ़ में प्राधिकरण अधिकारियों ने रियल एस्टेट कंपनियों को भूखंड आवंटन के लिए प्राधिकरण ने अधिकारियों ने शर्तों तक तय करना तक मुनासिब नहीं समझा। योजना में आवेदन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तक की अनिवार्य शर्त की अनदेखी की गई। इसका फायदा उन रियल एस्टेट कंपनियों ने उठाया, जिन्हें खेल संरचनाओं को विकसित करने का अनुभव तक नहीं था।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीएजी ऑडिट को लेकर रिपोर्ट में सामने आया है कि प्राधिकरण ने 2011 से 2014 के बीच स्पोर्ट्स सिटी और रिक्रिएशनल मनोरंजन पार्क के लिए दो-दो भूखंड आवंटित किए थे।

इसमें चार गोल्फ कोर्स, दो क्रिकेट एकाडमी, दो मनोरंजन पार्क समेत अन्य खेल सुविधाएं विकसित होनी थीं। लेकिन जिस समय प्राधिकरण ने यह योजना निकाली, इसके लिए उसके पास शासन और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से अनुमोदन तक नहीं था और न ही इस श्रेणी के लिए कोई शर्तों तय की थीं।

यहां तक की योजना में आवेदन के लिए डीपीआर की शर्त तक शामिल नहीं की, इससे स्पोर्ट्स सिटी और रिक्रिएशनल मनोरंजन पार्क का अनुभव न रखने वाली रियल एस्टेट कंपनी ने फायदा उठाया। यहीं नहीं प्राधिकरण ने उप विभाजन की अनुमति को शामिल किया था।

नियमों एवं शर्तों को लेकर प्राधिकरण की लापरवाही के कारण एक भी स्पोर्ट्स सिटी या मनोरंजन पार्क विकसित ही नहीं हो पाया। आवंटित भूखंडों का उप विभाजन कर उनकी संख्या चार से बढ़कर 20 हो गई, इसमें 19 ने प्राधिकरण को भुगतान तक नहीं किया और उन पर प्राधिकरण की बकाया राशि 2329.42 करोड़ पहुंच गई।

प्राधिकरण ने पांच भूूखंडों का आवंटन निरस्त कर दिया। पांच ने बकाया भुगतान के लिए एस्क्रो खाता खोला, लेकिन दस आवंटी नोटिस के बावजूद एस्क्रो खाता खोलने के लिए आगे नहीं आए। आवंटियों ने 2022 तक कोई खेल ढांचा विकसित नहीं किया, बल्कि आवासीय परियोजनाओं को बेचने में लग गए।

प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी ने मूल मकसद ने इतर लेआउट प्लान भी स्वीकृत कर दिए। आवंटियों ने स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर धूल झोंकते हुए वन होल गोल्फ कोर्स, स्वीमिंग पूल, टेनिस कोर्ट आदि प्रस्तावित किए जो सामान्य ग्रुप हाउसिंग का भी हिस्सा होते हैं।

प्राधिकरण के दरियादिली दिखते हुए स्पोर्ट्स सिटी एक व दो में एफएआर व ग्राउंड कवरेज की अनुमति देकर 470.20 करोड़ का लाभ और दे दिया। लेकिन स्पोर्ट्स सिटी का मकसद पूरा नहीं हुआ।

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