ईरान नहीं, इजरायल सबसे बड़ा खतरा… सऊदी अरब के शक्तिशाली प्रिंस का बयान

रियाद: सऊदी अरब और ईरान के बीच दशकों पुरानी तनातनी अब खत्म होती दिख रही है। शिया देश ईरान और सुन्नी मुल्क सऊदी लंबे समय तक एक-दूसरे को विरोधी की तरह देखते रहे हैं। सऊदी अरब के पूर्व राजनयिक प्रिंस तुर्की अल फैसल का कहना है कि क्षेत्र के लिए ईरान खतरा नहीं है। पश्चिम एशिया की अस्थिरता की सबसे बड़ी वजह इजरायल है। फैसला का यह बयान सऊदी और ईरान के रिश्ते में नरमी का संकेत देता है।

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अल फैसल ने कहा कि लेबनान में हिजबुल्लाह के कमजोर होने और सीरिया में असद सरकार के पतन के बाद ईरान का प्रभाव कम हुआ है। दूसरी ओर इजरायल की वजह से लगातार क्षेत्र की शांति खतरे में पड़ी है। इजरायल ने लेबनान, गाजा और सीरिया पर लगातार बमबारी की है। ये हमले दिखाते हैं कि इजरायल शांति का अग्रदूत नहीं है। इजरायल की हरकतों पर अमेरिका को लगाम लगानी चाहिए।

हवाई सुरक्षा पर करेंगे काम

सऊदी अरब के पूर्व खुफिया प्रमुख रह चुके अल फैसल ने कहा कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देश एक संयुक्त हवाई रक्षा प्रणाली बनाने की योजना बना रहे हैं। इस तरह की प्रणाली इजरायल और ईरान के कतर पर किए गए हमलों के बाद जरूरी हो गई है। इन हमलों ने हवाई खतरों को लेकर चिंता बढ़ाई है।

अल फैसल ने यह भी कहा कि फिलिस्तीन मुद्दा और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों पर दुनिया की चुप्पी चरमपंथी समूहों के उदय का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि अनसुलझे मुद्दों से क्षेत्र में और अधिक अशांति फैल सकती है। ऐसे में दुनिया को ये सोचना चाहिए कि गाजा जैसे मुद्दों का स्थायी तौर पर हल निकले।

सऊदी बनाएगा परमाणु बम!

अल फैसल ने कहा कि सऊदी अरब को परमाणु हथियार बनाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इस तरफ ध्यान देना जरूरी है क्योंकि क्षेत्र में परमाणु संपन्न देश इजरायल मौजूद है। फैसल ने कहा कि हमने पहले सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से सुना था कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करता है तो सऊदी भी ऐसा करेगा। क्षेत्र में अस्थिरता देखते हुए परमाणु हथियारों के मुद्दे को व्यापक रूप से संबोधित किया जाना चाहिए।

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