हो क्या रहा… कफ सिरप से लेकर गंदे पानी से मौतों का जिम्मेदार कौन?

भोपाल : मध्य प्रदेश में बीते ढाई महीने में घटित दो घटनाओं ने देश को झकझोर कर रख दिया है। कफ सिरप छिंदवाड़ा में बेमौत 22 बच्चों की मौत हो गई। वहीं, अब इंदौर में गंदे पानी के कारण 14 लोगों की मौत हो गई है। इसके बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि मध्य प्रदेश में यह क्या हो रहा है। इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार कौन है। सरकार नीचे के दो-चार अधिकारियों को सस्पेंड कर खानापूर्ति कर लेती है। मगर जिम्मेदारी तय नहीं होती है। ये मौतें, आपदा नहीं, सरकार की नाकामी की वजह से हुई है।

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गंदे पानी से 14 मौतें

इंदौर... मध्य प्रदेश का वो शहर, जिसका नाम लेकर पूरी सरकार इतराती थी। हमारे प्रदेश में देश का सबसे स्वच्छ शहर है। आज उसी शहर पर ऐसा बदनुमा दाग लगा है, जिससे प्रदेश शर्मसार है। स्वच्छ शहर का तमगा लिए घूमने वाले नेताओं और अधिकारियों ने वहां के रहवासियों का जहर मिला हुआ पानी पिलाया। नतीजा यह है कि आज सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं, 14 लोगों की मौत हो गई है।

बिखर गई दुनिया

नेता अभी गलियों में घूमकर विलाप कर रहे हैं। मक्कारी और लापरवाही पर सवाल पूछने पर तिलमिला रहे हैं। पांच महीने पहले सुनील साहू के घर में जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी आई थी। जहरीले पानी से उसकी दुनिया ही उजाड़ दी। पांच महीने के अव्यान की मौत हो गई। मां कैमरा देखकर फफक पड़ती है। कहती है कि 10 साल की मिन्नतों और नौ महीने के बेड रेस्ट के बाद अव्यान का जन्म हुआ था। नल से दूध में पानी मिलाया और बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। मगर करप्ट अफसरों, मेयर और मंत्रियों तक अव्यान की मां की चीख नहीं पहुंच रही है।

जहरीले पानी के लिए जिम्मेदार कौन

आक्रोश को शांत करने के लिए सरकार खानापूर्ति में जुट गई है। महीनों से लोग गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे। लेकिन न तो इंदौर नगर निगम के कर्मचारी सुने और न ही बेशर्म पार्षद। स्थानीय विधायक और नगर विकास विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पास तो फुर्सत ही नहीं थी कि वो सुध लेते। विभाग के कामों से ज्यादा वह लोगों को संस्कार सीखाने में लगे रहते हैं।

चेतावनी के बावजूद पानी की सप्लाई

वहीं, 2022 में ही इंदौर को यह अलर्ट किया गया था कि ड्रेनज में पाइप लाइन डालने से हादसा हो सकता है। लेकिन नगर निगम और स्थानीय प्रशासन इसे इग्नोर करती रही। ड्रेनज के अंदर ही पानी का लाइन डाल दिया। अब परिणाम सबके सामने हैं।

1400 लोग बीमार हो गए लेकिन सब बेखबर

भागीरथपुरा में यह त्रासदी एक दिन में नहीं हुई है। बीमार लोग करीब एक महीने से हो रहे थे। बीच-बीच में शिकायत भी दी जा रही थी कि मगर सुनने वाला कोई नहीं था। बड़ी संख्या में जब एक साथ लोग बीमार हुए और उनकी मौतें हुई तो तंत्र की नींद खुली। इसके बाद मंत्री और अधिकारी अस्पताल के चक्कर लगाने लगे। ऐसे में सवाल है कि इन सबके लिए दोषी कौन है। घटना उस शहर में घटी है, जहां के सारे विधायक बीजेपी के हैं। सांसद बीजेपी के हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव की निगरानी में पूरा शहर है। फिर भी इतनी बड़ी चूक हुई है।

कफ सिरप ने भी छीनी 22 जिंदगियां

सिर्फ इंदौर ही नहीं, छिंदवाड़ा में भी अक्टूबर महीने में सरकारी लापरवाही की वजह से 22 बच्चों की जान चली गई है। जहरीला सिरप बिकता रहा लेकिन किसी को कानों कान खबर तक नहीं थी। मामले जब सामने आने लगे, तब सरकार की नींद खुली। इसके बाद पर्चा लिखने वाले डॉक्टर और कंपनी के मालिक समेत अन्य लोगों की गिरफ्तारी हुई। लेकिन इसे मंजूरी देने वाले भ्रष्ट अफसरों पर कोई केस नहीं हुआ।

जेब भरने वाले लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं

इन तमाम घटनाओं के पीछे के असली गुनाहगार सरकारी तंत्र के अफसर और कर्मचारी होते हैं। खानपूर्ति के लिए तत्काल तो कर्मचारियों पर कार्रवाई हो जाती है। मगर अफसरों का कुछ नहीं होता है। बहुत हुआ तो इस विभाग से उस विभाग में भेज दिए जाते हैं। मगर विभागीय लापरवाही की वजह से आए आपदा के लिए जिम्मेदार कोई नहीं होता है। इंदौर में ही कुछ साल पहले बावड़ी हादसे में 30 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। मगर लापरवाह अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

गौरतलब है कि इन घटनाओं के बाद तंत्र के लोग सिर्फ विलाप करने पहुंचते हैं। भागीरथपुरा की गलियों में पहुंचिए तो स्थानीय पार्षद से लेकर निगम की लापरवाही तक के सैकड़ों किस्से लोग सुना रहे हैं। मगर स्थानीय पार्षद इससे बेपरवाह होकर झूला झूल रहा था। अभी बीमार लोगों की तदाद बढ़ती जा रही है।

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