लखनऊ। विधान सभा में गुरुवार को रमजान के दौरान रोजा इफ्तार तथा सहरी के वक्त लाउडस्पीकर के माध्यम से उदघोष करने की मांग पर चर्चा हुई। सपा सदस्य कमाल अख्तर ने रोजा इफ्तार व सहरी के समय लाउडस्पीकर के माध्यम से सूचना दिए जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया। जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए नकार दिया गया।
विधानमंडल बजट सत्र के नौवें दिन विधान सभा में सपा सदस्य ने कहा कि सरकार त्योहारों के समय लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति देती है। रामलीला का उदाहरण दिया। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि इस पर विचार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश रात में 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर नहीं बजाने की है। उन्होंने यह भी कहा कि यह परंपरा उस समय की है, जब घड़ियां नहीं होती थीं।
नई दिल्ली में चल रहे एआइ इंपैक्ट समिट के दौरान चीनी रोबोट को अपना बताने वाली गलगोटिया यूनिवर्सिटी का मामला गुरुवार को विधान सभा में भी उठा। सपा सदस्य इंजीनियर सचिन यादव व पंकज मलिक ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी की जांच कराने व कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।
कहा कि बगैर जांच-पड़ताल के इस उत्पाद को कैसे समिट में शामिल कर लिया गया। यह न केवल शैक्षणिक पारदर्शिता बल्कि देश की वैज्ञानिक साख से भी जुड़ा गंभीर विषय है।
सपा सदस्यों द्वारा इसे उठाने पर पहले विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना कहा कि यह समिट यूपी में नहीं हो रही है और न ही इसे प्रदेश सरकार ने आयोजित कराया है। इसलिए इस पर विधान सभा में चर्चा नहीं हो सकती है। हालांकि सपा सदस्यों के अनुरोध पर बाद में इसे सरकार के ध्यानाकर्षण के लिए सपा सदस्यों को अपनी नोटिस पढ़ने की इजाजत दे दी गई।
सचिन ने कहा कि चूंकि विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश में संचालित है, इसलिए इसकी जवाबदेही राज्य सरकार के दायरे में आती है। ऐसे में सरकार को इस पूरे मामले पर स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि संबंधित विश्वविद्यालय का पक्ष सदन के समक्ष रखा जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और देश की अंतरराष्ट्रीय छवि पर आंच न आए। अधिष्ठाता मंजू सिवाच ने सपा की इस नोटिस को सरकार के ध्यानाकर्षण के लिए भेज दिया है।












