नई दिल्ली। बीते दिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने दुनिया पर थोपे गए ट्रंप टैरिफ को रद कर दिया था। इस बात से बौखलाए ट्रंप ने अब शनिवार को ग्लोबल टैरिफ 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर ट्रंप ने लिखा, “यूएस सुप्रीम कोर्ट द्वारा कई महीनों के सोच-विचार के बाद कल जारी किए गए टैरिफ पर बेतुके, खराब तरीके से लिखे गए और बहुत ज्यादा अमेरिका विरोधी फैसले की पूरी डिटेल और पूरे रिव्यू के आधार पर कृपया इस बयान का मतलब यह है कि मैं, अमेरिका के प्रेसिडेंट के तौर पर तुरंत लागू होने वाले देशों पर 10% वर्ल्डवाइड टैरिफ बढ़ाऊंगा, जिनमें से कई देश दशकों से बिना किसी बदले के (जब तक मैं नहीं आया!) अमेरिका को “लूट” रहे हैं, इसे पूरी तरह से मंजूर और कानूनी तौर पर टेस्ट किए गए 15% लेवल तक बढ़ा दूंगा।”
‘अगले कुछ महीनों में तय होंगे नए टैरिफ’
उन्होंने आगे कहा, “अगले कुछ महीनों में ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन नए और कानूनी तौर पर मंजूर टैरिफ तय करेगा और जारी करेगा, जिससे अमेरिका को फिर से महान बनाने का हमारा बहुत सफल प्रोसेस जारी रहेगा, पहले से कहीं ज्यादा महान!!! इस मामले पर ध्यान देने के लिए आपका धन्यवाद।”
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
इससे पहले ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उनके एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा लगाए गए बड़े टैरिफ को रद कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रेसिडेंट ने राष्ट्रीय संकटों के लिए इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करके अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया है।
कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने बड़े ट्रेड टैरिफ को सही ठहराने के लिए नेशनल इमरजेंसी के लिए बनाए गए कानून का सहारा लिया, जिसके बारे में जजों का मानना था कि यह प्रेसिडेंट की पावर से बाहर है।
ट्रम्प के प्रेस कॉन्फ्रेंस की 5 अहम बातें…
- सुप्रीम कोर्ट के रद्द किए गए टैरिफ लागू करने के लिए मुझे संसद की जरूरत नहीं है। मैं इन्हें राष्ट्रपति के मिले अधिकारों के जरिए लागू कर सकता हूं।
- सुप्रीम कोर्ट में रिफंड को लेकर कोई साफ बात नहीं कही गई है। इसलिए अमेरिकी सरकार किसी भी कंपनी को टैरिफ के रूप में वसूला गया पैसा वापस नहीं करेगी।
- जज ने बहुत ही घटिया फैसला सुनाया है। मुझे लगता है कि अब इस मामले पर अगले दो साल तक कोर्ट में मुकदमा चलेगा। हम अगले 5 साल तक कोर्ट में ही रहेंगे।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विदेशी ताकतों का असर पड़ा है। अगर टैरिफ नहीं लगाए गए, तो विदेशी देश कुछ उद्योगों में अमेरिका से आगे निकलते रहेंगे।
- टैरिफ लगाने का यह कदम कई साल पहले के राष्ट्रपतियों को उठा लेना चाहिए था। उन्होंने हमारे देश को कमजोर होने दिया और दूसरे देशों को फायदा उठाने दिया।
सेक्शन 122 के जरिए नया टैरिफ लगाएंगे ट्रम्प
सेक्शन 122 अमेरिका के एक कानून का हिस्सा है, जिसे ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 कहा जाता है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि अगर देश को अचानक व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो, तो वे तुरंत आयात पर टैरिफ लगा सकते हैं।
इसके तहत राष्ट्रपति बिना लंबी जांच प्रक्रिया के अस्थायी तौर पर टैरिफ लगा सकते हैं। आमतौर पर यह टैरिफ 150 दिनों तक लागू रह सकता है। इस दौरान सरकार स्थिति की समीक्षा करती है और आगे का फैसला लेती है।
NBC न्यूज के मुताबिक दुनिया के सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर 15% का एक जैसा ग्लोबल टैरिफ लगाने का मतलब होगा कि जिन देशों पर ज्यादा टैरिफ लगा है वह खुद घट जाएगा।
कुछ उत्पादों को छूट दी गई है, जैसे कुछ कृषि उत्पाद (बीफ, टमाटर, संतरा), महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और पैसेंजर वाहन। ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि यह टैरिफ पुराने वाले की जगह लेगा और वे अधिक पैसा कमाने की कोशिश जारी रखेंगे।
निक्सन ने 55 साल पहले लगाया था 10% ग्लोबल टैरिफ
साल 1971 में अमेरिका और दुनिया के बीच व्यापार और भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट) में भारी असंतुलन हो गया था। अमेरिका लगातार ज्यादा आयात कर रहा था और निर्यात कम कर पा रहा था, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ रहा था।
इसके बाद निक्सन ने दुनियाभर के देशों पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद यह महसूस किया गया कि भविष्य में अगर ऐसी आर्थिक आपात स्थिति आती है, तो राष्ट्रपति के पास ऐसी चीजों से निपटने के लिए कानूनी अधिकार होने चाहिए। इसी मकसद से 1974 में “ट्रेड एक्ट 1974” पारित किया गया था।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सेक्शन 122 का पहले कभी इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसलिए यह भी साफ नहीं है कि अगर इसे अदालत में चुनौती दी गई, तो अदालतें इसकी व्याख्या किस तरह करेंगी।













