नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले के बाद ईरान की टॉप लीडरशिप खत्म हो चुकी है। 28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और राजनीतिक हस्तियां दिवंगत हो गईं। हाल ही में सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी की भी मौत हो गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अब ईरान का नेतृत्व कौन कर रहा है?
मोजतबा खामेनेई को उनके पिता के उत्तराधिकारी के तौर पर ‘सुप्रीम लीडर’ घोषित किया गया है। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि वे घायल हैं और विश्लेषकों का कहना है कि उन्होंने कभी कोई कार्यकारी भूमिका नहीं निभाई है। इस वजह से भी सवाल खड़ा हुआ है कि तेहरान में ‘चेन ऑफ कमांड’ (आदेशों का क्रम) कैसा है और देश में सबसे शक्तिशाली हस्तियां कौन हैं?
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
अल जजीरा की रिपोर्ट में एक एक्सपर्ट के हवाले से बताया गया कि यह पूरी तरह से साफ नहीं है कि लारीजानी की जगह कौन लेगा? हालांकि इसके लिए तंत्र और संवैधानिक प्रक्रियाएं मौजूद हैं, फिर भी किसी खास नाम का अंदाजा लगाना मुश्किल है।
विश्लेषकों का कहना है कि हत्याओं की बढ़ती संख्या की वजह से भी अनजान चेहरे भी शक्तिशाली पदों पर काबिज हो सकते हैं या फिर पारदर्शिता में और भी कमी आ सकती है।
कौन-कौन से नामों की हो रही चर्चा?
रिपोर्ट में कुछ नामों का जिक्र किया गया है जो अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनमें संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबफ, पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सईद जलीली, पूर्व विदेश मंत्री अली अकबर सालेही, पूर्व राष्ट्रपति और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हसन रूहानी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व प्रमुख मोहसिन रजाई शामिल हैं।
अमेरिका-इजरायल ने जब 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था तब यह सोचा भी नहीं होगा कि तेहरान इस तरह से पलटवार करेगा। इस जंग को ईरान ने अपने फायदे में बदल दिया है और जमकर पैसे कमा रहा है।
अमेरिका ने खार्ग आइलैंड के पास सैन्य ठिकानों को टारगेट तो किया लेकिन वैश्विक तेल संकट के डर से तेल टर्मिनल को सीधेतौर पर निशाना नहीं बनाया। अब ईरान इसी चीज का फायदा उठा रहा है और खार्ग टर्मनिल को चालू करके रखा है। घोस्ट फ्लीट के जरिए चीन को जमकर सप्लाई कर रहा है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी और एसएंडपी ग्लोबल के मुताबिक, ईरान हर दिन 1.7 से 2 मिलियन (17 से 20 लाख) बैरल तेल एक्सपोर्ट कर रहा है। उसका करीब-करीब 90 प्रतिशत तेल अभी भी खार्ग टर्मिनल के जरिए एक्सपोर्ट हो रहा है। इतना ही नहीं रिपोर्ट तो ऐसी भी हैं कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले विदेशी जहाजों ईरान 16.5 करोड़ रुपये का टोल वसूल कर रहा है।
खाड़ी देशों का गिरा प्रोडक्शन
अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले किए। उसकी होर्मुज स्ट्रेट पर पकड़ और लगातार हमलों की वजह से सऊदी अरब, कतर, इराक, कुवैत और यूएई जैसे खाड़ी देशों की सप्लाई प्रभावित हुई है। सुरक्षित समुद्री रास्तों की कमी, बढ़ते हमले और लॉजिस्टिक में आने वाली परेशानियों की वजह से इन देशों के प्रोडक्शन में भी 70 प्रतिशत तक गिरावट आई है।













