नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल ने जब 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था तब यह सोचा भी नहीं होगा कि तेहरान इस तरह से पलटवार करेगा। इस जंग को ईरान ने अपने फायदे में बदल दिया है और जमकर पैसे कमा रहा है।
अमेरिका ने खार्ग आइलैंड के पास सैन्य ठिकानों को टारगेट तो किया लेकिन वैश्विक तेल संकट के डर से तेल टर्मिनल को सीधेतौर पर निशाना नहीं बनाया। अब ईरान इसी चीज का फायदा उठा रहा है और खार्ग टर्मनिल को चालू करके रखा है। घोस्ट फ्लीट के जरिए चीन को जमकर सप्लाई कर रहा है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी और एसएंडपी ग्लोबल के मुताबिक, ईरान हर दिन 1.7 से 2 मिलियन (17 से 20 लाख) बैरल तेल एक्सपोर्ट कर रहा है। उसका करीब-करीब 90 प्रतिशत तेल अभी भी खार्ग टर्मिनल के जरिए एक्सपोर्ट हो रहा है। इतना ही नहीं रिपोर्ट तो ऐसी भी हैं कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले विदेशी जहाजों ईरान 16.5 करोड़ रुपये का टोल वसूल कर रहा है।
खाड़ी देशों का गिरा प्रोडक्शन
अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले किए। उसकी होर्मुज स्ट्रेट पर पकड़ और लगातार हमलों की वजह से सऊदी अरब, कतर, इराक, कुवैत और यूएई जैसे खाड़ी देशों की सप्लाई प्रभावित हुई है। सुरक्षित समुद्री रास्तों की कमी, बढ़ते हमले और लॉजिस्टिक में आने वाली परेशानियों की वजह से इन देशों के प्रोडक्शन में भी 70 प्रतिशत तक गिरावट आई है।










