अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार सुबह राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका को ईरान जंग में जीत मिली है। साथ ही चेतावनी दी कि अमेरिका 2-3 हफ्ते में ईरान पर बड़ा हमला करेगा।
ट्रम्प ने आगे कहा कि ईरान की मिसाइल-ड्रोन क्षमता और नौसेना खत्म हो गई है। सैन्य ताकत काफी कमजोर हो गई है। इस सैन्य अभियान का अहम मकसद पूरा होने वाला है।
ट्रम्प ने यह भी चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान को ‘स्टोन एज, यानी पाषाणकाल’ में भेज देंगे। हालांकि उन्होंने यह दावा भी किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और नई लीडरशिप पहले से कम कट्टर है।
ट्रम्प के भाषण में कोई नई बात नहीं
ट्रम्प ने 19 मिनट का भाषण दिया। इसमें कोई नया ऐलान नहीं किया। वही बातें दुहराईं जो पिछले कुछ समय से कहते रहे हैं।
उन्होंने युद्ध की लागत और इसके लंबा खिंचने से चिंतित अमेरिकियों से कहा कि वे इस संघर्ष को सही नजरिए से देखें। उन्होंने इराक (8 साल) और वियतनाम (19 साल) जैसे पिछले अमेरिकी युद्धों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान जंग तो अभी दूसरे महीने में ही पहुंची है।
ट्रम्प ने ईरान से युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की मांग की, जबकि एक दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि उन्हें समझौते की जरूरत नहीं है।
उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट संकट को लेकर कहा कि इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी दूसरे देशों को लेनी चाहिए। हालांकि, एक दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि होर्मुज खोले बिना कोई समझौता नहीं होगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने ट्रम्प के भाषण की तारीफ की
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प के भाषण में साफ बताया गया है कि अमेरिका ईरान में क्या करना चाहता है। रुबियो ने कहा कि अमेरिका के तीन बड़े मकसद हैं- ईरान के हथियार बनाने वाले कारखानों को खत्म करना, उसकी नौसेना और वायुसेना को कमजोर या खत्म करना और ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रम्प का संदेश दुनिया के लिए साफ है। अमेरिका अपने लोगों और अपने हितों की रक्षा करेगा और ताकत के जरिए शांति बनाए रखने की कोशिश करेगा।
ब्रिटेन होर्मुज संकट पर 35 देशों की बैठक बुलाएगा, अमेरिका शामिल नहीं

ब्रिटेन 35 देशों की बैठक बुलाने जा रहा है, जिसमें अमेरिका शामिल नहीं होगा। इस बैठक का मकसद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के रास्ते तलाशना है। यह तेल और गैस की सप्लाई के लिए बहुत जरूरी समुद्री रास्ता है, जिसे ईरान ने बंद कर दिया है।
PM कीर स्टार्मर ने कहा कि इस मुद्दे पर ब्रिटेन और फ्रांस मिलकर जो कोशिशें कर रहे हैं, उनका अगला चरण गुरुवार को शुरू होगा। इस बैठक में विदेश मंत्री यवेट कूपर और कई अन्य देशों के नेता भी शामिल होंगे।
स्टार्मर ने कहा कि इस बैठक में 35 देश मिलकर यह तय करेंगे कि कौन-कौन से कूटनीतिक और राजनीतिक कदम उठाए जा सकते हैं, ताकि समुद्री रास्ते को फिर से खोला जा सके, फंसे हुए जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और जरूरी सामानों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके।
ईरान बोला- दुश्मन को पछताने पर मजबूर कर देंगे
ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने कहा है कि ईरान तब तक युद्ध नहीं रोकेगा, जब तक वह अपना हक हासिल नहीं कर लेता।
रेजाई ने कहा, “जब तक हम दुश्मन को पछताने पर मजबूर नहीं कर देते और अपने पक्के अधिकार हासिल नहीं कर लेते, तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध कब खत्म होगा, यह फैसला सुप्रीम लीडर और ईरान की जनता पर निर्भर करेगा। साथ ही उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह यह न सोचे कि वह जब जाहे इस क्षेत्र से निकल सकता है।
ट्रम्प बोले- अगले 2-3 हफ्ते ईरान पर बड़े हमले करेंगे
ट्रम्प ने कहा है कि अगले 2-3 हफ्तों में ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को जल्द हासिल कर लेगा। ट्रम्प के मुताबिक अमेरिका सभी उद्देश्यों को पूरा करने के करीब है और आने वाले हफ्तों में हमले और तेज किए जाएंगे।
ट्रम्प का दावा- ईरान ने 45 हजार प्रदर्शनकारियों की हत्या की
ट्रम्प ने ईरान पर 45 हजार प्रदर्शनकारियों की हत्या का आरोप लगाया। ट्रम्प ने दावा किया कि जनवरी में ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान 45,000 लोगों को मार दिया गया।
इससे पहले उन्होंने 28 फरवरी को यह आंकड़ा करीब 32,000 बताया था। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।
ट्रम्प ने यह भी चेतावनी दी कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका तेहरान को ‘स्टोन एज (पाषाण काल)’ में भेज देगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका धीरे-धीरे पूरी प्लानिंग के साथ ईरान की उस ताकत को खत्म कर रहा है, जिससे वह अमेरिका को खतरा पहुंचा सके या अपने देश के बाहर प्रभाव दिखा सके।
उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और मिसाइल बनाने की क्षमता को नष्ट कर दिया गया है। ट्रम्प ने कहा,

आज रात मैं यह कहते हुए खुश हूं कि हमारे ये मुख्य रणनीतिक लक्ष्य अब लगभग पूरे हो चुके हैं। और ईरान में ‘मिशन खत्म करने’ के करीब हैं। हालांकि यह काम पूरा होने में 2 से 3 हफ्ते और लग सकते हैं।
ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका के अहम रणनीतिक मकसद लगभग पूरे हो चुके हैं और वह ईरान में ‘मिशन खत्म करने’ के करीब हैं। हालांकि यह काम पूरा होने में 2 से 3 हफ्ते और लग सकते हैं।
ट्रम्प ने एक बार फिर से सहयोगी देशों की आलोचना की, क्योंकि उन्होंने ईरान के खिलाफ इस लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया। ट्रम्प ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने की जिम्मेदारी अब उन्हीं देशों को लेनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपनी तेल जरूरतों के लिए इस रास्ते पर निर्भर नहीं है, इसलिए वह इसे खोलने की जिम्मेदारी नहीं लेगा।
ट्रम्प ने अपने सहयोगी देशों (खासकर इजराइल और खाड़ी देशों) का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, “उन्होंने बहुत अच्छा साथ दिया है, और हम उन्हें किसी भी हालत में नुकसान नहीं होने देंगे या असफल नहीं होने देंगे।”
ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान ने इन देशों पर कई बार हमले किए हैं, और यही वजह है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए।
ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत से ही यह कसम खाई थी कि वह ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।
ट्रम्प ने कहा, “अगर ऐसे आतंकवादी परमाणु हथियार हासिल कर लेते, तो यह बड़ा खतरा होता। दुनिया की सबसे हिंसक और दबंग सरकार परमाणु सुरक्षा के पीछे छिपकर आतंक, दबाव, कब्जा और सामूहिक हत्या जैसे अभियान चला सकती थी।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं कभी ऐसा नहीं होने दूंगा, और हमारे पिछले किसी भी राष्ट्रपति को भी ऐसा नहीं होने देना चाहिए था। यह स्थिति 47 साल से चल रही है और इसे बहुत पहले ही संभाल लिया जाना चाहिए था।”
ट्रम्प ने कहा कि ईरान के खिलाफ उनकी सख्त नीति ने मिडिल ईस्ट और इजराइल को तबाही से बचाया। इस नीति में ईरान के साथ उनके पहले कार्यकाल में 2015 का परमाणु समझौता खत्म करना भी शामिल है।
ट्रम्प के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय हुआ यह समझौता अगर यह जारी रहता, तो ईरान के पास बड़े पैमाने पर परमाणु हथियारों का जखीरा हो जाता।
ट्रम्प ने दावा किया, “अगर यह समझौता चलता रहता, तो ईरान के पास कई साल पहले ही परमाणु हथियार आ जाते और वह उनका इस्तेमाल भी कर चुका होता। दुनिया पूरी तरह अलग होती। आज मिडिल ईस्ट और इजराइल शायद मौजूद ही नहीं होते।”
ट्रम्प ने जनवरी में वेनेजुएला में हुए ऑपरेशन की भी तारीफ की, जिसमें निकोलस मादुरो को हटाया गया था। उन्होंने कहा, “हम वेनेजुएला के साथ काम कर रहे हैं… वे हमारे सच्चे साझेदार हैं और हमारे संबंध बहुत अच्छे चल रहे हैं।”
ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान की नौसेना अब खत्म हो चुकी है और देश की सैन्य ताकत काफी कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा, “उनकी मिसाइल और ड्रोन दागने की क्षमता अब काफी हद तक घट गई है। उनके हथियार बनाने वाले कारखाने और रॉकेट लॉन्चर तबाह किए जा रहे हैं और अब बहुत कम बचे हैं।”
ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिकी सेना ने ईरान पर जबरदस्त हमले किए हैं। उन्होंने कहा, “अभी एक महीना ही हुआ है, जब अमेरिका की सेना ने ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ शुरू किया था, जिसका निशाना दुनिया का नंबर-1 आतंकी समर्थन करने वाला देश ईरान है। इन चार हफ्तों में ईरान ने युद्ध के मैदान में पूरी तरह से दबदबा बनाने वाली जीत हासिल की है।”
ट्रम्प ने अपने संबोधन की शुरुआत नासा की टीम को आर्टेमिस-II के सफल लॉन्च के लिए बधाई देकर की। उन्होंने चांद की यात्रा पर जा रहे क्रू की भी तारीफ की।
ट्रम्प ने कल यह भी कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए किसी समझौते (डील) की जरूरत नहीं है। अमेरिका यह युद्ध 2 से 3 हफ्तों में खत्म कर सकता है।
उन्होंने कहा था- ईरान को कोई डील करने की जरूरत नहीं है। जब हमें लगेगा कि वे इतने कमजोर हो गए हैं कि कई सालों तक परमाणु हथियार नहीं बना सकते, तब हम वहां से निकल जाएंगे। डील हो या न हो, अब यह जरूरी नहीं है।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान के पास जो यूरेनियम बचा है, उससे उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि वह जमीन के अंदर है और आसानी से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अमेरिका पहले ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी नुकसान पहुंचा चुका है।













