नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी से शुरू हुई जंग में फिलहाल पॉज बटन लग चुका है। अमेरिका ने दो हफ्ते के लिए युद्धविराम का ऐलान किया है। जैसे ही ये खबर आई तो लगा कि मध्य एशिया में अब तनाव कम हो सकता है और क्षेत्र में शांति के आसार हैं। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं, लेबनान पर इजरायल ने हमले शुरू कर दिए, जिससे सीजफायर के मजबूती से आगे बढ़ने को लेकर आशंकाएं उठने लगी। पाकिस्तान में शांति वार्ता पर चर्चा में शामिल होने से ईरान ने इनकार कर दिया। हालांकि, ईरान-अमेरिका में युद्ध विराम पर फैसले के बाद भारत सरकार और भी एक्शन मोड पर आ गई। दिल्ली ने खाड़ी देशों से संपर्क बढ़ाया है। मोदी सरकार के तीन धुरंधर अमेरिका, कुवैत और यूएई को फोकस करने पर जुट गए।
मिडिल ईस्ट पर इंडिया का फोकस
ईरान और अमेरिका में सीजफायर के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर जल्द ही यूएई का दौरा करने वाले हैं। अभी वो मॉरिशस के दौरे पर हैं। जयशंकर शनिवार को UAE पहुंचेंगे। उनका मकसद भारत के इस अहम खाड़ी सहयोगी देश के साथ अपनी ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को और गहरा करना है। ये दोनों ही देश भारत के लिए ऊर्जा के बहुत बड़े सप्लायर हैं। UAE भारत को कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) देने वाला चौथा सबसे बड़ा देश है। वहीं LNG और LPG के मामले में यह दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर है।
जयशंकर जा रहे यूएई, हरदीप पुरी कतर में
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी कतर पहुंचे हैं। दो दिवसीय दौरे पर दोहा पहुंचे पुरी का वहां भव्य स्वागत किया गया। कतर भारत को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) देने वाला सबसे बड़ा देश है, जहां से भारत अपनी कुल LNG जरूरत का 40 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सा आयात करता है।
हरदीप पुरी का कतर दौरा क्यों है अहम
- 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से खाड़ी देशों का दौरा करने वाले हरदीप पुरी पहले भारतीय मंत्री हैं।
- दोहा पहुंचने पर कतर में भारत के राजदूत और कतर की सरकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस कंपनी ‘QatarEnergy’ के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
- यह दौरा इसलिए भी अहम है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करना चाहता है और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से जहाजों की आवाजाही भी जल्द ही फिर से शुरू होने वाली है।
- हालांकि, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि हरदीप पुरी के भारत लौटने के बाद ही इस दौरे पर हुई बातचीत की पूरी जानकारी मिल पाएगी।
- भारत अपनी जरूरत की लगभग 50 फीसदी LNG और लगभग 60 फीसदी LPG आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा दोहा से ही आता है।
- इस संघर्ष की वजह से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के रास्ते होने वाली आपूर्ति बाधित हो गई थी, और यह रास्ता लगभग एक महीने तक बंद रहा था।
कतर है भारत का प्रमुख LNG सप्लायर
भारत ने LNG आपूर्ति के लिए ‘QatarEnergy’ के साथ कई बड़े और लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट्स किए हुए हैं। इनमें ‘गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन’ के साथ 17 साल का एक समझौता शामिल है, जिसके तहत 2026 से हर साल 10 लाख टन (1 मिलियन टन) LNG की आपूर्ति की जाएगी। इसके अलावा, ‘Petronet LNG’ के साथ भी 20 साल के लिए एक समझौता बढ़ाया गया है, जिसके तहत 2028 से 2048 तक हर साल 75 लाख टन (7.5 MTPA) LNG की आपूर्ति होगी।
अमेरिका से भी दूरी नहीं चाहता भारत
भारत ने केवल खाड़ी देशों की ओर ही फोकस नहीं बढ़ाया बल्कि अमेरिका में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो के साथ एक अहम मीटिंग की। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई डायरेक्टर काश पटेल समेत सीनियर अमेरिकी अधिकारियों के साथ अलग-अलग बातचीत की। इस बातचीत का मुख्य मुद्दा रक्षा, आतंकवाद का विरोध और क्षेत्रीय सुरक्षा रहा।
विक्रम मिसरी यूएस दौरे पर बेहद एक्टिव
भारतीय दूतावास ने कहा कि अपने मौजूदा दौरे के दौरान विक्रम मिसरी ने यूएस विदेश सचिव मार्को रुबियो से मुलाकात की। उन्होंने आगे कहा कि हम इन जरूरी क्षेत्रों में अपने जुड़ाव को और गहरा करने और भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए और भी बहुत कुछ करने की उम्मीद करते हैं।
सर्जियो गोर ने भारत से रिश्तों पर कही बड़ी बात
- भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बातचीत को एक प्रोडक्टिव मीटिंग बताया।
- उन्होंने कहा कि यह हमारे द्विपक्षीय संबंध, खासकर व्यापार, जरूरी मिनरल्स, रक्षा और क्वाड पर केंद्रित थी।
- सर्जियो गोर ने कहा कि विदेश सचिव रुबियो अगले महीने भारत आने का इंतजार कर रहे हैं। यह एक संभावित उच्च स्तरीय दौरे का संकेत देता है।
- विक्रम मिसरी और एफबीआई डायरेक्टर काश पटेल की मुलाकात सुरक्षा पर केंद्रित थी।
- भारतीय दूतावास ने कहा कि दोनों ने आतंकवाद, सुनियोजित अपराध और नारकोटिक्स से निपटने में भारत-अमेरिका के मजबूत सहयोग पर विचारों का अच्छा लेन-देन किया।
- विक्रम मिसरी ने राजनीतिक मामलों के अवर सचिव एलिसन हुकर से भी मुलाकात की, जहां दोनों पक्षों ने पिछले साल दिसंबर में हुए फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन्स के बाद से भारत-अमेरिका द्विपक्षीय एजेंडे का जायजा लिया।











