‘हिज्बुल्लाह का जब तक अस्तित्व है, तब तक लेबनान का भविष्य नहीं’

बेरूत: इजरायल के हिज्बुल्लाह को निशाना बनाकर किए गये हमले में लेबनान में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। इजरायल ने कहा है कि ईरान युद्धविराम लेबनान में लागू नहीं है। जबकि ईरान ने लेबनान को शामिल नहीं करने पर पाकिस्तान में शांति वार्ता स्थगित करने की धमकी दी है। लेबनान के पत्रकार खालिद जीन एडिन ने लेबनान को लेकर एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने बताया है कि कैसे ईरान की मदद से हिज्बुल्लाह लेबनान की पहचान को खत्म कर रहा है। उन्होंने लिखा है कि ‘हमें यह पता है कि इजरायल हमारे खिलाफ यह जंग तब तक नहीं रोकेगा जब तक वह लेबनान के अंदर तक अपने सभी मकसद पूरे नहीं कर लेता।’

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उन्होंने लिखा है कि इजरायल का मकसद हिज्बुल्लाह को निहत्था करना है। लेबनानी पत्रकार ने अपने लेख में बताया है ‘हिज्बुल्लाह को ईरान ने ही बनाया है और उसे आर्थिक मदद दी है। हिज्बुल्लाह के समर्थकों और लेबनान के दूसरे गुटों के बीच तनाव बढ़ाकर इजरायल ऐसा माहौल बनाना चाहता है जिसमें लेबनान की तबाही के लिए हिज्बुल्लाह को ही जिम्मेदार ठहराया जाए।’

लेबनान के पत्रकार ने हिज्बुल्लाह के बारे में क्या बताया?

  • हिज्बुल्लाह किस हद तक लेबनान सरकार के फैसलों का पालन करता है अपने हथियार सौंप देता है और फिर से देश की मुख्यधारा में लौट आता है।
  • लेकिन अगर हिज्बुल्लाह लेबनान की संप्रभुता और वहां के लोगों के खिलाफ अड़ा रहता है तो इससे लेबनान की पहचान का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
  • इस जंग के बारे में जानकारों का कहना है कि शायद ये पश्चिम एशिया की आखिरी जंग होगी और ये जंग इस पूरे इलाके का चेहरा पूरी तरह से बदल देगी।
  • इस सोचे-समझे नए परिदृश्य में इजरायल के प्रति दुश्मनी की कोई जगह नहीं होगी और तेल अवीव के साथ शांति का दायरा बढ़ेगा।
  • इजरायल भी इस इलाके पर अपना दबदबा कायम करने की कोशिश करेगा जो कुछ हद तक ‘पैक्स जूडिया’ यानि यहूदी शांति जैसा होगा।

उन्होंने आगे लिखा है कि देखा जाए तो ईरान घाटे में है। इसकी वजह है वॉशिंगटन-तेल अवीव और तेहरान की ताकतों के बीच का भारी फर्क। यह सच है कि ईरान ने खाड़ी के अरब देशों को नुकसान पहुंचाया है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंधक बनाकर रखा है। लेकिन यह रणनीति ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकती।

दुनिया बदल रही है। इस बात की पूरी संभावना है कि जो नई व्यवस्था उभरकर सामने आएगी वह अमेरिका-चीन-रूस की तिकड़ी पर आधारित होगी जिसमें पश्चिम एशिया, इजरायल के लिए अमेरिका के निर्देशों के तहत काम करेगा। जहां तक फिलिस्तीन का सवाल है तो इस बात की संभावना है कि वह ‘ग्रेटर इज़रायल’ में ही समा जाएगा जो आगे चलकर ताकत के दूसरे केंद्रों के साथ गठबंधन कर लेगा।

Israel Intensifies Attacks Across Lebanon Despite US-Iran Ceasefire Deal.लेबनान में इजरायल के अलग अलग हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत।

 

‘लेबनान को तबाह कर सकता है ये युद्ध’

लेबनानी पत्रकार ने लिखा है कि

इन्हीं विचारों के आधार पर इजरायल ने लेबनान को ईरान युद्ध का एक और मोर्चा बनाने का फैसला किया। हिज्बुल्लाह की मौजूदगी को देखते हुए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं थी। लेकिन मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह युद्ध लेबनान को पूरी तरह तबाह कर सकता है। इजराइल अगर यहां पर बड़े पैमाने पर जमीनी अभियान शुरू करता है तो लिटानी नदी तक लेबनानी क्षेत्र पर संभावित दीर्घकालिक कब्जे की स्थिति बन सकती है।
जबकि लेबनान बेतहाशा मुद्रास्फीति और भ्रष्टाचार से कमजोर हो चुका है। मंत्रालयों, सरकारी विभागों और अदालतों में भ्रष्टाचार भरा हुआ है। 15 साल लंबे लेबनानी गृहयुद्ध को समाप्त करने वाली सत्ता-साझाकरण व्यवस्थाओं, विशेष रूप से 1989 के ताइफ समझौते ने इन सभी स्थितियों को और भी बदतर बना दिया है।
इन व्यवस्थाओं ने सांप्रदायिक विभाजन को और गहरा कर दिया है जिससे राज्य और उसकी संस्थाएं खोखली हो गई हैं। इसका मतलब यह है कि हिज्बुल्लाह एक राजनीतिक दल में परिवर्तित हो गया है जबकि वह एक मिलिशिया बना हुआ है।
खालिद जीन एडिन, लेबनान के पत्रकार

खालिद जीन एडिन के मुताबिक हिज्बुल्लाह आज भी ईरान की सेवा करता है और हिज्बुल्लाह की वजह से इजरायल ने लेबनान पर हमला किया है। मैं इसे सीधे शब्दों में कहूं तो लेबनान हिज्बुल्लाह के ईरानी गठबंधन की कीमत चुका रहा है। इजरायल लेबनानी क्षेत्रों पर नियंत्रण करने के अपनी कोशिशों से पीछे नहीं हटेगा ताकि हिज्बुल्लाह को निरस्त्र किया जा सके। उसकी क्षमताओं को फिर से मजबूत होने से रोका जा सके और उसे इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा बनने से रोका जा सके। इसका मतलब हिज़्बुल्लाह-ईरान की आपूर्ति लाइनों को तोड़ना भी है। ध्यान दें कि इजराइल ने सीरिया में सत्ता परिवर्तन में कैसे मदद की है जो ईरान के लिए धन, हथियार और लामबंदी का जीवन रेखा था।’

‘जब तक हिज़्बुल्लाह का अस्तित्व है लेबनान का भविष्य खतरे में’

खालिद जीन एडिन ने साफ शब्दों में लिखा है कि जब तक हिज्बुल्लाह का अस्तित्व है लेबनान का भविष्य खतरे में है। हिज्बुल्लाह ऐसा नहीं कर सकता कि वो देश की संसद में भी बैठे और हखियारबंद लड़ाकों के साथ मिलिशिया भी चलाए। उसके लिए हथियार छोड़ना ज्यादा अच्छा विकल्प है। उसे एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर काम करना चाहिए। उसे मनी लॉन्ड्रिंग बंद करते हुए ईरानी प्रोपेगेंडा बंद करते हुए सड़कों पर भी भीड़ जुटाना बंद करना चाहिए। जब तक हिज्बुल्लाह पूरी तरह से हथियार छोड़कर एक राजनीतिक दल नहीं बनता और लेबनान का नहीं हो जाता तब तक लेबनान का भविष्य नहीं है।

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