सिविल सेवा अधिकारी रोशन जैकब उन अधिकारियों में गिनी जाती हैं, जिन्होंने अपनी प्रशासनिक कार्यशैली से अलग पहचान बनाई। वह 2004 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी हैं। रोशन ने इंग्लिश में हायर एजुकेशन हासिल की। इसके बाद PhD की और उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से अधिकारी की कुर्सी संभाली थी।
अभी जिस तरह IAS तुकाराम मुंढे अपनी सख्त और सक्रिय कार्यशैली के लिए चर्चा में है, उसी तरह रोशन जैकब भी अपने प्रशासनिक फैसलों और जनता से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता के कारण सुर्खियों में रही हैं। उनकी सक्सेस स्टोरी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की नहीं बल्कि अपनी अलग पहचान बनाने की मिसाल है, जो लाखों लोगों को आगे बढ़ने का हौसला देती है।
डाॅ. रोशन जैकब 2004 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी हैं। उनका जन्म केरल के तिरुवनंदपुरम में हुआ था और उनकी शुरुआती पढ़ाई भी वहीं हुई। उन्होंने इंग्लिश सब्जेक्ट में BA, MA और PhD की पढ़ाई की है। इसलिए उन्हें आईएएस अधिकारी के साथ-साथ डाॅक्टर रोशन जैकब के तौर पर भी जाना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से अधिकारी की कुर्सी हासिल की और 2004 में अफसर बनी थीं। हालांकि, उनकी ऑल इंडिया रैंक का रिकाॅर्ड उपलब्ध नहीं है।
केरल में जन्म लेकर उत्तर प्रदेश में काम करना उनके लिए आसान नहीं था। रोशन जैकब ने एक इंटरव्यू में बताया था कि यूपी में अधिकारी के तौर पर काम करना चुनौतीपूर्ण जरूर है लेकिन इससे सीखने और आगे बढ़ने के कई अवसर मिलते हैं। शुरुआत में उन्हें हिंदी बोलने में परेशानी होती थी। खनन विभाग में निदेशक रहते हुए उनके सामने कानूनी खनन को बढ़ावा देने के साथ अवैध खनन रोकने की भी बड़ी जिम्मेदारी थी और वह हमेशा आगे बढ़ती रहीं।
आईएएस अधिकारी बनने के बाद रोशन जैकब की पहली पोस्टिंग बरेली में संयुक्त मजिस्ट्रेट के तौर पर हुई थी। इसके बाद उन्होंने कानपुर नगर, मेरठ और अन्य कई जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह बस्ती, गोंड़ा, रायबरेली, बाराबंकी और बुलंदशहर जैसी जगहों पर जिलाधिकारी भी रहीं। 2017 में वह उत्तर प्रदेश के खनन विभाग की पहली महिला निदेशक बनीं।
रोशन जैकब ने लखनऊ मंडल की मंडलायुक्त के तौर पर लंबे समय तक जिम्मेदारी संभाली। 2018 में उन्हें खनन विभाग की विशेष सचिव एवं निदेशक के साथ लखनऊ मंडलायुक्त का अतिरिक्त प्रभार मिला था। बाद में वह इसी पद पर रहीं और सितंबर 2025 में उनका तबादला खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में सचिव और आयुक्त के पद पर किया गया। कोविड महामारी के दौरान वह लखनऊ में अपनी सक्रिय प्रशासनिक भूमिका को लेकर चर्चा में रही थीं।
आईएएस अधिकारी रोशन जैकब और IAS तुकाराम मुंढे अलग-अलग कैडर के अधिकारी हैं लेकिन दोनों पहचान उनकी सक्रिय प्रशासनिक कार्यशैली से जुड़ी है। तुकारा मुंढे 2005 बैच के अधिकरी हैं और कड़े फैसलों के लिए अभी चर्चा में हैं। वहीं, रोशन जैकब 2004 कैडर की IAS अधिकारी हैं और जनसमस्याओं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में सक्रियता की वजह से अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं।
दोनों अधिकारियों की अलग पहचान यूपीएससी उम्मीदवारों को आगे बढ़ने और सही दिशा में काम करने की प्रेरणा देती है।










