नई दिल्ली: सिंधु जल संधि बंद होने के चलते एक साल से कुछ ज्यादा समय से पाकिस्तान का गला सूख रहा है। वह दुनिया भर में इसके लिए भारत के खिलाफ छाती पीट रहा है। दूसरी तरफ भारत ने दुनिया को यह साबित कर दिया है कि IWT किस तरह से एकतरफा पाकिस्तान को फायदा दे रहा थी। भारत अपनी धरती और अपने लोगों की कीमत पर एक दुश्मन देश के लिए 65 साल तक अपना प्राकृतिक संसाधन बहाता रहा। सिर्फ एक साल में यह परिवर्तन हो गया कि लद्दाख सिंधु नदी में बेकार जाने वाले जल से अपनी खेतों की सिंचाई कर रहा है।
सिंधु जल संधि रुकी, लद्दाख की किस्मत चमकी
लद्दाख में अबतक जो ग्लेशियर का पानी पहुंचता था, उनमें से रोजाना करीब 9 करोड़ लीटर पानी सिंधु नदी में गिरकर यूं ही पाकिस्तान की तरफ बेकार चला जाता था। पाकिस्तान आज तक कभी सिंधु जल का ईमानदार इस्तेमाल नहीं कर पाया और उसे बर्बाद होने दिया। लेकिन,सिंधु जल समझौता पर ब्रेक लगने के बाद लद्दाख प्रशासन ने अपने प्रयासों से यह स्थिति बदल दी और अब प्रतिदिन ग्लेशियर का 50 लाख लीटर पानी ही सिंधु में बेकार बह रहा है।
लद्दाख को जल संकट के क्षेत्र में बड़ी सफलता
लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर विनय कुमार सक्सेना ने अगस्त, 2026 में दो दिन उस इलाके का दौरा किया है। हमारे सहयोगी अखबार ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक 16 अगस्त की अपने दूसरे दिन की यात्रा के बाद सक्सेना ने कहा चुचोट गांव के लोगों की अपील के आधार पर लद्दाख प्रशासन ने स्टोक ग्लेशियर का करीब 2 करोड़ लीटर पानी उस सूखे गांव की नहर में डायवर्ट करने में सफलता पाई है। उन्होंने इसे कृषि की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जल संकट से उबरने की ओर एक बड़ा कदम बताया है।
शशि थरूर ने लद्दाख प्रशासन की खूब वाहवाही की
लद्दाख में खेती और किसानों के लिए हुए इतने बड़े काम की सराहना करने वालों में केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर सबसे आगे हैं। उन्होंने सियासत से ऊपर उठकर लद्दाख एलजी के एक्स पोस्ट पर इसकी तारीफ करते हुए उन्हें खूब शाबासी दी है।
सिंधु जल और ग्लेशियर के पानी ने कैसे बदली लद्दाख की तस्वीर
- शशि थरूर की अगुवाई में एक संसदीय समिति ने हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का दौरा किया था।
- लद्दाख ने यह कामयाबी स्टोक नाला से सफलतापूर्व दो डायवर्जन बनाकर हासिल की है।
- इसका लाभ ये हुआ है कि स्टॉक कांगरी ग्लेशियर का जो 9 करोड़ लीटर पानी बेकार सिंधु नदी के माध्यम से पाकिस्तान के निचले इलाकों की ओर बर्बादी की ओर बहता चला जाता था, वह अब इगू-फे सिंचाई नहर की ओर मोड़ा जा रहा है।
- इसमें कोई बड़ी लागत भी नहीं लगी है और सिर्फ मिट्टी का सामान्य काम करना पड़ा है और लद्दाख दुनिया में बड़े बदलाव का उदाहरण बन चुका है।
- आज की तारीख में स्टोक नाले के 36 क्यूसेक पानी में से 25 क्यूसेक पानी नहर में जा रहा है, जिससे इसकी सप्लाई 50 क्यूसेक से बढ़कर लगभग 75 क्यूसेक हो चुकी है।
- अबतक सिंधु नदी में बहकर पाकिस्तान में जाकर बेकार हो जाने वाला पानी आज 12 गांवों के लिए जीवनदायनी बन रहा है और यहां की बंजर पड़ी 1,000 एकड़ से अधिक जमीन में बहुत जल्द हरियाली नजर आने वाली है।
- यूं समझ लें कि सिंधु जल संधि की वजह से दशकों तक 43 किलो मीटर लंबी जो नहर सूखा नाला बनकर रह गया था, अब वहां कलकल धारा का संचार हो रहा है।










