‘चवन्‍नी’ बताने पर भड़कीं मायावती, बोलीं- अखिलेश जाट समाज से माफी मांगें

लखनऊ: उत्‍तर प्रदेश में इन दिनों ‘ चवन्‍नी पॉलिटक्‍स ‘ हो रही है। कुछ दिन पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बगैर नाम लिए अपने पूर्व सहयोगी रालोद के अध्‍यक्ष जयंत चौधरी पर बयान दिया था। उन्‍होंने कहा था कि हमने उनको चवन्‍नी से रुपया बना दिया, फिर भी वे हमें छोड़कर चले गए। अखिलेश के इस बयान पर पहले रालोद ने कड़ा पलटवार किया। अब बसपा सु्प्रीमो मायावती ने भी अखिलेश यादव से इस मुद्दे पर पूरे जाट समाज से माफी मांगने की मांग की है।

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मायावती ने शनिवार सुबह अपने X अकाउंट पर इस मामले को लेकर 6 पाइंट में लंबा-चौड़ा पोस्‍ट लिखा। उन्‍होंने लिखा है- जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल व उस पार्टी के नेता केन्द्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना कि ‘हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’, यह कहना पूर्णतः अमर्यादित, अशोभनीय व अति-शर्मनाक है तथा इस प्रकार की अहंकारी व अलोकतांत्रिक बयानबाजी के लिये उन्हें उस पार्टी से व उनके नेता से ही नहीं बल्कि स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान करने हेतु पूरे जाट समाज से भी अविलम्ब माफी मांगी चाहिये तो यह उचित होगा।

‘सहयोगियों के लिए सपा हमेशा अप्रिय’

बसपा प्रमुख ने आगे लिखा है- वैसे देश की राजनीति में सपा का चाल, चरित्र व चेहरा अपने विरोधी पार्टियों के लिये ही नहीं बल्कि अपने सहयोगियों के लिये भी हमेशा से राजनीतिक संकीर्णता व जातिवादी द्वेष आदि से ग्रसित ज़्यादातर अप्रिय और अविश्वसनीय ही रहा है, जिस कारण इसका राजनीतिक एवं चुनावी लाभ भी अक्सर मौकों पर भाजपा ही उठाती रही है और सेक्युलर ताकतें कमजोर होती रहीं हैं।

गेस्‍ट हाउस कांड फिर किया याद

मायावती ने एक बार फिर गेस्‍ट हाउस कांड को याद किया। उन्‍होंने आगे लिखा- इस पार्टी के इसी प्रकार के अति-अहंकारी स्वाभाव के कारण पहले 1993 में यूपी में मुलायम सिंह यादव के साथ सपा व बसपा का बना गठबन्धन जल्दी ही टूट गया, जिसके फलस्वरूप दिनांक 2 जून 1995 को मेरी हत्या करने के षडयन्त्र के तहत् मेरे विरुद्ध कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाऊस कांड हुआ।

अखिलेश संग गठबंधन पर कही ये बात

बसपा चीफ के मुताबिक, आगे चलकर इनके बेटे अखिलेश यादव द्वारा पिता की तरह पुरानी गलतियों को फिर से ना दोहराने का आश्वासन देते हुये, लोकसभा का चुनावी गठबन्धन हुआ। चुनाव का नतीजा इनके अनुरूप ना आने की वजह से कुछ समय के बाद ही बीएसपी के प्रति इन्‍होंने अहंकारी व स्वार्थी रवैया अपना दिया। इस कारण फिर यह गठबन्धन भी टूट गया। बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कारवां वाली पार्टी बीएसपी व उसकी नेतृत्व ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सर्वसमाज हितैषी अम्बेडकरवादी नीतियों व सिद्धान्तों से कदापि विमुख नहीं हो सकती है।

सपा की गिरगिट से की तुलना

मायावती ने सपा पर लगातार प्रहार करना जारी रखा। उन्‍होंने लिखा- यह पार्टी (सपा) गठबन्धन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है और अपना काम निकलते ही फिर यह पार्टी गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है तथा दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी खूब इस्तेमाल करती रहती है, जो कि यह सपा का पुराना रवैया है। ऐसे में सर्वसमाज के लोग सपा की संकीर्ण व जातिवादी राजनीति से जरूर सावधान रहें।

पीडीए पर कसा तंज

बसपा सुप्रीमो ने पीडीए के नारे पर भी तंज कसा। उन्‍होंने लिखा है- यह बात भी जग-जाहिर है कि सपा मुखिया अखिलेश यादव अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए अपने PDA में से P को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी P को पण्डितों का हितकारी बता देते हैं, जबकि इनके बारे में सच्चाई तो यह है कि वे पिछड़े वर्गों में अपनी खुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों तथा अपरकास्ट समाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज के भी क़तई हितैषी नहीं रहे हैं।

‘सपा सरकारों में ब्राह्मण समाज का शोषण हुआ’

अपने पोस्‍ट में अंत में मायावती ने लिखा है- इतना ही नहीं बल्कि इस पार्टी (सपा) की सभी रही सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अक़लियतों, अपरकास्ट समाज में से विशेषकर ब्राह्मण समाज का भी काफी शोषण व उत्पीड़न आदि किया गया है। ना ही इनके हितों में कोई भी सकारात्मक कदम उठाये गये हैं, बल्कि इनकी सरकार में वास्तव में केवल गुडों, बदमाशों, माफियाओं और अन्य अराजक तत्वों का ही भला हुआ है और साथ ही इनकी सरकार में दिन-छिपने के बाद हमारी बहिन-बेटियां भी घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं। ऐसे में सर्वसमाज के लोग यूपी आगामी विधानसभा आमचुनाव में इस पार्टी (सपा) को सत्ता में कतई भी ना आन दें, जो यह उनके हित में होगा।

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