पाकिस्तान ने नही दिया वीजा, पर्यटन कारोबारी खुश, कारोबार बढ़ने की जगी उम्मीद
कुशीनगर। लॉकडाउन खुलने के बाद बुधवार को कुशीनगर पहुंचने वाले पहले विदेशी पर्यटक का पर्यटन कारोबारियों ने सम्मान किया। जर्मनी के पदयात्री थॉमस श्रावस्ती से पैदल चलकर यहां आए। वह 2012 से जर्मनी के उत्तरी हैम्बर्ग से विश्व पद यात्रा पर निकले हैं। वह अब तक 16 देशों की पैदल यात्रा कर चुके हैं।
उनकी यात्रा का उदेद्श्य विश्व में शांति की कामना है। पूरे लॉकडाउन के दौरान थामस श्रावस्ती में रहे। अरब यूरोप व दक्षिण एशियाई देशों के बाद थामस अगस्त 2017 से भारत भ्रमण पर हैं। छह माह में वह यहां की यात्रा पूरी करने के बाद म्यांमार चले जाएंगे। साल 2021 में उनकी यात्रा का समापन जर्मनी पहुंचकर हो जाएगा।
पत्रकारों से बातचीत में थॉमस ने यात्रा और व्यक्तिगत जीवन के साथ देशों के अनुभव साझा किए। बताया कि वह मूलतः ईसाई हैं किंतु उन्होंने लंबे समय इस्लामिक जीवन भी जिया है। इस्लाम को समझने के लिए मक्का की यात्रा की। बताया कि हिन्दू धर्म को जानने के बाद इसमें उनकी आस्था बढ़ी है। यह दुनिया का प्राचीनतम धर्म है, इसकी स्थापना किसी व्यक्ति विशेष ने नही की है।
हिन्दू जीवन शैली में विविधिता होने के बावजूद वैज्ञानिकता है। जो जीवन जीने की राह आसान करती है। बौद्ध धर्म के विपश्यना को भी थॉमस ने पूर्ण वैज्ञानिक बताया। कहा कि विपश्यना मनुष्यता का सृजन करती है। थॉमस बोले कि विश्व के सभी धर्म आपसी भाई चारा और शांति का संदेश देते हैं। बुद्ध का धर्म केवल मानवता व शांति की बात करने के कारण खास हो जाता है। बुद्ध के मार्ग पर चलकर विश्व में आसानी से शांति की स्थापना हो सकती है। जिसकी महती आवश्यकता है।
पाकिस्तान ने ठुकराई वीजा की मांग
थॉमस के योजना पाकिस्तान होते हुए भारत आने की थी। पाकिस्तान से वीजा की डिमांड करते वक्त थॉमस आफगानिस्तान में थे। परन्तु लंबे समय तक कि प्रतीक्षा व यात्रा का उद्देश्य जानकर भी पाकिस्तान ने वीजा नही दिया तो थॉमस फ्लाइट से अफगानिस्तान से भारत चले आए। पर्यटन कारोबार के लिए शुभ संकेत: कुशीनगर पहुंचने पर थॉमस का बढ़चढ़कर स्वागत करने वाले पर्यटन कारोबारी वीरेंद्र नाथ त्रिपाठी, टीके रॉय, अनुपम पाठक, अभिनव कुमार त्रिपाठी ने इसे शुभ संकेत माना है।
वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि लाकडाउन खुलने के बाद जर्मनी के पर्यटक के आने से अच्छा सन्देश जाएगा। तिवारी ने बताया कि दुनिया भर के मनुष्यों में घुमक्कड़ी स्वभाव में है। आपदा का प्रभाव सबसे पहले पर्यटन व्यवसाय पर पड़ता है। परंतु कारोबार फिर खड़ा भी होता है। इस बार भी ऐसा ही होगा।
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