अगले 10 दिनों में मिडिल ईस्ट में होगा कुछ बड़ा, ट्रंप की चेतावनी; ‘बुरे नतीजे होंगे’

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा बयान दिया है। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में उन्होंने कहा कि ईरान को एक सार्थक समझौता करना होगा, नहीं तो हालात खराब हो सकते हैं। ट्रंप ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, “अगले लगभग 10 दिनों में आपको पता चल जाएगा।”

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ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौता करना हमेशा आसान नहीं रहा है। उन्होंने साफ कहा कि अगर कोई मजबूत और सार्थक डील नहीं होती है, तो बुरी चीजें हो सकती हैं। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की मध्यस्थता में अप्रत्यक्ष बातचीत फिर से शुरू हुई है। इससे पहले ट्रंप ने ईरान पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी।

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हमले की अटकलें तेज

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह भी संकेत दिया था कि अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। उन्होंने ब्रिटेन को चेतावनी दी कि वह हिंद महासागर के चागोस द्वीपसमूह पर अपनी संप्रभुता न छोड़े। ट्रंप ने कहा कि वहां स्थित डिएगो गार्सिया एयरबेस ईरान के खिलाफ जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल की जा सकती है।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस को जानकारी दी गई है कि सेना इस सप्ताहांत तक हमले के लिए तैयार है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि ट्रंप अंतिम फैसला लेंगे या नहीं। एक सूत्र के अनुसार, ट्रंप इस मुद्दे पर गहराई से विचार कर रहे हैं और अपने सलाहकारों से राय ले रहे हैं।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप को ऐसे सैन्य विकल्प बताए गए हैं, जिनका मकसद अधिकतम नुकसान पहुंचाना है। इनमें ईरान के कई राजनीतिक और सैन्य नेताओं को निशाना बनाने और सरकार को गिराने की योजना भी शामिल बताई गई है।

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मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी भी कीमत पर अमेरिका के दबाव के आगे नहीं झुकेगा। इस बीच, अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है। वहां इस समय 13 अमेरिकी युद्धपोत मौजूद हैं, जिनमें विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन, नौ विध्वंसक जहाज और तीन लिटोरल कॉम्बैट शिप शामिल हैं।

दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड भी अटलांटिक महासागर से मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ तीन विध्वंसक जहाज भी हैं। आमतौर पर इस क्षेत्र में एक समय में दो अमेरिकी विमानवाहक पोत कम ही तैनात होते हैं।

हवाई गतिविधियां हुईं तेज

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान भी भेजे हैं। इनमें एफ-22 रैप्टर स्टील्थ फाइटर जेट, एफ-15 और एफ-16 लड़ाकू विमान शामिल हैं। इनके साथ केसी-135 एयर रिफ्यूलिंग विमान भी तैनात किए गए हैं, जो हवा में ईंधन भरने का काम करते हैं।

फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटरडार24 के मुताबिक, कई केसी-135 विमान मध्य पूर्व के आसपास उड़ान भरते दिखे हैं। इसके अलावा ई-3 सेंट्री चेतावनी विमान और कार्गो प्लेन भी क्षेत्र में सक्रिय हैं। कुल मिलाकर, बातचीत जारी रहने के बावजूद अमेरिका ने सैन्य तैयारी तेज कर दी है। अब सबकी नजरें ट्रंप के अगले कदम पर हैं, जो उन्होंने खुद कहा है कि ‘अगले 10 दिनों’ में साफ हो जाएगा।

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