लखनऊ। आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने नोएडा में श्रमिकों के धरने को उग्र रूप देने में आतंकी कनेक्शन सामने आने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। एटीएस की दो टीमें नोएडा भेजी गई हैं।
अभी तक की जांच में यह बात सामने आई है कि दो सप्ताह पहले गिरफ्तार किए गए आतंकियों के हैंडलर्स के साथ मीर इलियास और आरुषी तिवारी के बीच इंटरनेट काल के जरिए कई बार बात हुई है। दोनों आरोपितों ने एक्स से कई ट्वीट कर हिंसा भड़काने का काम किया था।
नोएडा में पिछले दिनों श्रमिकों के धरने ने अचानक उग्र रूप धारण कर लिया था। इसके चलते कई फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटना को अंजाम दिया गया। श्रमिकों की आड़ में उपद्रवियों द्वारा फैलाई गई अराजकता की जांच के बाद पुलिस ने 300 से ज्यादा लोगों और 45 से ज्यादा गैर श्रमिकों को चिह्नित किया है, जो मौके पर श्रमिकों की आड़ में अराजकता फैला रहे थे।
हिंसा की वीडियो देखने के बाद एटीएस की टीम इस नतीजे पर पहुंची है कि लखनऊ से गिरफ्तार आतंकियों के फोन से मिले आगजनी के वीडियो के पैटर्न पर ही नोएडा में आगजनी की गई थी।
एटीएस ने दो सप्ताह पहले लखनऊ से चार आतंकियों साकिब उर्फ डेविल, अरबाब, लोकेश उर्फ पपला पंडित व विकास गहलावत को गिरफ्तार किया था। इनके पास से बरामद सात मोबाइल फोन से आगजनी के कई वीडियो मिले हैं। साथ ही लखनऊ, अलीगढ़, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बेंगलुरू सहित कई शहरोंं के सार्वजनिक स्थलों के फोटो मिले हैं।
नतीजतन एटीएस ने सभी जिलों की पुलिस को आगजनी से दहशत फैलाने के आतंक के इस माड्यूल को लेकर अलर्ट भी किया था। चारों आतंकी साकिब के लिए काम करते थे। साकिब ने इंस्टाग्राम व इंटरनेट मीडिया के अन्य प्लेटफार्मों पर राधा-कृष्णा, मुस्लिम आर्मी व किंग डेविल के नाम से खाते बनाए थे।
इनके जरिए वह आतंक की नर्सरी तैयार कर रहा था। एटीएस के सूत्रों के अनुसार प्रतिबंधित आतंकी संगठन आइसिस पाकिस्तानी हैंडलरों के जरिए भारत में विभिन्न स्थानों पर आग से दहशत फैलाने की कोशिश कर रहा है।
दूसरी तरफ एटीएस ने श्रमिकों को भड़काने के आरोप में झारखंड निवासी आदित्य आनंद की भी तलाश शुरू कर दी है। आदित्य अपने साथी रुपेश राय व मनीषा चौहान के साथ धरने में शामिल था। रूपेश व मनीषा को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन आदित्य फरार है।











