तिब्बत आंतरिक मामला, उसकी आजादी का समर्थन न करें… चीन ने अमेरिका को हड़काया

बीजिंग: चीन ने गुरुवार को अमेरिका से कहा कि वह तिब्बत को चीन का हिस्सा मानने और क्षेत्र की आजादी का समर्थन न करने के अपने वादे का सम्मान करे।बीजिंग की यह टिप्पणी अमेरिकी विदेश विभाग की ओर बुधवार को जारी उस बयान के मद्देनजर आई है, जिसमें कहा गया था कि वाशिंगटन अपनी संस्कृति को बचाए रखने की तिब्बतियों की इच्छा का समर्थन करता है। बयान में चीन से दलाई लामा के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का आह्वान भी किया गया था।

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चीनी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में एक प्रेस वार्ता में अमेरिका के बयान के बारे में पूछे जाने पर कहा कि तिब्बत से जुड़े सभी मुद्दे चीन के ‘आंतरिक मामले’ हैं। निंग ने कहा, ‘शिजांग से जुड़े मुद्दे पूरी तरह से चीन के आंतरिक मामले हैं। किसी भी देश को इनमें दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।’ चीन तिब्बत को ‘शिजांग’ कहता है।

चीन की अमेरिका को सख्त हिदायत

निंग ने कहा, ‘हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वह अपने उस वादे का सम्मान करे, जिसके तहत वह मानता है कि शिजांग चीन का हिस्सा है और वह ‘ तिब्बत की आजादी ‘ का समर्थन नहीं करता है। हम अमेरिका से यह भी आग्रह करते हैं कि वह शिजांग से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल करके चीन के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद करे।’

दलाई लामा से बातचीत के मुद्दे पर चीन चुप

हालांकि, उन्होंने तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के साथ बातचीत करने की अमेरिका की अपील पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। छह जुलाई 1935 को तिब्बत के अमदो इलाके के तक्तसेर गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे 14वें दलाई लामा 1959 में तिब्बत छोड़ने के बाद भारत के धर्मशाला में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। उन्हें 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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