अब ऑनलाइन भूलेख खसरा में होंगे 46 कॉलम, मिलेंगी कई अहम जानकारियां

लखनऊ। भूलेख खसरा को ऑनलाइन करने के उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए राजस्व परिषद ने क्षेत्रिक पंजी (खसरा) के आरसी प्रपत्र-4 को संशोधित कर उसका कंप्यूटरीकरण किए जाने की प्रक्रिया निर्धारित कर दी है। राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव मनीषा त्रिघाटिया ने इस बारे में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिया है।

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फसली वर्ष 1428 यानी पहली जुलाई 2020 से पहले के वर्षों के खसरों का रखरखाव आरसी प्रपत्र-4 में ही किया जाएगा। वहीं, इस तारीख के बाद के खसरों का रखरखाव निर्धारित प्रारूप आरसी प्रपत्र-4क में कंप्यूटरीकृत स्वरूप में किया जाएगा। कंप्यूटरीकृत खसरे में 21 की बजाय 46 कॉलम होंगे।

फसली वर्ष खत्म होने पर खसरा प्रविष्टियों को फ्रीज करते हुए उसकी प्रति पीडीएफ या अन्य किसी अपरिवर्तनीय फार्मेट में परिषद स्तर पर राज्य डाटा केंद्र या शासकीय इलेक्ट्रॉनिक क्लाउड जैसे मेघराज आदि में संरक्षित की जाएगी और उसकी एक मुद्रित प्रति तहसील स्तर पर भी 12 वर्ष तक संरक्षित की जाएगी। आरसी प्रपत्र-4क में 46 कॉलम होंगे जो आठ भाग में बंटे होंगे।

भाग-01 में कॉलम संख्या एक से पांच होंगे जिनमें गाटे का विवरण दर्ज किया जाएगा। भाग-02 में कॉलम संख्या छह से 20 तक होंगे, जिनमें फसल व सिंचाई के साधन का ब्योरा दर्ज किया जाएगा। भाग-03 के कॉलम संख्या 21 से 26 तक दैवी आपदा व कृषि अपशिष्ट निस्तारण का विवरण दर्ज किया जाएगा। भाग-04 के कॉलम संख्या 27 व 28 में गाटों पर मौजूद वृक्षों का ब्योरा दर्ज किया जाएगा।

भाग-05 के कॉलम संख्या 29 से 34 तक गैर कृषिक भूमि का विवरण दर्ज होगा। भाग-06 के कॉलम संख्या 35 से 41 तक भूमि के लीज के विवरण को दर्शाया जाएगा। भाग-07 के कॉलम संख्या 42 से 45 में दो फसली क्षेत्रफल व अकृषित भूमि का विवरण दर्ज किया जाएगा। वहीं, भाग-आठ के कॉलम संख्या 46 में विशेष विवरण दर्ज किया जाएगा।

आरसी प्रपत्र-4क में लेखपाल समय-समय पर सीमाओं के सब परिवर्तनों और ऐसी सभी बातों का उल्लेख करेगा, जिनकी आवश्यकता खतौनी या कृषि आंकड़े तैयार करने के लिए होती है। राजस्व संहिता नियमावली में दिए गए निर्देशों के अनुसार क्षेत्रीय पड़ताल की जाएगी और निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन खसरा भरा जाएगा।

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