यूपी: प्रदेश के पंचायत चुनावों में एसआईआर का पड़ेगा प्रभाव

उत्तर प्रदेश को विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) में शामिल किए जाने से इसका असर पंचायत चुनाव की तैयारियों पर पड़ना तय माना जा रहा है। लोकसभा-विधानसभा और पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूचियां अलग-अलग हैं। जबकि, इन सूचियों को अपडेट करने की जिम्मेदारी उठाने वाले निचले स्तर के कर्मचारी कॉमन हैं। इसलिए दिक्कतें आना तय माना जा रहा है।

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यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले साल अप्रैल-मई में होने हैं। इन दिनों पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूचियों को अपडेट करने का काम चल रहा है। 1 जनवरी 2025 के आधार पर मतदाता सूची दुरुस्त करने के लिए सर्वे का काम पूरा हो चुका है। अब सभी एसडीएम डाटा चेकिंग के बाद इसे ऑनलाइन फीड करवाने का काम करेंगे। मतदाता सूची का मसौदा (अनंतिम सूची) 5 दिसंबर को प्रकाशित होगा। जबकि, फाइनल सूची 15 जनवरी 2026 को प्रकाशित करने की घोषणा की गई है।

इसके बाद पंचायत चुनाव की मतदाता सूचियों में उन युवा मतदाताओं को शामिल करने का अभियान भी चलेगा, जो 1 जनवरी 2026 को 18 साल के हो जाएंगे। इसी बीच 28 अक्तूबर से 7 फरवरी के बीच एसआईआर का काम पूरा करना होगा। जानकारों का कहना है कि दोनों ही तरह की मतदाता सूचियों के लिए बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) कॉमन हैं, इसलिए काम का भार कम करने के तरीके भी निकालने होंगे। इसके लिए यह भी हो सकता है कि स्थानीय प्रशासन कुछ और बीएलओ देकर जिम्मेदारियों को बांट दें। 

क्या पंचायत चुनाव टल सकते हैं?

 पंचायतीराज विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध के साथ बताया कि पंचायतीराज अधिनियम के अनुसार, ये चुनाव पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के छह माह पहले या बाद तक कराए जा सकते हैं। इसलिए छह माह से ज्यादा चुनाव टालने पर केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता रुक जाएगी। फिर यूपी में वर्ष 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव को देखते हुए भी पंचायत चुनावों को टालना मुमकिन नहीं होगा। इसलिए इन सब स्थितियों के बीच ही समाधान ढूंढने होंगे।

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